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Tehri News: सह खातेदारों की सहमति के बिना रजिस्ट्री पर लगे रोक
संवाद न्यूज एजेंसी, टिहरी
Updated Sat, 10 Jan 2026 07:01 PM IST
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कोट की प्रधान ने मुख्यमंत्री को भेजा ज्ञापन, ठोस कदम उठाने की मांग
कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोट की प्रधान ममता भट्ट ने सीएम को दिए ज्ञापन में ग्राम पंचायत में संयुक्त खातेदारों की भूमि क्रय-विक्रय की जांच करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कृषकों की श्रेणी 1 (क) संक्रमण का अधिकार वाली भूमि सह खातेदारों को विश्वास लिए बगैर जमकर क्रिय-विक्रय की जा रही है जिससे गांव में भाई-भाई के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में जमीन की खरीद फरोख्त बढ़ी है। बाहर से आकर भूमाफिया गांव के लोगों को बहला-फुसलाकर और गांव से बाहर रह रहे भूस्वामी सह खातेदारों को विश्वास में लिए बगैर धड़ल्ले से जमीन बेच रहे हैं। यही स्थिति रही तो 2027 तक गांव की 90 प्रतिशत जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा हो जाएगा।
प्रधान ने बताया कि 1950 से 1985 के दौर तक जमीन का क्रय-विक्रय नकद भुगतान के अलावा वस्तु विनिमय के आधार पर किया जाता था जिससे अधिकतर मामलों में लोग रजिस्ट्री नहीं कराते थे। अब कई लोग गांव छोड़कर बाहर चले गए हैं। दलाल ऐसी जमीन का पता कर रहे हैं जो गांव छोड़कर बाहर बसने वालों के नाम पर हैं लेकिन कब्जा गांव में रहने वाले का है। दलाल मिली भगत से ऐसी जमीन खरीद रहे हैं।
रजिस्ट्री कराने के बाद जब वह कब्जा लेने जा रहे हैं तो विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। अभी तक ऐसे कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए सह खातेदारों की सहमति के बिना रजिस्ट्री पर रोक लगाने और पिछले डेढ़ साल में क्रय-विक्रय की गई जमीन की जांच कराने की मांग की है।
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कंडीसौड़ (टिहरी)। थौलधार ब्लॉक के ग्राम पंचायत कोट की प्रधान ममता भट्ट ने सीएम को दिए ज्ञापन में ग्राम पंचायत में संयुक्त खातेदारों की भूमि क्रय-विक्रय की जांच करने की मांग की है। उन्होंने बताया कि कृषकों की श्रेणी 1 (क) संक्रमण का अधिकार वाली भूमि सह खातेदारों को विश्वास लिए बगैर जमकर क्रिय-विक्रय की जा रही है जिससे गांव में भाई-भाई के बीच विवाद की स्थिति बनी हुई है।
उन्होंने बताया कि पिछले डेढ़ साल में जमीन की खरीद फरोख्त बढ़ी है। बाहर से आकर भूमाफिया गांव के लोगों को बहला-फुसलाकर और गांव से बाहर रह रहे भूस्वामी सह खातेदारों को विश्वास में लिए बगैर धड़ल्ले से जमीन बेच रहे हैं। यही स्थिति रही तो 2027 तक गांव की 90 प्रतिशत जमीन पर बाहरी लोगों का कब्जा हो जाएगा।
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प्रधान ने बताया कि 1950 से 1985 के दौर तक जमीन का क्रय-विक्रय नकद भुगतान के अलावा वस्तु विनिमय के आधार पर किया जाता था जिससे अधिकतर मामलों में लोग रजिस्ट्री नहीं कराते थे। अब कई लोग गांव छोड़कर बाहर चले गए हैं। दलाल ऐसी जमीन का पता कर रहे हैं जो गांव छोड़कर बाहर बसने वालों के नाम पर हैं लेकिन कब्जा गांव में रहने वाले का है। दलाल मिली भगत से ऐसी जमीन खरीद रहे हैं।
रजिस्ट्री कराने के बाद जब वह कब्जा लेने जा रहे हैं तो विवाद की स्थिति पैदा हो रही है। अभी तक ऐसे कई मामले सामने आए हैं। उन्होंने इस पर रोक लगाने के लिए सह खातेदारों की सहमति के बिना रजिस्ट्री पर रोक लगाने और पिछले डेढ़ साल में क्रय-विक्रय की गई जमीन की जांच कराने की मांग की है।