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उत्तरकाशी: केदारताल ट्रैक पर हिमस्खलन बने रेस्क्यू अभियान में बाधा, ट्रैकर्स और गाइड की तलाश चुनौतीपूर्ण

Mon, 02 Nov 2026 01:18 PM IST
Renu Saklani विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी
विपिन नेगी, संवाद न्यूज एजेंसी. उत्तरकाशी Published by: Renu Saklani Updated Mon, 02 Nov 2026 01:18 PM IST
सार

केदारताल ट्रैक पर लापता आठ लोगों की तलाश में बचाव दल के सामने कुदरत की चुनौतियां लगातार बढ़ रही हैं। भारी हिमस्खलन और दुर्गम रास्तों के कारण टीमें भोजखड़क से आगे नहीं बढ़ पा रही हैं। अब प्रशिक्षित रेस्क्यू टीम से तलाश को आगे बढ़ाने की उम्मीद है।

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Kedartal trek rescue operation hampered by avalanches, search for seven trekkers and guide continues
केदारताल ट्रैक - फोटो : संवाद न्यूज एजेंसी

विस्तार

केदारताल ट्रैक पर फंसे सात ट्रैकर्स व एक गाइड को ढूंढने के लिए अब पूरी उम्मीद सोमवार को उस क्षेत्र में ड्राप होने वाली नेहरू पर्वतारोहण संस्थान और एसडीआरएफ की उच्च हिमालयी क्षेत्रों में रेस्क्यू के लिए प्रशिक्षित टीम पर टिकी है। केदारताल ट्रैक पर भोजखड़क से पहले ही अधिक हिमस्खलन होने के कारण भूमिगत रेस्क्यू में टीमों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

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बीते शनिवार को एसडीआरएफ और रविवार को एनडीआरएफ की टीम ने भोजखड़क तक केदारताल ट्रैक पर खोज-बचाव अभियान चलाया लेकिन इस दौरान टीमों को ट्रैक पर पहले से हुए और संभावित हिमस्खलन की चुनौतियों को भी पार करना पड़ रहा है। ट्रैक पर गई टीम को भोजखड़क से पूर्व ही तीन बड़े-बड़े हिमस्खलन पार करने पड़े।
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भूस्खलन व हिमस्खलन के कारण जगह-जगह पर ट्रैक टूटा हुआ
पर्वतारोहण से जुड़े लोगों के अनुसार भोजखड़क से पहल ही ट्री साइड लाइन समाप्त हो रही है। उसके बाद खड़ी चट्टानों पर जगह-जगह पर हुए भारी हिमस्खलन के कारण भोजखड़क से आगे बढ़ना बहुत मुश्किल हो रहा है। इसलिए टीमों की ओर से भोजखड़क तक ही खोज-बचाव अभियान चलाया गया।
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स्थानीय ट्रैकर्स का कहना है कि भोजखड़क व कच्ची ढांग के बीच में बिना बर्फ के ही मार्ग पार करना कठिन होता है। क्योंकि वहां पर भूस्खलन व हिमस्खलन के कारण जगह-जगह पर ट्रैक टूटा हुआ है। वहीं, इन दिनों जिस प्रकार से हिमस्खलन अधिक बताया जा रहा है तो ऐसी स्थिति में खोज-बचाव अभियान चला रही टीम के लिए भी बड़ा खतरा है। क्योंकि कच्ची ढांग के समीप बड़े-बड़े हिमस्खलन के साथ ही केदारगंगा को पार करना भी बड़ी चुनौती है। 

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