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आरटीआई में खुलासा : सीएमओ दफ्तर में शिकायतें दर्ज, लेकिन रिकॉर्ड गायब
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 30 Mar 2026 12:06 AM IST
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रुद्रपुर। मुख्य चिकित्सा अधिकारी कार्यालय एक बार फिर चर्चाओं में है। आरटीआई के तहत मांगी गई सूचना में कई चौंकाने वाले तथ्य सामने आए हैं। विभाग ने खुद स्वीकार किया है कि एक साल में 16 सामान्य और 28 निजी अस्पतालों से जुड़ी शिकायतें प्राप्त हुईं, लेकिन इन शिकायतों पर क्या कार्रवाई हुई, इसका ठोस रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं कराया गया।
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जांच रिपोर्ट, कार्रवाई आदेश और निस्तारण का विवरण देने के बजाय अधिकतर बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध नहीं या सूचना धारित नहीं कहकर जवाब टाल दिया गया। कई जगह सिर्फ कार्यवाही गतिमान है लिखकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया। सीएमओ कार्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई निर्धारित समय-सीमा तय नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब समय-सीमा ही तय नहीं, तो जवाबदेही किस आधार पर तय होगी। निजी अस्पतालों से जुड़ी 28 शिकायतों में कितने लोगों को दोषी पाया गया, कितनों पर कार्रवाई हुई इसका भी कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। आयुष्मान योजना और इलाज के दौरान मौत जैसे संवेदनशील मामलों में भी विभाग ठोस जानकारी देने में विफल रहा।
अब शासन स्तर पर होगी शिकायत
आरटीआई में सामने आई खामियों के बाद अब यह मामला शासन स्तर तक ले जाने की तैयारी है। सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यदि जांच बैठती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
कोट
जांच रिपोर्ट और कार्रवाई, आदेश आदि कंसेंट के बाद ही दिए जाते हैं। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि जांच रिपोर्ट, कार्रवाई आदेश और निस्तारण का विवरण देने के बजाय अधिकतर बिंदुओं पर सूचना उपलब्ध नहीं या सूचना धारित नहीं कहकर जवाब टाल दिया गया। कई जगह सिर्फ कार्यवाही गतिमान है लिखकर जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया गया। सीएमओ कार्यालय ने यह भी स्वीकार किया कि शिकायतों के निस्तारण के लिए कोई निर्धारित समय-सीमा तय नहीं है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब समय-सीमा ही तय नहीं, तो जवाबदेही किस आधार पर तय होगी। निजी अस्पतालों से जुड़ी 28 शिकायतों में कितने लोगों को दोषी पाया गया, कितनों पर कार्रवाई हुई इसका भी कोई स्पष्ट विवरण नहीं दिया गया। आयुष्मान योजना और इलाज के दौरान मौत जैसे संवेदनशील मामलों में भी विभाग ठोस जानकारी देने में विफल रहा।
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अब शासन स्तर पर होगी शिकायत
आरटीआई में सामने आई खामियों के बाद अब यह मामला शासन स्तर तक ले जाने की तैयारी है। सीएमओ कार्यालय की कार्यप्रणाली, रिकॉर्ड प्रबंधन और पारदर्शिता को लेकर औपचारिक शिकायत दर्ज कराई जा सकती है। यदि जांच बैठती है तो जिम्मेदार अधिकारियों पर विभागीय कार्रवाई तय मानी जा रही है।
कोट
जांच रिपोर्ट और कार्रवाई, आदेश आदि कंसेंट के बाद ही दिए जाते हैं। - डॉ. केके अग्रवाल, सीएमओ