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Udham Singh Nagar News: चैती मेला का नखाशा बाजार के अस्तित्व पर मंडरा रहा खतरा
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Tue, 17 Mar 2026 01:13 AM IST
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काशीपुर। मां बाल सुंदरी देवी के चैती मेले के लगने वाले लगभग 168 वर्ष पुराने प्रसिद्ध नखाशा बाजार के अस्तित्व पर अब खतरा मंडरा रहा है। इस बाजार में 10-12 नस्ल के घोड़े बिक्री के लिए आते थे, लेकिन भूमि का बंटवारा होने के बाद से अब नखाशा बाजार पर बंद होने की कगार पर पहुंच गया है।
उत्तर भारत का प्रसिद्ध ऐतिहासिक चैती में लगने वाला नखाशा बाजार लगभग 168 वर्ष पुराना है। इस बाजार में मेला शुरू होने और मां भगवती का डोला मंदिर आने तक उत्तराखंड के अलावा यूपी समेत कई प्रदेशों के विभिन्न नस्लों के घोड़े बिक्री के लिए आते हैं। नखाशा बाजार में पंजाब, गुजरात, यूपी, राजस्थान, हरियाणा, कश्मीर, मध्य प्रदेश से घोड़ा खरीदार आते थे। बताया जाता है कि आज से लगभग 60 साल पहले तक यहां पर घोड़े 25 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक में बिकते हैं। वहीं समय गुजरने के साथ घोड़ों की कीमत 10 हजार से लाखों तक में पहुंच गई है।
बता दें कि चैती मेला परिसर में महादेव नहर किनारे जहां पर नखाशा बाजार लगता था, लगभग तीन साल पहले पंडा परिवार में भूमि का बंटवारा होने के बाद से नखाशा बाजार के लिए भूमि कम हो गई। बीते वर्ष भी इस समस्या के चलते बहुत कम घोड़ा व्यापारी पहुंचे थे। इस वर्ष अब तक घोड़ा व्यापारियों ने कोई संपर्क नहीं किया है जबकि 19 मार्च से मेला शुरू होने वाला है। ऐसे में नखाशा बाजार के अस्तित्व पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है।
मेला मजिस्ट्रेट अभय प्रताप सिंह ने बताया बीते कुछ वर्षों से नखाशा बाजार के लिए भूमि को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि नखाशा बाजार पूर्व की भांति लगे। इसके लिए वह मेला परिसर के आसपास भूमि की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेला शुरू होने से पहले कुछ समाधान निकाले जाने की उम्मीद है।
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उत्तर भारत का प्रसिद्ध ऐतिहासिक चैती में लगने वाला नखाशा बाजार लगभग 168 वर्ष पुराना है। इस बाजार में मेला शुरू होने और मां भगवती का डोला मंदिर आने तक उत्तराखंड के अलावा यूपी समेत कई प्रदेशों के विभिन्न नस्लों के घोड़े बिक्री के लिए आते हैं। नखाशा बाजार में पंजाब, गुजरात, यूपी, राजस्थान, हरियाणा, कश्मीर, मध्य प्रदेश से घोड़ा खरीदार आते थे। बताया जाता है कि आज से लगभग 60 साल पहले तक यहां पर घोड़े 25 रुपये से लेकर एक हजार रुपये तक में बिकते हैं। वहीं समय गुजरने के साथ घोड़ों की कीमत 10 हजार से लाखों तक में पहुंच गई है।
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बता दें कि चैती मेला परिसर में महादेव नहर किनारे जहां पर नखाशा बाजार लगता था, लगभग तीन साल पहले पंडा परिवार में भूमि का बंटवारा होने के बाद से नखाशा बाजार के लिए भूमि कम हो गई। बीते वर्ष भी इस समस्या के चलते बहुत कम घोड़ा व्यापारी पहुंचे थे। इस वर्ष अब तक घोड़ा व्यापारियों ने कोई संपर्क नहीं किया है जबकि 19 मार्च से मेला शुरू होने वाला है। ऐसे में नखाशा बाजार के अस्तित्व पर खतरा मंडराता नजर आ रहा है।
मेला मजिस्ट्रेट अभय प्रताप सिंह ने बताया बीते कुछ वर्षों से नखाशा बाजार के लिए भूमि को लेकर समस्या खड़ी हो गई है। उन्होंने कहा कि उनका प्रयास है कि नखाशा बाजार पूर्व की भांति लगे। इसके लिए वह मेला परिसर के आसपास भूमि की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि मेला शुरू होने से पहले कुछ समाधान निकाले जाने की उम्मीद है।