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UP: अमेरिका और दुबई से ISI वाले फंसा रहे हैं भारत के युवाओं को, हर तीसरे दिन जूम मीटिंग; करा रहे यह काम

महबूब अली, शामली Published by: Mohd Mustakim Updated Thu, 26 Mar 2026 12:29 AM IST
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सार

Shamli News: शामली के बुटराड़ा गांव निवासी समीर और अन्य को जासूसी के आरोप में गिरफ्तार किया गया है। अब इन आरोपियों से जांच एजेंसियां पूछताछ कर रही हैं, तो नए खुलासे हो रहे हैं। गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए ग्रुपों में समीर को जोड़ा गया था।

Shamli: ISI network is operating from America, Dubai, Nepal and Bangladesh, youth of India are getting trapped
आईएसआई। सांकेतिक तस्वीर। - फोटो : AI
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विस्तार

गाजियाबाद पुलिस द्वारा जासूसी के आरोप में पकड़े गए शामली के बुटराड़ा गांव निवासी समीर और अन्य से पूछताछ में आईएसआई के एक बड़े अंतरराष्ट्रीय नेटवर्क का पर्दाफाश हुआ है। जांच एजेंसियों को मिले इनपुट के अनुसार, यह नेटवर्क नेपाल, दुबई, अमेरिका और बांग्लादेश जैसे देशों से संचालित हो रहा था, जहां बैठे एजेंट भारत के युवाओं को अपने जाल में फंसा रहे थे।
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पुलिस के अनुसार, समीर को गैंगस्टर लॉरेंस बिश्नोई और आईएसआई हैंडलर सरफराज, सरदार के नाम से बनाए गए व्हाट्सएप और टेलीग्राम ग्रुपों में जोड़ा गया था। इन ग्रुपों के जरिए देश-विदेश में रह रहे युवाओं को जोड़कर उन्हें अलग-अलग काम दिए जाते थे। दुबई में बैठे एजेंटों को शामली, मेरठ, मुजफ्फरनगर, गाजियाबाद, दिल्ली, सहारनपुर, बिजनौर, हरियाणा और बिहार के अधिक से अधिक युवाओं को जोड़ने की जिम्मेदारी सौंपी गई थी।
 
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जांच में यह भी सामने आया है कि इन ग्रुपों को गैंगस्टरों के नाम पर इसलिए बनाया गया, ताकि पुलिस को इन पर शक न हो और गतिविधियां आसानी से संचालित होती रहें। ग्रुप में जुड़े युवाओं को धार्मिक स्थलों और सेना से जुड़े स्थानों की फोटो और वीडियो जुटाने के निर्देश दिए जाते थे। इसके बाद हर तीसरे दिन जूम मीटिंग के जरिए इनकी समीक्षा की जाती थी, जिसमें विदेशों में बैठे सरगना शामिल होते थे। दुबई, नेपाल के 20 से अधिक एजेंट और सरगना जांच एजेंसियों के रडार पर आ गए हैं। एसपी नरेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि इन ग्रुपों से जुड़े 250 से अधिक लोग पुलिस के रडार पर हैं। मामले की जांच गाजियाबाद पुलिस के साथ मिलकर आगे बढ़ाई जा रही है और कई महत्वपूर्ण साक्ष्य हाथ लगे हैं।
 

धार्मिक सामग्री से किया जाता था ब्रेनवाश
जांच एजेंसियों के अनुसार, ग्रुपों में तबलीगी जमात और अन्य धार्मिक गतिविधियों से संबंधित वीडियो शेयर की जाती थीं ताकि युवाओं को प्रभावित कर उनका ब्रेनवाश किया जा सके। इसके अलावा उर्दू में लिखे दस्तावेज भी भेजे जाते थे।
 

नाम बदलकर बचने की कोशिश
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि आईएसआई हैंडलर अब अपनी पहचान छिपाने के लिए हिंदू नामों का इस्तेमाल कर रहे हैं। एक व्हाट्सएप ग्रुप 'सरदार' नाम से भी संचालित किया जा रहा था। बताया गया कि सरफराज ने खुद का नाम बदलकर 'सरदार' रख लिया था और कुछ सदस्य ऑनलाइन मीटिंग के दौरान माथे पर टीका लगाकर भी लोगों को भ्रमित करने का प्रयास करते थे।
 

तीन किश्तों में मिले रुपये
एसपी के अनुसार, जांच में यह भी सामने आया है कि समीर को गिरोह की ओर से तीन बार में कुल पांच हजार रुपये दिए गए थे। पहली और दूसरी बार 1500-1500 रुपये, जबकि तीसरी बार 2000 रुपये दिए गए। फिलहाल पुलिस यह पता लगाने में जुटी है कि यह रकम कहां से भेजी गई। बताया जा रहा है कि गिरफ्तार मीरा ने भी समीर को रकम दी है। पुलिस और जांच एजेंसियां इस पूरे नेटवर्क की गहराई से जांच कर रही हैं। अधिकारियों का मानना है कि आने वाले दिनों में इस मामले में और भी बड़े खुलासे हो सकते हैं।

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