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Udham Singh Nagar News: चोरी के 14 साल पुराने मामले में दोषियों को आचरण में सुधार का मौका
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 24 Mar 2026 12:50 AM IST
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रुद्रपुर। द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायालय मीना देउपा की अदालत ने चोरी के 14 साल पुराने प्रकरण के दो दोषियों को आचरण में सुधार का मौका दिया है। अदालत ने दोषियों को 30 हजार का रुपये का निजी बंधपत्र भरने का आदेश भी दिया है।
जानकारी के मुताबिक, सितारगंज वार्ड नंबर 11 निवासी सगीर अहमद ने कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि जून 2012 को उसके घर से चारों ने करीब साढ़े तीन लाख के जेवर, नकदी, मोबाइल और कैमरा चोरी कर लिए थे। पुलिस ने जांच के बाद अशोक शर्मा निवासी रम्पूरा मस्जिद के पास सितारगंज और अबरार हुसैन निवासी ग्राम पंडरी थाना सितारगंज को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी का सामान बरामद किया था। निचली अदालत ने वर्ष 2020 में दोनों को आईपीसी की धारा 411 के तहत दोषी मानते हुए दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने जिला अदालत में अपील दायर की थी।
द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना देउपा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस की बरामदगी और गवाहों के बयान पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हालांकि आरोपियों की कम उम्र और यह उनका पहला अपराध होने को देखते हुए अदालत ने परिवीक्षा अधिनियम, 1958 के तहत राहत देते हुए जेल की सजा रद्द करते हुए दोनों को एक वर्ष के लिए अच्छे आचरण की शर्त पर छोड़ने का आदेश दिया। साथ ही प्रत्येक आरोपी को 30 हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरने को कहा गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर शर्तों का उल्लंघन हुआ तो सजा दोबारा लागू की जाएगी।
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जानकारी के मुताबिक, सितारगंज वार्ड नंबर 11 निवासी सगीर अहमद ने कोतवाली में प्राथमिकी दर्ज कराते हुए बताया था कि जून 2012 को उसके घर से चारों ने करीब साढ़े तीन लाख के जेवर, नकदी, मोबाइल और कैमरा चोरी कर लिए थे। पुलिस ने जांच के बाद अशोक शर्मा निवासी रम्पूरा मस्जिद के पास सितारगंज और अबरार हुसैन निवासी ग्राम पंडरी थाना सितारगंज को गिरफ्तार कर उनके कब्जे से चोरी का सामान बरामद किया था। निचली अदालत ने वर्ष 2020 में दोनों को आईपीसी की धारा 411 के तहत दोषी मानते हुए दो-दो साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई थी। इस फैसले के खिलाफ आरोपियों ने जिला अदालत में अपील दायर की थी।
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द्वितीय अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मीना देउपा ने सुनवाई के दौरान पाया कि पुलिस की बरामदगी और गवाहों के बयान पर्याप्त और विश्वसनीय हैं। अदालत ने स्पष्ट किया कि दोषसिद्धि में कोई कानूनी त्रुटि नहीं है। हालांकि आरोपियों की कम उम्र और यह उनका पहला अपराध होने को देखते हुए अदालत ने परिवीक्षा अधिनियम, 1958 के तहत राहत देते हुए जेल की सजा रद्द करते हुए दोनों को एक वर्ष के लिए अच्छे आचरण की शर्त पर छोड़ने का आदेश दिया। साथ ही प्रत्येक आरोपी को 30 हजार रुपये का निजी बंधपत्र भरने को कहा गया है। अदालत ने चेतावनी दी कि अगर शर्तों का उल्लंघन हुआ तो सजा दोबारा लागू की जाएगी।