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Udham Singh Nagar News: नया बस अड्डा तो बना लेकिन नहीं खुल सकी संचालन की राह
संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर
Updated Mon, 22 Jun 2026 12:33 AM IST
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रुद्रपुर। तराई के सबसे बड़े रोडवेज डिपो परिसर में चल रहे टर्मिनल निर्माण की लेटलतीफी का असर निगम की व्यवस्थाओं पर पड़ रहा है। नए बस अड्डे का भवन बनने के बाद भी संचालन नहीं हो पा रहा है।
वर्ष 2021 से डिपो परिसर में करीब 80 करोड़ की लागत से बस टर्मिनल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके तहत करीब दो साल पहले कार्यशाला के पास नए बस अड्डे का भवन बन गया है लेकिन नए बस अड्डे का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
पुराना बस अड्डा परिसर की अधिकांश जमीन हाईवे चौड़ीकरण के दायरे में आ गई थी। बीते फरवरी में पुराने बस अड्डे का भवन ध्वस्त कर दिया गया। यात्रियों के लिए बना प्रतीक्षालय शेड भी तोड़ दिया गया था। तब से यात्रियों के विश्राम की कोई व्यवस्था डिपो प्रबंधन नहीं कर पाया है। यात्री खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करते हैं। यहां यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
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नए बस अड्डे के संचालन में निकासी द्वार न बनने के साथ अधूरा कार्य बाधा बना हुआ है। किच्छा बाईपास पर निकासी द्वार बनना है। फिलहाल यह जगह अतिक्रमण के दायरे में है। सवाल यही है कि निगम कब टर्मिनल के निर्माण में तेजी लाएगा और कब यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
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कार्यालय हो गए शिफ्ट
टर्मिनल निर्माण की कवायद के तहत डिपो परिसर में कार्यशाला का नया भवन बन गया है। भूतल पर कार्यशाला संचालित होती है। ऊपरी मंजिलों में इसी वर्ष से डिपो और बस अड्डे के कार्यालय संचालित होने लगे हैं। बस अड्डे के कार्यालय नए भवन में संचालित होने से जिम्मेदार अधिकारी पुराने बस अड्डे में दिखाई भी नहीं देते। यात्री अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं।
कोट
टर्मिनल का निर्माण कर रहे ठेकेदार से पुराने बस अड्डे परिसर में विश्राम शेड बनाने को कहा गया है। निकासी द्वार अतिक्रमण के कारण नहीं बन पा रहा है। इस मामले में प्रशासन से पत्राचार किया गया है। - मधुसूधन मिश्रा, एआरएम रोडवेज डिपो
वर्ष 2021 से डिपो परिसर में करीब 80 करोड़ की लागत से बस टर्मिनल का निर्माण कार्य चल रहा है। इसके तहत करीब दो साल पहले कार्यशाला के पास नए बस अड्डे का भवन बन गया है लेकिन नए बस अड्डे का संचालन अब तक शुरू नहीं हो पाया है।
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पुराना बस अड्डा परिसर की अधिकांश जमीन हाईवे चौड़ीकरण के दायरे में आ गई थी। बीते फरवरी में पुराने बस अड्डे का भवन ध्वस्त कर दिया गया। यात्रियों के लिए बना प्रतीक्षालय शेड भी तोड़ दिया गया था। तब से यात्रियों के विश्राम की कोई व्यवस्था डिपो प्रबंधन नहीं कर पाया है। यात्री खुले आसमान के नीचे बसों का इंतजार करते हैं। यहां यात्रियों के लिए पीने के पानी की व्यवस्था भी नहीं है।
नए बस अड्डे के संचालन में निकासी द्वार न बनने के साथ अधूरा कार्य बाधा बना हुआ है। किच्छा बाईपास पर निकासी द्वार बनना है। फिलहाल यह जगह अतिक्रमण के दायरे में है। सवाल यही है कि निगम कब टर्मिनल के निर्माण में तेजी लाएगा और कब यात्रियों को सुविधा मिलेगी।
कार्यालय हो गए शिफ्ट
टर्मिनल निर्माण की कवायद के तहत डिपो परिसर में कार्यशाला का नया भवन बन गया है। भूतल पर कार्यशाला संचालित होती है। ऊपरी मंजिलों में इसी वर्ष से डिपो और बस अड्डे के कार्यालय संचालित होने लगे हैं। बस अड्डे के कार्यालय नए भवन में संचालित होने से जिम्मेदार अधिकारी पुराने बस अड्डे में दिखाई भी नहीं देते। यात्री अव्यवस्था का सामना कर रहे हैं।
कोट
टर्मिनल का निर्माण कर रहे ठेकेदार से पुराने बस अड्डे परिसर में विश्राम शेड बनाने को कहा गया है। निकासी द्वार अतिक्रमण के कारण नहीं बन पा रहा है। इस मामले में प्रशासन से पत्राचार किया गया है। - मधुसूधन मिश्रा, एआरएम रोडवेज डिपो