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ऊना: रेशम विभाग में यूनिट और भर्ती में घोटाले के आरोप, सीबीआई जांच की मांग
Ankesh Dogra
Updated Tue, 08 Sep 2026 01:01 PM IST
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रेशम विभाग में रीलिंग यूनिट लगाने और अधिकारियों की भर्ती को लेकर कथित अनियमितताओं के आरोप सामने आए हैं। ऊना में प्रेस वार्ता को संबोधित करते हुए खुफिया विभाग से सेवानिवृत्त मनोज कुमार कौशल ने विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए पूरे मामले की सीबीआई जांच करवाने की मांग की है। उन्होंने इस संबंध में मुख्यमंत्री को पत्र भेजकर मामले की वस्तुस्थिति से अवगत करवाने का दावा किया है।
मनोज कुमार कौशल के अनुसार, प्रदेश में पिछले कुछ वर्षों के दौरान रेशम विभाग की ओर से रीलिंग यूनिट स्थापित करने की योजना के तहत करीब 17 यूनिटों को प्रोत्साहित किया गया। इन यूनिटों के लिए लाखों रुपये का फंड और सब्सिडी उपलब्ध करवाई गई। उनका आरोप है कि 17 यूनिटों में से एक को छोड़कर अधिकांश यूनिट मौके पर दिखाई नहीं दे रही हैं। उन्होंने सवाल उठाया कि यदि यूनिट स्थापित की गई हैं तो वहां मशीनरी, बिजली मीटर और अन्य जरूरी व्यवस्थाएं क्यों नजर नहीं आ रही हैं।
उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि कई मामलों में जीएसटी से संबंधित औपचारिकताएं भी पूरी नहीं की गईं। कौशल का कहना है कि इस पूरे मामले की निष्पक्ष जांच होने पर सरकारी धन के कथित दुरुपयोग की वास्तविक तस्वीर सामने आ सकती है।
प्रेस वार्ता में उन्होंने विभाग में अधिकारियों की भर्ती को लेकर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका दावा है कि कथित तौर पर फर्जी अनुभव प्रमाण पत्रों के आधार पर आठ विकास अधिकारी/सेरीकल्चर अधिकारियों की भर्ती करवाई गई। इसके अलावा करीब 30 से 40 सेरीकल्चर इंस्पेक्टरों की भर्ती को लेकर भी उन्होंने सवाल उठाए। आरोप लगाया कि इनमें बड़ी संख्या में नियुक्तियां घुमारवीं और मंडी क्षेत्र से की गईं, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों के बेरोजगार युवाओं को भी समान अवसर मिलना चाहिए था।
कौशल ने आरोप लगाया कि विभाग में ऊंचे पद पर तैनात एक अधिकारी की भूमिका की भी जांच की जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि पूरे मामले की जांच किसी स्वतंत्र एजेंसी से होने पर ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि रीलिंग यूनिटों के नाम पर कितनी राशि जारी हुई, उसका वास्तविक इस्तेमाल कहां हुआ और भर्ती प्रक्रिया में अनुभव प्रमाण पत्रों की वैधता किस स्तर पर जांची गई।
उन्होंने सरकार से मांग की कि मामले की सीबीआई से निष्पक्ष जांच करवाई जाए। साथ ही, यदि जांच में फर्जी अनुभव प्रमाण पत्र के आधार पर भर्ती की पुष्टि होती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कार्रवाई की जाए। वहीं, यदि रीलिंग यूनिटों के नाम पर सरकारी धन का दुरुपयोग या फर्जीवाड़ा सामने आता है तो संबंधित लोगों से सरकारी धन की रिकवरी भी की जाए।
मनोज कुमार कौशल ने बताया कि उन्होंने मामले की शिकायत प्रधानमंत्री कार्यालय (पीएमओ) और केंद्रीय वस्त्र मंत्री को भी भेजी है। अब उनकी मांग है कि सरकार शिकायत में लगाए गए आरोपों की निष्पक्ष जांच करवाकर तथ्यों को सार्वजनिक करे।
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