{"_id":"69f4ffb13f57f1a4070d8928","slug":"lack-of-evidence-accused-in-road-accident-case-acquitted-after-10-years-rudrapur-news-c-242-1-rdp1029-140829-2026-05-02","type":"story","status":"publish","title_hn":"Udham Singh Nagar News: साक्ष्यों का अभाव... 10 साल बाद सड़क हादसे का अभियुक्त दोषमुक्त","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Udham Singh Nagar News: साक्ष्यों का अभाव... 10 साल बाद सड़क हादसे का अभियुक्त दोषमुक्त
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Sat, 02 May 2026 01:02 AM IST
विज्ञापन
विज्ञापन
रुद्रपुर। प्रथम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतीक मथेला ने वर्ष 2015 में हुए सड़क दुर्घटना के मामले में अभियुक्त को साक्ष्यों के अभाव में दोषमुक्त कर दिया।
31 दिसंबर 2015 की देर रात जीडीएम स्कूल रुद्रपुर के समीप तेज रफ्तार कार ने रिक्शे को टक्कर मार दी थी। हादसे में रिक्शा चालक नन्हुकी प्रसाद और यात्री सुबोध कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद ट्रांजिट कैंप कोतवाली में घायल सुबोध की पत्नी रंजू ने अज्ञात वाहन चालक पर प्राथमिकी कराई।
पुलिस जांच में बरेली निवासी यश कुमार का नाम सामने आया। पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल की। मामले की सुनवाई प्रथम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतीक मथेला की अदालत में हुई। 10 साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अभियुक्त की संलिप्तता को साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने पाया कि घायल गवाह सुबोध कुमार ने बहस में साफ कहा कि उन्होंने अभियुक्त को वाहन चलाते हुए नहीं देखा। वहीं, कथित चश्मदीद गवाह भी अभियुक्त की पहचान पुख्ता नहीं कर सका। मामले की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि वाहन के पंजीकृत स्वामी को न तो गवाह बनाया गया और न ही कोर्ट में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने भी इस तर्क से सहमति जताई और साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
Trending Videos
31 दिसंबर 2015 की देर रात जीडीएम स्कूल रुद्रपुर के समीप तेज रफ्तार कार ने रिक्शे को टक्कर मार दी थी। हादसे में रिक्शा चालक नन्हुकी प्रसाद और यात्री सुबोध कुमार गंभीर रूप से घायल हो गए थे। घटना के बाद ट्रांजिट कैंप कोतवाली में घायल सुबोध की पत्नी रंजू ने अज्ञात वाहन चालक पर प्राथमिकी कराई।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुलिस जांच में बरेली निवासी यश कुमार का नाम सामने आया। पुलिस ने चार्जशीट अदालत में दाखिल की। मामले की सुनवाई प्रथम अपर सिविल जज (जूनियर डिवीजन) प्रतीक मथेला की अदालत में हुई। 10 साल तक चली सुनवाई के दौरान अभियोजन पक्ष अभियुक्त की संलिप्तता को साबित करने में विफल रहा।
अदालत ने पाया कि घायल गवाह सुबोध कुमार ने बहस में साफ कहा कि उन्होंने अभियुक्त को वाहन चलाते हुए नहीं देखा। वहीं, कथित चश्मदीद गवाह भी अभियुक्त की पहचान पुख्ता नहीं कर सका। मामले की सबसे बड़ी कमजोरी यह रही कि वाहन के पंजीकृत स्वामी को न तो गवाह बनाया गया और न ही कोर्ट में पेश किया गया। बचाव पक्ष ने दलील दी कि केवल संदेह के आधार पर किसी को दोषी नहीं ठहराया जा सकता। अदालत ने भी इस तर्क से सहमति जताई और साक्ष्यों के अभाव में अभियुक्त को संदेह का लाभ देते हुए सभी आरोपों से बरी कर दिया गया।
