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Tehri News: नवजात की मौत पर उठे सवाल, परिजनों ने की जांच की मांग
Sun, 16 Aug 2026 07:37 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sun, 16 Aug 2026 07:37 PM IST
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घनसाली (टिहरी)। भिलंगना ब्लॉक की स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर एक बार फिर सवाल खड़े हुए हैं। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर में समय से पहले जन्मे नवजात की बेस अस्पताल श्रीनगर ले जाते समय रास्ते में मौत हो गई। नवजात के परिजनों ने रेफर किए जाने और एंबुलेंस में पर्याप्त स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध न होने पर सवाल उठाते हुए मामले की उच्चस्तरीय जांच की मांग की है।
कोट गांव निवासी केसर सिंह की पत्नी आरती देवी (29) को 12 अगस्त को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर लाया गया था। उसी दिन शाम करीब 5:30 बजे बिना आपरेशन के नवजात को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि प्रसव के कुछ समय बाद डॉक्टरों ने महिला और बच्चे को बेस अस्पताल श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया।
केसर सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि जिस एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को श्रीनगर भेजा गया, उसमें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था। चिकित्सा प्रभारी डॉ. उषा भट्ट ने बताया कि बच्चा सात माह में ही हो गया था। नवजात का जन्म समय से पहले होने से उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी की आवश्यकता थी। इसी वजह से रेफर किया गया था।
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मलेथा तक नवजात की निगरानी 108 सेवा के आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन और औषधि विशेषज्ञ के पास थी। मलेथा के बाद परिजनों ने बच्चे को अपनी गोद में ले लिया। इसके कुछ समय बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। श्रीनगर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने नवजात की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया।
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कोट गांव निवासी केसर सिंह की पत्नी आरती देवी (29) को 12 अगस्त को प्रसव के लिए सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र बेलेश्वर लाया गया था। उसी दिन शाम करीब 5:30 बजे बिना आपरेशन के नवजात को जन्म दिया। परिजनों का कहना है कि प्रसव के कुछ समय बाद डॉक्टरों ने महिला और बच्चे को बेस अस्पताल श्रीनगर के लिए रेफर कर दिया।
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केसर सिंह ने मुख्यमंत्री को भेजे ज्ञापन में आरोप लगाया है कि जिस एंबुलेंस से जच्चा-बच्चा को श्रीनगर भेजा गया, उसमें आवश्यक स्वास्थ्य सुविधाओं का अभाव था। चिकित्सा प्रभारी डॉ. उषा भट्ट ने बताया कि बच्चा सात माह में ही हो गया था। नवजात का जन्म समय से पहले होने से उसे विशेषज्ञ चिकित्सकों की निगरानी की आवश्यकता थी। इसी वजह से रेफर किया गया था।
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मलेथा तक नवजात की निगरानी 108 सेवा के आपातकालीन चिकित्सा तकनीशियन और औषधि विशेषज्ञ के पास थी। मलेथा के बाद परिजनों ने बच्चे को अपनी गोद में ले लिया। इसके कुछ समय बाद बच्चे की हालत बिगड़ गई और उसकी मौत हो गई। श्रीनगर अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने नवजात की जांच कर उसे मृत घोषित कर दिया।