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Uttarkashi News: कुपड़ा खड्ड पर बैली ब्रिज नहीं हो सका तैयार, मानसून में बढ़ी चिंता
Fri, 03 Jul 2026 04:58 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Fri, 03 Jul 2026 04:58 PM IST
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एक वर्ष बीतने के बाद भी 60 मीटर स्पान का बैली ब्रिज का निर्माण लटका
मजबूरी में ग्रामीणों को खड्ड पार कर करनी पड़ती है आवाजाही
बड़कोट। आपदा के एक वर्ष बीतने के बाद भी कुपड़ा खड्ड पर बन रहा 60 मीटर स्पान का बैली ब्रिज अभी तक भी तैयार नहीं हो सका है। निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण क्षेत्र के तीन गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
पूर्व प्रधान शैलेन्द्र राणा ने बताया कि बैली ब्रिज का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों को खड्ड पार कर आवाजाही करनी पड़ रही है जबकि कई लोग आपदा में क्षतिग्रस्त मोटर पुल से जोखिम उठाकर आवागमन कर रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर स्कूली छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है जिन्हें प्रतिदिन स्कूल आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों ने बताया कि आपदा के बाद करीब 10 लाख रुपये की लागत से ट्रॉली भी लगाई गई थी लेकिन वह 10 दिन तक भी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं कर सकी। स्थानीय निवासी महावीर पंवार, लोकेश चौहान, चैन सिंह राणा, सुनील आदि ने बताया कि कुपड़ा खड्ड पर बन रहे बैली ब्रिज के निर्माण में अब तक केवल एक पिलर ही तैयार हो पाया है।
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दूसरा पिलर आज तक पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मानसून के मद्देनजर निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। लोनिवि बड़कोट के एई ध्वजवीर तोमर ने बताया कि बजट जट देर में आवंटित होने के साथ ही कुछ अतिरिक्त कार्य बढ़ने के कारण कार्य में देर हो रही है। मौसम अनुकूल रहा तो जुलाई में बैली बृज पर आवागमन शुरू हो जाएगा।
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मजबूरी में ग्रामीणों को खड्ड पार कर करनी पड़ती है आवाजाही
बड़कोट। आपदा के एक वर्ष बीतने के बाद भी कुपड़ा खड्ड पर बन रहा 60 मीटर स्पान का बैली ब्रिज अभी तक भी तैयार नहीं हो सका है। निर्माण कार्य की धीमी गति के कारण क्षेत्र के तीन गांवों के ग्रामीणों को आवागमन में भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मानसून शुरू होने के साथ ही ग्रामीणों की चिंता और बढ़ गई है।
पूर्व प्रधान शैलेन्द्र राणा ने बताया कि बैली ब्रिज का निर्माण कछुआ गति से चल रहा है। मजबूरी में ग्रामीणों को खड्ड पार कर आवाजाही करनी पड़ रही है जबकि कई लोग आपदा में क्षतिग्रस्त मोटर पुल से जोखिम उठाकर आवागमन कर रहे हैं। इसका सबसे अधिक असर स्कूली छात्र-छात्राओं पर पड़ रहा है जिन्हें प्रतिदिन स्कूल आने-जाने में दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
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ग्रामीणों ने बताया कि आपदा के बाद करीब 10 लाख रुपये की लागत से ट्रॉली भी लगाई गई थी लेकिन वह 10 दिन तक भी सुरक्षित आवाजाही सुनिश्चित नहीं कर सकी। स्थानीय निवासी महावीर पंवार, लोकेश चौहान, चैन सिंह राणा, सुनील आदि ने बताया कि कुपड़ा खड्ड पर बन रहे बैली ब्रिज के निर्माण में अब तक केवल एक पिलर ही तैयार हो पाया है।
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दूसरा पिलर आज तक पूरा नहीं हो सका है। उन्होंने आरोप लगाया कि निर्माण कार्य बेहद धीमी गति से चल रहा है जिससे ग्रामीणों में भारी आक्रोश है। ग्रामीणों ने प्रशासन और संबंधित विभाग से मानसून के मद्देनजर निर्माण कार्य में तेजी लाने की मांग की है। लोनिवि बड़कोट के एई ध्वजवीर तोमर ने बताया कि बजट जट देर में आवंटित होने के साथ ही कुछ अतिरिक्त कार्य बढ़ने के कारण कार्य में देर हो रही है। मौसम अनुकूल रहा तो जुलाई में बैली बृज पर आवागमन शुरू हो जाएगा।