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Uttarkashi News: उचित दाम न मिलने से खेतों में सड़ रही टमाटर की 50 फीसदी फसल
Mon, 03 Aug 2026 07:03 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 03 Aug 2026 07:03 PM IST
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परिवहन के भारी भरकम खर्चे से परेशान काश्तकारों ने फसल की तुड़ान किया बंद
नौगांव (उत्तरकाशी)। मंडी में उचित दाम नहीं मिलने से रवांई घाटी में काश्तकारों की टमाटर की 50 प्रतिशत से भी अधिक फसल खेतों में ही पक कर खराब हो रही है। सही दाम नहीं मिलने और परिवहन के भारी भरकम खर्चे से परेशान काश्तकारों ने फसल की तुड़ान बंद कर फसल को खेतों में ही लावारिस हालत में छोड़ दिया है। काश्तकारों ने सरकार ने टमाटर की फसल का उचित समर्थन मूल्य और बाजार की व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
काश्तकारों के सामने पहली बार इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है जब मेहनत से तैयार फसल की तुड़ान बंद कर फसल को खेतों में ही लावारिस हालत में छोड़ना पड़ा हो। रवांई घाटी में करीब पचीस हजार मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है जो क्षेत्र के काश्तकारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
टमाटर की फसल पर बीज, खाद, दवाई, मजदूरी, सिंचाई और ढुलान पर भारी भरकम खर्चा होता है। मंडी में उचित दाम न मिलने से काश्तकार फसल को मंडी तक पहुंचाने का खर्चा भी नहीं निकाल पा रहे है। मजबूरन काश्तकार खेतों में तैयार टमाटर की फसल की तुड़ाई नहीं कर रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में फसल खराब हो रही है। ऐसे में क्षेत्र के काश्तकार भारी आर्थिक संकट की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
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काश्तकार अजब सिंह, अमित रावत, हरिमोहन सिंह आदि का कहना है कि कई काश्तकार तीस प्रतिशत फसल भी मंडी नहीं भेज पाए हैं। उससे पहले ही मंडी में टमाटर का भाव गिर गया था। सरकार टमाटर का समर्थन मूल्य घोषित करती है तो आर्थिक नुकसान कम किया जा सकता है। वहीं, काश्तकारों की सुविधा के लिए एक वर्ष पहले नौगांव में कृषि मंडी समिति बन कर तैयार हो गई थी जिसका आज तक संचालन नहीं हो पाया है।
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नौगांव (उत्तरकाशी)। मंडी में उचित दाम नहीं मिलने से रवांई घाटी में काश्तकारों की टमाटर की 50 प्रतिशत से भी अधिक फसल खेतों में ही पक कर खराब हो रही है। सही दाम नहीं मिलने और परिवहन के भारी भरकम खर्चे से परेशान काश्तकारों ने फसल की तुड़ान बंद कर फसल को खेतों में ही लावारिस हालत में छोड़ दिया है। काश्तकारों ने सरकार ने टमाटर की फसल का उचित समर्थन मूल्य और बाजार की व्यवस्था करने की मांग उठाई है।
काश्तकारों के सामने पहली बार इस तरह की स्थिति उत्पन्न हुई है जब मेहनत से तैयार फसल की तुड़ान बंद कर फसल को खेतों में ही लावारिस हालत में छोड़ना पड़ा हो। रवांई घाटी में करीब पचीस हजार मीट्रिक टन टमाटर का उत्पादन होता है जो क्षेत्र के काश्तकारों की आजीविका का प्रमुख साधन है।
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टमाटर की फसल पर बीज, खाद, दवाई, मजदूरी, सिंचाई और ढुलान पर भारी भरकम खर्चा होता है। मंडी में उचित दाम न मिलने से काश्तकार फसल को मंडी तक पहुंचाने का खर्चा भी नहीं निकाल पा रहे है। मजबूरन काश्तकार खेतों में तैयार टमाटर की फसल की तुड़ाई नहीं कर रहे हैं, जिससे बड़ी मात्रा में फसल खराब हो रही है। ऐसे में क्षेत्र के काश्तकार भारी आर्थिक संकट की स्थिति में दिखाई दे रहे हैं।
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काश्तकार अजब सिंह, अमित रावत, हरिमोहन सिंह आदि का कहना है कि कई काश्तकार तीस प्रतिशत फसल भी मंडी नहीं भेज पाए हैं। उससे पहले ही मंडी में टमाटर का भाव गिर गया था। सरकार टमाटर का समर्थन मूल्य घोषित करती है तो आर्थिक नुकसान कम किया जा सकता है। वहीं, काश्तकारों की सुविधा के लिए एक वर्ष पहले नौगांव में कृषि मंडी समिति बन कर तैयार हो गई थी जिसका आज तक संचालन नहीं हो पाया है।