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Uttarkashi News: नई टिहरी एपीएचसी में नहीं बढ़ पा रहे मरीज
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Tue, 28 Apr 2026 07:06 PM IST
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स्टाफ और सुविधाएं पूरी फिर भी 15–20 मरीज ही पहुंच रहे
नई टिहरी। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नई टिहरी से स्वास्थ्य सेवाएं लेने में नगर क्षेत्र के लोग अब रुचि नहीं ले रहे हैं। पर्याप्त स्टाफ और बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद यहां गिनती के ही मरीज सर्दी, जुकाम और बुखार के पहुंच रहे हैं। एपीएचसी में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीज ही ओपीडी में आते हैं जबकि कभी यह केंद्र नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य इकाई हुआ करता था।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पिछले वर्षों में लंबे समय तक डॉक्टर का पद रिक्त रहने से एपीएचसी से उनका भरोसा उठ गया। अब स्टाफ की तैनाती होने के बावजूद लोग सीधे जिला अस्पताल बौराड़ी का रुख कर रहे हैं। नई टिहरी शहर के निर्माण के दौरान 90 के दशक में इस केंद्र की स्थापना की गई थी।
वर्ष 2005 में जिला अस्पताल शुरू होने के बाद एपीएचसी का महत्व धीरे-धीरे कम होता चला गया। दूरी कम होने के कारण अधिकांश मरीज अब जिला अस्पताल बौराड़ी जाना ही बेहतर समझते हैं। वर्तमान में केंद्र में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ सहित अधिकांश पदों पर तैनाती है और आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी संचालित हो रहा है। इसके बावजूद ओपीडी में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है। आपात स्थिति और सामान्य उपचार के लिए ही आसपास के कुछ लोग यहां पहुंचते हैं।
जिला अस्पताल बौराड़ी नजदीक होने के कारण एपीएचसी केंद्र नई टिहरी में सीमित संख्या में मरीज आ रहे हैं। शिशुओं का टीकाकरण नियमित रूप से किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एपीएचसी से डॉक्टर और फार्मासिस्ट को जिला कारागार में बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भी भेजा जाता है।
- डॉ. चंदन मिश्रा, प्रभारी सीएमओ टिहरी
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नई टिहरी। अतिरिक्त प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नई टिहरी से स्वास्थ्य सेवाएं लेने में नगर क्षेत्र के लोग अब रुचि नहीं ले रहे हैं। पर्याप्त स्टाफ और बुनियादी सुविधाएं होने के बावजूद यहां गिनती के ही मरीज सर्दी, जुकाम और बुखार के पहुंच रहे हैं। एपीएचसी में प्रतिदिन औसतन 15 से 20 मरीज ही ओपीडी में आते हैं जबकि कभी यह केंद्र नगर और आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों के लिए प्रमुख स्वास्थ्य इकाई हुआ करता था।
स्थानीय लोगों का मानना है कि पिछले वर्षों में लंबे समय तक डॉक्टर का पद रिक्त रहने से एपीएचसी से उनका भरोसा उठ गया। अब स्टाफ की तैनाती होने के बावजूद लोग सीधे जिला अस्पताल बौराड़ी का रुख कर रहे हैं। नई टिहरी शहर के निर्माण के दौरान 90 के दशक में इस केंद्र की स्थापना की गई थी।
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वर्ष 2005 में जिला अस्पताल शुरू होने के बाद एपीएचसी का महत्व धीरे-धीरे कम होता चला गया। दूरी कम होने के कारण अधिकांश मरीज अब जिला अस्पताल बौराड़ी जाना ही बेहतर समझते हैं। वर्तमान में केंद्र में डॉक्टर, फार्मासिस्ट, नर्सिंग स्टाफ सहित अधिकांश पदों पर तैनाती है और आयुष्मान आरोग्य मंदिर भी संचालित हो रहा है। इसके बावजूद ओपीडी में अपेक्षित वृद्धि नहीं हो पा रही है। आपात स्थिति और सामान्य उपचार के लिए ही आसपास के कुछ लोग यहां पहुंचते हैं।
जिला अस्पताल बौराड़ी नजदीक होने के कारण एपीएचसी केंद्र नई टिहरी में सीमित संख्या में मरीज आ रहे हैं। शिशुओं का टीकाकरण नियमित रूप से किया जाता है। आवश्यकता पड़ने पर एपीएचसी से डॉक्टर और फार्मासिस्ट को जिला कारागार में बंदियों के स्वास्थ्य परीक्षण के लिए भी भेजा जाता है।
- डॉ. चंदन मिश्रा, प्रभारी सीएमओ टिहरी

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