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Udham Singh Nagar News: जाली आय प्रमाणपत्र से लिया प्रवेश रद्द... कपड़ा कारोबारी से होगी 52 हजार की वसूली

Sun, 02 Aug 2026 12:54 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Sun, 02 Aug 2026 12:54 AM IST
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Admission obtained with fake income certificate cancelled... Rs 52 thousand to be recovered from textile businessman
रुद्रपुर। शिक्षा का अधिकार (आरटीई) अधिनियम के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए आरक्षित सीट पर डाका डालने वाले कपड़ा कारोबारी का आय प्रमाणपत्र निरस्त कर दिया गया है। साथ ही, खंड शिक्षा अधिकारी ने निजी विद्यालय को छात्र का प्रवेश रद्द करने और दी गई फीस को वसूलने का निर्देश दिया है।
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शिक्षा विभाग के अनुसार, गदरपुर निवासी कपड़ा कारोबारी नीरज बठला ने अपने बेटे को आरटीई के तहत प्रवेश दिलाने के लिए आय सीमा के पात्र होने का दावा करते हुए आय प्रमाणपत्र प्रस्तुत किया था जिसके आधार पर उसके बेटे को आरटीई योजना के अंतर्गत प्रवेश मिल गया। बच्चा लंबे समय से विद्यालय में अध्ययनरत था। इसी बीच किसी ने मामले की शिकायत खंड शिक्षा अधिकारी से की और उन्होंने आय प्रमाणपत्र सत्यापन के लिए तहसीलदार को भेजा था।
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जांच के बाद सामने आया कि प्रमाणपत्र फर्जी तरीके से बनवाया गया था जिसे तहसीलदार ने निरस्त कर दिया। इसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने उत्तराखंड निशुल्क व अनिवार्य बाल शिक्षा का अधिकार अधिनियम-2009 के प्रावधानों के तहत कार्रवाई करते हुए बच्चे का प्रवेश रद्द कर दिया। साथ ही स्कूल को सरकार से प्राप्त पूरी प्रतिपूर्ति राशि संबंधित अभिभावक से वसूलकर जमा कराने के निर्देश दिए हैं।
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आदेश में कहा गया है कि स्कूल प्रबंधक आरटीई पोर्टल से छात्र का नाम तत्काल हटाए। रिकॉर्ड के अनुसार, वर्ष 2023-24 और 2024-25 में 25,213-25,213 रुपये और वर्ष 2025-26 में 2,489 रुपये, यानी 52,915 रुपये स्कूल को मिले थे। यह पूरी राशि कारोबारी से वसूली जाएगी।
तीन साल बाद खुला फर्जीवाड़े का राज
आरटीई के तहत वर्ष 2023-24 में मिला प्रवेश करीब तीन साल तक जारी रहा लेकिन शिकायत के बाद हुए सत्यापन में पूरा मामला सामने आ गया। अब देखना होगा कि एक महीने पहले की गई शिकायत पर विभाग क्या कार्रवाई करता है लेकिन बड़ी बात यह है कि अगर शिकायत नहीं होती तो कारोबारी ऐसे ही बच्चे को आटीई के तहत शिक्षा दिलवाता रहता।

आरटीई गरीब और जरूरतमंद बच्चों का अधिकार है। फर्जी दस्तावेज के जरिये योजना का लाभ लेने वालों के खिलाफ आगे भी इसी तरह सख्त कार्रवाई जारी रहेगी। - सावेद आलम, खंड शिक्षा अधिकारी
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