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Udham Singh Nagar News: पश्चिम एशिया के बिगड़े हालात के बीच 10 देशों में हरी सब्जियों और चावल का निर्यात ठप
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Fri, 27 Mar 2026 01:26 AM IST
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रुद्रपुर। अंतरराष्ट्रीय हालात और युद्ध का असर जिले के निर्यात कारोबार पर भी पड़ा है। खासतौर पर चावल और फ्रोजन वेजिटेबल जैसे मटर, बींस, गाजर, करेला, तोरई, पालक और भिंडी आदि सब्जियों के निर्यात में भारी गिरावट दर्ज की गई है। सामान्य हालातों में इन उत्पादों का निर्यात करीब एक लाख क्विंटल तक होता था लेकिन युद्ध की शुरुआत के बाद से यह लगभग ठप हो गया है।
पश्चिम एशिया के देशों में निर्यात लगभगत बंद हो चुका है। इससे स्थानीय निर्यातकों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। जिले से जुड़े निर्यातक पहले पश्चिम एशिया के करीब 10 देशों में नियमित रूप से माल भेजते थे लेकिन वर्तमान स्थिति में वहां सप्लाई रुक गई है। हालांकि, साउथ अफ्रीका, मैक्सिको, जापान, सिंगापुर, मोजांबिक, केन्या और वेस्ट अफ्रीका जैसे देशों के लिए अब भी निर्यात जारी है।
निर्यातकों के अनुसार जिले की कई राइस मिलें जो निर्यातकों को चावल की सप्लाई करती हैं वह भी काफी प्रभावित हुआ हैं। मिलों में तैयार माल स्टॉक में पड़ा है लेकिन निर्यात न होने के कारण उसकी खपत नहीं हो पा रही है। इससे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
निर्यातकों का कहना है की पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। लिहाजा भारत सरकार ने इस बीच निर्यातकों को राहत देने के लिए पॉलिसी तैयार की है जिसके तहत युद्ध के चलते हुए नुकसान की भरपाई करने की बात कही गई है। इससे निर्यातकों में सकारात्मक उम्मीद जगी है।
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कारोबारियों का कहना
खाड़ी देशों में यहां से सबसे अधिक चावल और फ्रोजन सब्जियाें का निर्यात होता हैं लेकिन बीते कई दिन से युद्ध के कारण निर्यात बंद हो गया है। हालांकि अन्य देशों में माल भेज कर नुकसान की भरपाई का प्रयास किया जा रहा है। हालात सामान्य होने पर ही खाद्य सामग्री का निर्यात होगा। - अशोक अग्रवाल, एक्सपोर्टर
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युद्ध के कारण लगभग सभी देशों की व्यापारिक गतिविधियां बेपटरी होती दिख रही हैं और आर्थिक उथल-पुथल चल रही है। भारत सरकार के कई नीतिगत फैसलों के कारण यहां का कारोबार बहुत अधिक प्रभावित नहीं हुआ है। क्योंकि खाड़ी देशों के अलावा अन्य सभी देशों में लगातार निर्यात जारी है। - अजय तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल इन्टरप्रेन्योर वेलफेयर एसोसिएशन
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पश्चिम एशिया के देशों में निर्यात लगभगत बंद हो चुका है। इससे स्थानीय निर्यातकों और व्यापारियों को बड़ा झटका लगा है। जिले से जुड़े निर्यातक पहले पश्चिम एशिया के करीब 10 देशों में नियमित रूप से माल भेजते थे लेकिन वर्तमान स्थिति में वहां सप्लाई रुक गई है। हालांकि, साउथ अफ्रीका, मैक्सिको, जापान, सिंगापुर, मोजांबिक, केन्या और वेस्ट अफ्रीका जैसे देशों के लिए अब भी निर्यात जारी है।
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निर्यातकों के अनुसार जिले की कई राइस मिलें जो निर्यातकों को चावल की सप्लाई करती हैं वह भी काफी प्रभावित हुआ हैं। मिलों में तैयार माल स्टॉक में पड़ा है लेकिन निर्यात न होने के कारण उसकी खपत नहीं हो पा रही है। इससे कारोबारियों की आर्थिक स्थिति पर दबाव बढ़ता जा रहा है।
निर्यातकों का कहना है की पश्चिमी एशिया में युद्ध के कारण कारोबार काफी प्रभावित हुआ है। लिहाजा भारत सरकार ने इस बीच निर्यातकों को राहत देने के लिए पॉलिसी तैयार की है जिसके तहत युद्ध के चलते हुए नुकसान की भरपाई करने की बात कही गई है। इससे निर्यातकों में सकारात्मक उम्मीद जगी है।
कारोबारियों का कहना
खाड़ी देशों में यहां से सबसे अधिक चावल और फ्रोजन सब्जियाें का निर्यात होता हैं लेकिन बीते कई दिन से युद्ध के कारण निर्यात बंद हो गया है। हालांकि अन्य देशों में माल भेज कर नुकसान की भरपाई का प्रयास किया जा रहा है। हालात सामान्य होने पर ही खाद्य सामग्री का निर्यात होगा। - अशोक अग्रवाल, एक्सपोर्टर
युद्ध के कारण लगभग सभी देशों की व्यापारिक गतिविधियां बेपटरी होती दिख रही हैं और आर्थिक उथल-पुथल चल रही है। भारत सरकार के कई नीतिगत फैसलों के कारण यहां का कारोबार बहुत अधिक प्रभावित नहीं हुआ है। क्योंकि खाड़ी देशों के अलावा अन्य सभी देशों में लगातार निर्यात जारी है। - अजय तिवारी, पूर्व अध्यक्ष, सिडकुल इन्टरप्रेन्योर वेलफेयर एसोसिएशन