{"_id":"6a6749283c0e5903dd0e1aa9","slug":"bairing-nag-returns-after-the-shahi-snan-at-bharad-sar-uttarkashi-news-c-54-1-uki1002-121319-2026-07-27","type":"story","status":"publish","title_hn":"Uttarkashi News: भराड़ सर से शाही स्नान कर लौटे बैरिंग नाग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Uttarkashi News: भराड़ सर से शाही स्नान कर लौटे बैरिंग नाग
Mon, 27 Jul 2026 05:33 PM IST
अमर उजाला ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Mon, 27 Jul 2026 05:33 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पुरोला। मोरी ब्लॉक की फते पर्वत पट्टी स्थित भीतरी गांव के आराध्य देव बैरिंग नाग छह दिवसीय धार्मिक यात्रा और भराड़ सर में पारंपरिक शाही स्नान के बाद अपने धाम लौट आए। देवता के गांव पहुंचते ही ग्रामीणों में उत्साह का माहौल देखने को मिला। ग्रामीणों ने पारंपरिक वाद्ययंत्रों, जयघोष और विधि-विधान के साथ बैरिंग नाग का भव्य स्वागत किया।
क्षेत्र के जगदीश कुंवर ने बताया कि बैरिंग नाग देवता प्रत्येक पांचवें वर्ष प्राचीन परंपरा के अनुसार भराड़ सर की यात्रा कर वहां शाही स्नान करते हैं। यह धार्मिक यात्रा क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोक मान्यताओं के अनुसार बैरिंग नाग देवता की उत्पत्ति भराड़ सर में हुई थी। मान्यता है कि प्राचीन काल में देवता सबसे पहले खन्यासणी गांव के बकरी पालकों को भराड़ सर में प्राप्त हुए। बाद में राशन के बदले उन्हें भीतरी गांव के लोगों को समर्पित कर दिया गया। इस मौके पर चंडी प्रसाद नौटियाल, गुरुदेव सिंह, शरण सिंह, सिलदार सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन
क्षेत्र के जगदीश कुंवर ने बताया कि बैरिंग नाग देवता प्रत्येक पांचवें वर्ष प्राचीन परंपरा के अनुसार भराड़ सर की यात्रा कर वहां शाही स्नान करते हैं। यह धार्मिक यात्रा क्षेत्र की आस्था, संस्कृति और लोक परंपराओं का महत्वपूर्ण हिस्सा है। लोक मान्यताओं के अनुसार बैरिंग नाग देवता की उत्पत्ति भराड़ सर में हुई थी। मान्यता है कि प्राचीन काल में देवता सबसे पहले खन्यासणी गांव के बकरी पालकों को भराड़ सर में प्राप्त हुए। बाद में राशन के बदले उन्हें भीतरी गांव के लोगों को समर्पित कर दिया गया। इस मौके पर चंडी प्रसाद नौटियाल, गुरुदेव सिंह, शरण सिंह, सिलदार सिंह आदि मौजूद रहे। संवाद
विज्ञापन