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Tehri News: बागी गांव की सिंचाई गूलों की नहीं हो पाई मरम्मत
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Thu, 18 Jun 2026 05:24 PM IST
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ग्रामीणों के सामने धान की रोपाई के लिए बना है पानी का संकट
नई टिहरी। प्रतापनगर क्षेत्र में गत वर्ष अतिवृष्टि होने से ग्राम पंचायत बागी सहित उनके तीन तोकों की सिंचाई गूलें क्षतिग्रस्त हो गई थी। गूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य न होने से काश्तकारों के सामने सिंचाई की समस्या बनी है।
ग्राम पंचायत बागी, सेमगाड़, भेड़ीगाड़ और थली नामक तोक के काश्तकार की खेतों की सिंचाई जरिये सेमगाड़ गदेरे से होती थी। ग्राम प्रधान बीना देवी और ग्रामीणों तेजपाल बगियाल ने बताया कि गत वर्ष अगस्त माह में प्रतापनगर क्षेत्र में अतिवृष्टि होने से सेमगाड़ गदेरे के उफान पर आने से गदेरे से सटी बागी सहित अन्य 10 से अधिक गांवों की गूलें क्षतिग्रस्त हो गई थी।
क्षेत्र के ग्रामीण निरंतर गूलों की मरम्मत और पुनर्निमाण की मांग करते आ रहें हैं लेकिन गूलों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। वर्तमान समय में क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य शुरू हो गया है लेकिन पानी की कमी के कारण धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने प्लास्टिक के पाइप बिछाकर अस्थायी व्यवस्था की है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी न पहुंचने से धान की रोपाई का संकट हो गया है।
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गूलों से गांव और तोकों के 80 से अधिक परिवारों की सिंचित भूमि इन्हीं गूलों पर निर्भर है। उन्होंने शासन-प्रशासन से शीघ्र गूलों के मरम्मत की मांग उठाई है। अधिशासी अभियंता बृजेश गुप्ता का कहना कि गांव की क्षतिग्रस्त गूलों का प्रस्ताव तैयार कर पूर्व में जिला प्रशासन को दिया गया है। धनराशि मिलने के बाद ही मरम्मत और पुनर्निमाण का कार्य हो पाएगा।
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नई टिहरी। प्रतापनगर क्षेत्र में गत वर्ष अतिवृष्टि होने से ग्राम पंचायत बागी सहित उनके तीन तोकों की सिंचाई गूलें क्षतिग्रस्त हो गई थी। गूलों की मरम्मत और पुनर्निर्माण का कार्य न होने से काश्तकारों के सामने सिंचाई की समस्या बनी है।
ग्राम पंचायत बागी, सेमगाड़, भेड़ीगाड़ और थली नामक तोक के काश्तकार की खेतों की सिंचाई जरिये सेमगाड़ गदेरे से होती थी। ग्राम प्रधान बीना देवी और ग्रामीणों तेजपाल बगियाल ने बताया कि गत वर्ष अगस्त माह में प्रतापनगर क्षेत्र में अतिवृष्टि होने से सेमगाड़ गदेरे के उफान पर आने से गदेरे से सटी बागी सहित अन्य 10 से अधिक गांवों की गूलें क्षतिग्रस्त हो गई थी।
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क्षेत्र के ग्रामीण निरंतर गूलों की मरम्मत और पुनर्निमाण की मांग करते आ रहें हैं लेकिन गूलों का मरम्मत कार्य नहीं हो पाया। वर्तमान समय में क्षेत्र में धान की रोपाई का कार्य शुरू हो गया है लेकिन पानी की कमी के कारण धान की रोपाई नहीं हो पा रही है। ग्रामीणों ने प्लास्टिक के पाइप बिछाकर अस्थायी व्यवस्था की है लेकिन पर्याप्त मात्रा में पानी न पहुंचने से धान की रोपाई का संकट हो गया है।
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गूलों से गांव और तोकों के 80 से अधिक परिवारों की सिंचित भूमि इन्हीं गूलों पर निर्भर है। उन्होंने शासन-प्रशासन से शीघ्र गूलों के मरम्मत की मांग उठाई है। अधिशासी अभियंता बृजेश गुप्ता का कहना कि गांव की क्षतिग्रस्त गूलों का प्रस्ताव तैयार कर पूर्व में जिला प्रशासन को दिया गया है। धनराशि मिलने के बाद ही मरम्मत और पुनर्निमाण का कार्य हो पाएगा।