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Tokyo Olympics: how Neeraj Chopra fell in love with javelin throw, kid took to athletics to lose weight and create history
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कामयाबी की नई इबारत: नीरज चोपड़ा को कैसे हुआ भाले से प्यार, जानें किसने पहचानी उनकी प्रतिभा?
स्पोर्ट्स डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: मुकेश कुमार झा
Updated Sat, 07 Aug 2021 09:39 PM IST
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
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13 साल की उम्र में जो बच्चा बेहद शरारती, मोटा और थुलथुल था, उसने 23 साल की उम्र में कामयाबी की नई इबारत लिख दी। जी हां, हम बात कर रहे हैं भारतीय भाला फेंक खिलाड़ी नीरज चोपड़ा के बारे में। वही नीरज जिन्होंने शनिवार को गोल्ड जीतकर टोक्यो में तिरंगा लहराकर हिंदुस्तान का सिर ऊंचा कर दिया। वही नीरज जिन्होंने भारत का एथलेटिक्स में ओलंपिक पदक जीतने का पिछले 121 साल का इंतजार खत्म किया। वही नीरज जिन्होंने 87.58 मीटर का थ्रो कर ओलंपिक के इतिहास में ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धा में भारत को पहली बार गोल्ड दिलाया। ऐसे में आइए हम आपको बताते हैं कि आखिर नीरज को भाला से प्यार कैसे प्यार हुआ और किसने उनकी इस प्रतिभा को पहचाना?
दरअसल, इस खेल से नीरज के जुड़ाव की शुरुआत काफी दिलचस्प तरीके से हुई। संयुक्त परिवार में रहने वाले नीरज बचपन में काफी मोटे थे और परिवार के दबाव में वजन कम करने के लिए वह खेलों से जुड़े। कहा जाता है कि वह 13 साल की उम्र तक काफी शरारती थे। उनके पिता सतीश कुमार चोपड़ा बेटे को अनुशासित करने के लिए कुछ करना चाहते थे। काफी मनाने के बाद नीरज दौड़ने के लिए तैयार हुए, जिससे उनका वजन घट सके। उनके चाचा उन्हें गांव से 15 किलोमीटर दूर पानीपत स्थित शिवाजी स्टेडियम लेकर गए। नीरज को दौड़ने में कोई दिलचस्पी नहीं थी और जब उन्होंने स्टेडियम में कुछ खिलाड़ियों को भाला फेंक का अभ्यास करते देखा तो उन्हें इस खेल से प्यार हो गया।
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नीरज चोपड़ा
- फोटो : social media
उन्होंने इसमें हाथ आजमाने का फैसला किया और अब वह एथलेटिक्स में देश के सबसे बड़े खिलाड़ियों में से एक बन गए हैं। अनुभवी भाला फेंक खिलाड़ी जयवीर चौधरी ने 2011 में नीरज की प्रतिभा को पहचाना था। नीरज इसके बाद बेहतर सुविधाओं की तलाश में पंचकूला के ताऊ देवी लाल स्टेडियम में आ गए और 2012 के आखिर में वह अंडर-16 राष्ट्रीय चैंपियन बन गए थे।
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गोल्ड मेडल के साथ नीरज चोपड़ा
- फोटो : PTI
इस खेल में उन्हें अगले स्तर पर पहुंचने के लिए वित्तीय मदद की जरूरत थी, जिसमें बेहतर उपकरण और बेहतर आहार की आवश्यकता थी। ऐसे में उनके संयुक्त किसान परिवार ने उनकी मदद की और 2015 में नीरज राष्ट्रीय शिविर में शामिल हो गए। वह 2016 में जूनियर विश्व चैंपियनशिप में 86.48 मीटर के अंडर-20 विश्व रिकॉर्ड के साथ एक ऐतिहासिक स्वर्ण पदक जीतने के बाद सुर्खियों में आए और फिर उन्होंने पीछे मुड़कर नहीं देखा।
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