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Uttarkashi News: ट्रैकिंग कंपनियों को अब ग्राम पंचायत को देना होगा पर्यावरण संरक्षण शुल्क
संवाद न्यूज एजेंसी, उत्तर काशी
Updated Sun, 07 Jun 2026 04:53 PM IST
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ग्राम पंचायत गंगाड़ ने ट्रैकिंग कंपनियों के लिए बनाए नए नियम
पुरोला। विकासखंड मोरी की ग्राम पंचायत गंगाड़ ने क्षेत्र में बढ़ रही ट्रैकिंग गतिविधियों को देखते हुए ट्रैकिंग कंपनियों के लिए नए नियम लागू किए हैं। पंचायत का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ग्राम सभा की खुली बैठक में लिया गया। अब क्षेत्र में ट्रैकिंग कराने वाली कंपनियों को पंचायत के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
अब प्रत्येक कंपनी को पंचायत में 2,000 रुपये स्थानीय विकास और पर्यावरण संरक्षण शुल्क जमा करना होगा। ट्रैकिंग के दौरान निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे को वापस लाना भी अनिवार्य रहेगा। ट्रैक मार्गों, बुग्यालों और प्राकृतिक स्थलों पर किसी भी तरह का कचरा फेंकने या छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
ग्राम पंचायत ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया है। पंचायत के अनुसार सभी ट्रैकर्स और ट्रैकिंग कंपनियों को स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का सम्मान करना होगा। बिना पंचायत की अनुमति के कैंप स्थापित करने अथवा फिल्मांकन करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
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इसके अतिरिक्त जल स्रोतों, बुग्यालों, धारों व चारागाह क्षेत्रों को प्रदूषित करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। पंचायत ने सभी ट्रैकिंग कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित नियमों का पालन करते हुए 14 जून 2026 तक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण शुल्क पंचायत के पास जमा कराएं। प्रस्ताव पर ग्राम प्रधान सैंन सिंह उमराव सिंह, कृतम सिंह, इंद्रा सिंह, जगमोहन सिंह, चंडीदास चंद्रू, सैंजी लाल, जुनिया, सूरत सिंह, रणवीर सिंह, बरदान सिंह, पंकज सिंह, प्रवेश, सुरतिया, जबर सिंह, राजपाल सिंह, इंद्राराम, शीशपाल सिंह, लायबर सिंह, कृष्णा सिंह व ठाकुर सिंह के हस्ताक्षर हैं।
पुरोला। विकासखंड मोरी की ग्राम पंचायत गंगाड़ ने क्षेत्र में बढ़ रही ट्रैकिंग गतिविधियों को देखते हुए ट्रैकिंग कंपनियों के लिए नए नियम लागू किए हैं। पंचायत का कहना है कि पर्यावरण संरक्षण और स्थानीय लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए यह फैसला ग्राम सभा की खुली बैठक में लिया गया। अब क्षेत्र में ट्रैकिंग कराने वाली कंपनियों को पंचायत के नियमों का पालन करना अनिवार्य होगा।
अब प्रत्येक कंपनी को पंचायत में 2,000 रुपये स्थानीय विकास और पर्यावरण संरक्षण शुल्क जमा करना होगा। ट्रैकिंग के दौरान निकलने वाले प्लास्टिक और अन्य कचरे को वापस लाना भी अनिवार्य रहेगा। ट्रैक मार्गों, बुग्यालों और प्राकृतिक स्थलों पर किसी भी तरह का कचरा फेंकने या छोड़ने की अनुमति नहीं होगी।
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ग्राम पंचायत ने धार्मिक एवं सांस्कृतिक स्थलों की गरिमा बनाए रखने पर भी जोर दिया है। पंचायत के अनुसार सभी ट्रैकर्स और ट्रैकिंग कंपनियों को स्थानीय परंपराओं एवं रीति-रिवाजों का सम्मान करना होगा। बिना पंचायत की अनुमति के कैंप स्थापित करने अथवा फिल्मांकन करने पर संबंधित कंपनी के खिलाफ 50 हजार रुपये तक का जुर्माना लगाया जा सकेगा।
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इसके अतिरिक्त जल स्रोतों, बुग्यालों, धारों व चारागाह क्षेत्रों को प्रदूषित करना पूर्णतः प्रतिबंधित रहेगा। पंचायत ने सभी ट्रैकिंग कंपनियों को निर्देश दिए हैं कि वे निर्धारित नियमों का पालन करते हुए 14 जून 2026 तक विकास एवं पर्यावरण संरक्षण शुल्क पंचायत के पास जमा कराएं। प्रस्ताव पर ग्राम प्रधान सैंन सिंह उमराव सिंह, कृतम सिंह, इंद्रा सिंह, जगमोहन सिंह, चंडीदास चंद्रू, सैंजी लाल, जुनिया, सूरत सिंह, रणवीर सिंह, बरदान सिंह, पंकज सिंह, प्रवेश, सुरतिया, जबर सिंह, राजपाल सिंह, इंद्राराम, शीशपाल सिंह, लायबर सिंह, कृष्णा सिंह व ठाकुर सिंह के हस्ताक्षर हैं।