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Uttarkashi News: वन भूमि अधिनियम के फेर में फंसी कफनौल की पेयजल योजना
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 29 Jan 2026 05:59 PM IST
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400 परिवारों के हलक सूखे, दो साल से बंद पड़ा है योजना का काम
नौगांव (उत्तरकाशी)। जल जीवन मिशन के तहत पांच करोड़ की लागत से बन रही कफनौल गांव की पेयजल योजना वन भूमि अधिनियम के पेच की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वन स्वीकृति नहीं मिलने से पेयजल योजना का कार्य दो वर्षों से बंद पड़ा है।
गांव के लोग पुरानी पेयजल व्यवस्था से काम चला रहे हैं। पुरानी पेयजल लाइन पर पानी की मात्रा कम होने से गांव में अधिकांशतः पेयजल किल्लत बनी रहती है। जल जीवन मिशन के तहत कफनौल गांव के 400 परिवारों की पेयजल आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन के तहत पांच करोड़ की लागत से रूपनौल स्रोत से सात किमी लंबी पाइप लाइन बिछाई जानी थी जो बन स्वीकृति नहीं मिलने से बंद पड़ी हुई है।
पेयजल योजना की स्वीकृति से ग्रामीणों को उम्मीदें जगी थी कि अब उन्हें पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन दो वर्ष बाद भी ग्रामीणों को नई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम की ओर से प्रथम फेज के कार्य में पेयजल कनेक्शन भी बांटे गए हैं जिन पर पुरानी योजना का पानी चल रहा है।
पेयजल निर्माण निगम उत्तरकाशी के ईई मधुकांत कोटियाल का कहना है कि वन स्वीकृति न मिलने से योजना का कार्य रुका है। प्रथम फेज का कार्य पूरा हो चुका है। नोडल से कुछ आपत्ति लगी थी जिसका जवाब बना कर भेज दिया है। वन स्वीकृति मिलने पर ही योजना का कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं, डीएफओ अपर यमुना वन प्रभाग रविन्द्र पुंडीर ने बताया कि योजना पर लगी आपत्ति को निस्तारण के लिए नवंबर में नोडल से केंद्र सरकार को भेजा गया है। जल्द ही आपत्ति का निस्तारण होने की उम्मीद है।
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नौगांव (उत्तरकाशी)। जल जीवन मिशन के तहत पांच करोड़ की लागत से बन रही कफनौल गांव की पेयजल योजना वन भूमि अधिनियम के पेच की वजह से आगे नहीं बढ़ पा रहा है। वन स्वीकृति नहीं मिलने से पेयजल योजना का कार्य दो वर्षों से बंद पड़ा है।
गांव के लोग पुरानी पेयजल व्यवस्था से काम चला रहे हैं। पुरानी पेयजल लाइन पर पानी की मात्रा कम होने से गांव में अधिकांशतः पेयजल किल्लत बनी रहती है। जल जीवन मिशन के तहत कफनौल गांव के 400 परिवारों की पेयजल आपूर्ति के लिए जल जीवन मिशन के तहत पांच करोड़ की लागत से रूपनौल स्रोत से सात किमी लंबी पाइप लाइन बिछाई जानी थी जो बन स्वीकृति नहीं मिलने से बंद पड़ी हुई है।
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पेयजल योजना की स्वीकृति से ग्रामीणों को उम्मीदें जगी थी कि अब उन्हें पेयजल संकट का सामना नहीं करना पड़ेगा लेकिन दो वर्ष बाद भी ग्रामीणों को नई योजना का लाभ नहीं मिल पा रहा है। कार्यदायी संस्था पेयजल निर्माण निगम की ओर से प्रथम फेज के कार्य में पेयजल कनेक्शन भी बांटे गए हैं जिन पर पुरानी योजना का पानी चल रहा है।
पेयजल निर्माण निगम उत्तरकाशी के ईई मधुकांत कोटियाल का कहना है कि वन स्वीकृति न मिलने से योजना का कार्य रुका है। प्रथम फेज का कार्य पूरा हो चुका है। नोडल से कुछ आपत्ति लगी थी जिसका जवाब बना कर भेज दिया है। वन स्वीकृति मिलने पर ही योजना का कार्य शुरू किया जाएगा। वहीं, डीएफओ अपर यमुना वन प्रभाग रविन्द्र पुंडीर ने बताया कि योजना पर लगी आपत्ति को निस्तारण के लिए नवंबर में नोडल से केंद्र सरकार को भेजा गया है। जल्द ही आपत्ति का निस्तारण होने की उम्मीद है।

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