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Udham Singh Nagar News: रोजी-रोटी के लिए हर रोज दहशत के बीच सफर

Mon, 03 Aug 2026 01:34 AM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Mon, 03 Aug 2026 01:34 AM IST
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Traveling through terror every day for livelihood
रुद्रपुर के सिडकुल ढाल पर सुबह के समय दिखा सन्नाटा
रुद्रपुर। शहर के सिडकुल की सड़क अब कामकाजी महिलाओं के लिए सुरक्षित नहीं रही। रोजाना ड्यूटी आते और जाते हुए महिलाओं को छेड़छाड़, लूट और पीछा करना जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है। अपने परिवार को चलाने और खराब आर्थिक स्थिति के कारण कई बार महिलाएं शिकायत करने से हिचकती हैं।
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पिछले एक महीने के भीतर इस मार्ग पर महिलाओं से लूट, रास्ता रोकने और पीछा करने जैसी दो से तीन घटनाएं सामने आ चुकी हैं। इसके बावजूद इलाके में सुरक्षा व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं दिख रहा है। तड़के चार से छह बजे और रात की शिफ्ट बदलने के दौरान बड़ी संख्या में महिलाएं पैदल, साइकिल और ई-रिक्शा से फैक्टरियों तक पहुंचती हैं।
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कामकाजी महिलाओं कहना है कि सड़क किनारे नशा करने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। कई बार महिलाओं के विरोध करने पर बदमाश अभद्रता पर उतर आते हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों से आने वाली अधिकांश महिलाएं नौकरी छूटने या बार-बार थाने के चक्कर लगाने के डर से शिकायत दर्ज कराने से भी बचती हैं।
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महिलाओं ने ट्रांजिट कैंप-सिडकुल मार्ग पर नियमित पुलिस गश्त, सीसीटीवी कैमरे, पर्याप्त स्ट्रीट लाइट और संदिग्ध तत्वों के खिलाफ अभियान चलाने की मांग की है ताकि कामकाजी महिलाएं बिना डर के अपने कार्यस्थल तक पहुंच सकें।

नशे के लिए लूट, रोजाना शिकार की तलाश में रहते हैं बदमाश
सिडकुल मार्ग पर नशे के आदी युवकों की मौजूदगी स्थानीय लोगों के लिए बड़ी चिंता बन गई है। कई युवक सुनसान स्थानों पर बैठकर राहगीरों, विशेषकर अकेली महिलाओं पर नजर रखते हैं। मौका मिलते ही मोबाइल, पर्स और नकदी लूटने या डराने-धमकाने की कोशिश करते हैं। हाल की घटनाओं ने इस आशंका को और मजबूत किया है कि नशे की लत पूरी करने के लिए महिलाएं आसान निशाना बनाई जा रही हैं।

पुलिस की गश्त नहीं, सिर्फ चालानी कार्रवाई
स्थानीय लोगों का आरोप है कि सिडकुल मार्ग पर नियमित पुलिस गश्त न होने से असामाजिक तत्व बेखौफ घूमते हैं। उनका कहना है कि पुलिस का ध्यान अधिकतर वाहन चेकिंग और चालानी कार्रवाई तक सीमित रहता है जबकि संवेदनशील मार्गों पर पैदल या मोबाइल गश्त बहुत कम दिखाई देती है। लोगों ने मांग की है कि शिफ्ट बदलने के समय पुलिस की विशेष गश्त, पीसीआर वाहन की तैनाती और संवेदनशील स्थानों पर निगरानी बढ़ाई जाए, ताकि महिलाओं में सुरक्षा का भरोसा कायम हो सके।

टाइमलाइन
सुबह सात बजे - सिडकुल ढाल पर सड़क पर चहल-पहल कम रहती है और वहां से निकलने वाली महिलाओं को अक्सर छेड़छाड़ का सामना करना पड़ता है।
सुबह नौ बजे - सिडकुल ढाल पर लोगों की आवाजाही बढ़ जाती है लेकिन ढाल के अंदर जाते ही नशेड़ी प्रवृत्ति के लोगों की दस्तक देखने को मिलती है।
शाम छह बजे - सिडकुल से घर पैदल जाने वाली सैंकड़ों महिलाएं इसी रास्ते से निकलीं है और उन्हें कुछ उचक्कों की तिरछी नजरों और पीछा करने जैसी घटनाओं का सामना करना पड़ता है।
रात आठ बजे - सिडकुल से ट्रांजिट कैंप जाने वाली रोड बिल्कुल सुनसान हो जाती है। सिर्फ कामकाजी और वाहन चालाक ही गुजरते और इस दौरान नशे में अक्सर लोगों के विवाद होते हैं।

कोट
पूर्व में दी गईं शिकायतों की जांच जारी है। समय-समय पर सिडकुल क्षेत्र में पुलिस गश्त करती है। शिकायत के आधार पर गश्त की समय सीमा बढ़ाई जाएगी। - उत्तम सिंह नेगी, एसपी सिटी
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