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Uttarkashi News: सोमेश्वर महाराज की डोली के साथ झूम उठा पर्वत क्षेत्र
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Thu, 29 Jan 2026 05:26 PM IST
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22 गांवों और 22 दिनों तक चलने वाला देवगोती मेला जखोल से शुरू
पुरोला। मोरी ब्लॉक के पर्वत क्षेत्र में इन दिनों ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के देवगोती मेले की धूम है। 22 गांवों में होने वाला यह पारंपरिक देवगोती मेला पंचगाई अडोर और बड़ासू पट्टी के गांव-गांव में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मेले में 22 गांवों के बाजगी ढोल-दमाऊं, रणसिंघा, धौंस जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पूरी रात देव स्तुति, रासो, तांदी नृत्य एवं सामूहिक नृत्य पर श्रद्धालु जमकर झूम रहे।
देवगोती मेले की शुरुआत 15 गते माघ को सोमेश्वर महाराज की देव डोली को जखोल स्थित मूल थाती मंदिर से बाहर लाने के साथ हुई। इसके बाद मेला जखोल गांव से आरंभ होकर तीनों पट्टियों के 22 गांवों में 22 दिनों तक क्रमशः मनाया जाता है। पर्वत क्षेत्र में यह देवगोती मेला वसंत ऋतु के आगमन और हरियाली उत्सव के प्रतीक के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
मेले की तिथियां जखोल के राज पुरोहितों की ओर से सोमेश्वर महाराज की आज्ञा से निर्धारित की जाती हैं। 22 दिवसीय मेले के दौरान देव डोलियां क्षेत्रवासियों की कुशलता एवं समृद्धि की कामना को लेकर गांव-गांव भ्रमण करती है। मेले के समय डोलियां रात्रि में जखोल गांव में खस्सों के घरों में विश्राम करती हैं और दिन में संबंधित गांवों में विराजमान होती हैं। इस अवसर पर रामध्यान, जैन सिंह, कृपाल सिंह, जनक सिंह, अवतार सिंह, चैन सिंह, जनक सिंह, गंगा सिंह, विजेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के स्याणे, बजीर, देवता पुजारी व बाजगी मौजूद रहे।
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पुरोला। मोरी ब्लॉक के पर्वत क्षेत्र में इन दिनों ईष्ट देव सोमेश्वर महाराज के देवगोती मेले की धूम है। 22 गांवों में होने वाला यह पारंपरिक देवगोती मेला पंचगाई अडोर और बड़ासू पट्टी के गांव-गांव में श्रद्धा और उल्लास के साथ मनाया जा रहा है। मेले में 22 गांवों के बाजगी ढोल-दमाऊं, रणसिंघा, धौंस जैसे पारंपरिक वाद्य यंत्रों के साथ पूरी रात देव स्तुति, रासो, तांदी नृत्य एवं सामूहिक नृत्य पर श्रद्धालु जमकर झूम रहे।
देवगोती मेले की शुरुआत 15 गते माघ को सोमेश्वर महाराज की देव डोली को जखोल स्थित मूल थाती मंदिर से बाहर लाने के साथ हुई। इसके बाद मेला जखोल गांव से आरंभ होकर तीनों पट्टियों के 22 गांवों में 22 दिनों तक क्रमशः मनाया जाता है। पर्वत क्षेत्र में यह देवगोती मेला वसंत ऋतु के आगमन और हरियाली उत्सव के प्रतीक के रूप में प्रतिवर्ष आयोजित किया जाता है।
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मेले की तिथियां जखोल के राज पुरोहितों की ओर से सोमेश्वर महाराज की आज्ञा से निर्धारित की जाती हैं। 22 दिवसीय मेले के दौरान देव डोलियां क्षेत्रवासियों की कुशलता एवं समृद्धि की कामना को लेकर गांव-गांव भ्रमण करती है। मेले के समय डोलियां रात्रि में जखोल गांव में खस्सों के घरों में विश्राम करती हैं और दिन में संबंधित गांवों में विराजमान होती हैं। इस अवसर पर रामध्यान, जैन सिंह, कृपाल सिंह, जनक सिंह, अवतार सिंह, चैन सिंह, जनक सिंह, गंगा सिंह, विजेंद्र सिंह सहित बड़ी संख्या में क्षेत्र के स्याणे, बजीर, देवता पुजारी व बाजगी मौजूद रहे।

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