सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttarakhand ›   Udham Singh Nagar News ›   Three FIRs filed against a doctor of a government hospital in the case of death of a pregnant woman.

Udham Singh Nagar News: प्रसूता की मौत के मामले में सरकारी अस्पताल की डॉक्टर समेत तीन प्राथमिकी

संवाद न्यूज एजेंसी, ऊधम सिंह नगर Updated Thu, 26 Mar 2026 12:55 AM IST
विज्ञापन
Three FIRs filed against a doctor of a government hospital in the case of death of a pregnant woman.
विज्ञापन
सितारगंज। डिलीवरी के 12 दिन बाद प्रसूता की मौत के मामले में पुलिस ने अदालत के आदेश पर प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें उप जिला अस्पताल में तैनात डॉ. नेहा सिद्दीकी के अलावा आस्था अस्पताल सितारगंज के प्रबंधक समेत तीन लोगों पर कार्रवाई की गई है।
Trending Videos

गांव पंडरी, सितारगंज निवासी बक्शीश सिंह ने बताया कि 21 जुलाई 2025 को उसकी पुत्री काजल कौर (24) को प्रसव पीड़ा हुई। उसे रात आठ बजे स्थानीय उप जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। अस्पताल में तैनात डॉ. नेहा सिद्दीकी ने दे रात करीब दो बजे परिजनों को पर्याप्त सुविधा न होने का हवाला देकर काजल को आस्था अस्पताल में भर्ती कराने के लिए कहा। वहां डॉ. नेहा सिद्दीकी और आस्था अस्पताल में तैनात डॉ. जफर ने 26 हजार रुपये में ऑपरेशन कर डिलीवरी करना तय किया। जांच और दवाइयों के नाम पर सात हजार रुपये अलग से लिए गए।
विज्ञापन
विज्ञापन

उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद प्रसूता ने बेटे को जन्म दिया लेकिन उसकी व उसके शिशु की हालत बिगड़ती चली गई। 22 जुलाई को जच्चा-बच्चा को होश नहीं आया तो दोनों को स्थानीय दूसरे निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया। उस अस्पताल में पर्याप्त सुविधा नहीं थी जिस कारण 24 जुलाई को प्रसूता को सुशीला तिवारी अस्पताल हल्द्वानी में भर्ती कराया गया।
वहां डॉक्टरों ने बताया कि प्रसूता के शरीर में इंफेक्शन फैल गया है और नसें भी ब्लॉक हो गई हैं। वहां से भी उसे रेफर कर दिया गया। 25 जुलाई को काजल को स्वामी हिमालयन अस्पताल देहरादून में भर्ती कराया गया जहां इलाज के दौरान तीन अगस्त को काजल कौर ने दम तोड़ दिया। सीओ बीएस धौनी ने बताया कि न्यायालय के आदेश पर संबंधित डॉक्टरों और निजी अस्पताल प्रबंधक के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है। मामले की विवेचना की जा रही है।

स्वास्थ्य विभाग की जांच में हुई थी आरोपों की पुष्टि

प्रसूता के पिता बक्शीश सिंह ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग की दो सदस्यीय टीम ने प्रकरण की जांच की थी। एसीएमओ डॉ. एसपी सिंह और महिला एवं प्रसूता विशेषज्ञ डॉ. कनक बनौथा ने तथ्यों, बयानों और अभिलेखों की जांच की। इसमें सामने आया कि डॉक्टर और आस्था अस्पताल प्रबंधन ने काजल के इलाज में लापरवाही बरती थी। मरीज की डिलीवरी में जटिलता थी जिसे हायर सेंटर रेफर करना चाहिए था लेकिन डॉ. नेहा ने ऐसा नहीं किया। यह भी पाया गया कि डॉ. नेहा सिद्दीकी जो सरकारी चिकित्सक हैं, राजकीय नियमों की अवहेलना कर उन्होंने निजी अस्पताल में जाकर मरीज का ऑपरेशन किया। जांच समिति ने रिपोर्ट में अस्पताल में पर्याप्त सुविधा और गायनेकोलॉजिस्ट एवं बाल रोग विशेषज्ञ न होने के बाद भी इलाज के लिए गंभीर मरीज को भर्ती किए जाने की पुष्टि की थी। ओटी की जांच में भी व्यवस्थाएं संतोषजनक नहीं पाई गई थीं।

कोट
प्रकरण सामने आने के बाद आस्था अस्पताल का नैदानिक स्थापना (क्लिनीकल एस्टेब्लिशमेंट) पंजीकरण प्रमाणपत्र को अस्थायी रूप से निरस्त किया गया था। साथ ही अस्पताल से 75 हजार का जुर्माना भी वसूला गया था। डॉक्टरों की नियुक्ति, निलंबन या बर्खास्त करने का अधिकार शासन को होता है। ऐसे में इस प्रकरण में भी डॉ. नेहा सिद्दीकी से संबंधित सभी फैसले शासन स्तर से ही लिए जाएंगे। एफआईआर के संबंध में उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया गया है। - डॉ. कुलदीप यादव सीएमएस, सितारगंज
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

एप में पढ़ें

Followed