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Annamalai Resigns: Annamalai Quits BJP. Will He Now Form His Own New Party?
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Annamalai Resigns: अन्नामलाई ने BJP से दिया इस्तीफा। अब बनाएंगे अपनी नई पार्टी?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Tue, 02 Jun 2026 06:57 PM IST
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तमिलनाडु की राजनीति में क्या एक नए राजनीतिक अध्याय की शुरुआत होने जा रही है? क्या भाजपा का सबसे चर्चित चेहरा अब अपनी अलग राह चुनने वाला है? पूर्व आईपीएस अधिकारी और भाजपा नेता के. अन्नामलाई के इस्तीफे ने दक्षिण भारत की सियासत में भूचाल ला दिया है। दिल्ली पहुंचकर पार्टी अध्यक्ष को इस्तीफा सौंपना, फिर अमित शाह से मुलाकात करना और उसके बाद नई पार्टी की चर्चाओं का तेज हो जाना कई सवाल खड़े कर रहा है। क्या भाजपा और अन्नामलाई के बीच दूरियां इतनी बढ़ गई हैं कि अब वापसी मुश्किल है? क्या तमिलनाडु में एक और क्षेत्रीय शक्ति उभरने वाली है? और क्या युवा राजनीति के नाम पर अन्नामलाई अपनी नई सियासी पारी शुरू करने जा रहे हैं? आइए आपको बताते है इन तमाम सवालों के जवाब।
तमिलनाडु की राजनीति में एक बार फिर बड़ा घटनाक्रम सामने आया है। भारतीय जनता पार्टी के प्रमुख नेताओं में शामिल और पूर्व आईपीएस अधिकारी के. अन्नामलाई ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। दिल्ली पहुंचकर उन्होंने भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन को अपना इस्तीफा सौंपा। इसके बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात कर अपने फैसले और भविष्य की राजनीतिक योजनाओं को लेकर चर्चा की।
अन्नामलाई के इस्तीफे की खबर सामने आते ही तमिलनाडु और राष्ट्रीय राजनीति में चर्चाओं का दौर तेज हो गया है। पिछले कुछ समय से उनके और पार्टी नेतृत्व के बीच मतभेदों की खबरें सामने आ रही थीं। ऐसे में उनका इस्तीफा कई राजनीतिक सवाल खड़े कर रहा है।
राजनीतिक गलियारों में लंबे समय से यह चर्चा चल रही थी कि अन्नामलाई भाजपा में अपनी भूमिका को लेकर संतुष्ट नहीं हैं। जब वे चेन्नई से दिल्ली रवाना हुए थे, तभी से यह कयास लगाए जा रहे थे कि वे कोई बड़ा फैसला लेने वाले हैं।
दिल्ली पहुंचने के बाद उन्होंने सबसे पहले भाजपा अध्यक्ष नितिन नवीन से मुलाकात की और अपना इस्तीफा सौंप दिया। इसके बाद अमित शाह से मुलाकात ने इस पूरे घटनाक्रम को और महत्वपूर्ण बना दिया। हालांकि भाजपा की ओर से अभी तक इस मामले पर कोई विस्तृत आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अब सवाल उठ रहे हैं की क्या अन्नामलाई नई पार्टी बनाने की तैयारी में है? इसके कुछ इशारे भी मिले है।
सूत्रों के मुताबिक अन्नामलाई जल्द ही अपनी नई राजनीतिक पारी की शुरुआत कर सकते हैं। उनके समर्थकों ने सोशल मीडिया पर "मक्कल शक्ति अय्यकम" (जनशक्ति आंदोलन) नाम से प्रस्तावित नई पार्टी के झंडे और डिजाइन भी साझा किए हैं।
अन्नामलाई के करीबी सूत्रों का दावा है कि नई राजनीतिक पहल को लेकर अधिकांश तैयारियां पूरी हो चुकी हैं। माना जा रहा है कि अगले कुछ दिनों में वे अपने भविष्य को लेकर बड़ा ऐलान कर सकते हैं।
राजनीतिक जानकारों का कहना है कि यदि अन्नामलाई नई पार्टी बनाते हैं तो यह तमिलनाडु की राजनीति में एक नया समीकरण पैदा कर सकती है। खासकर युवा मतदाताओं और पहली बार वोट देने वाले वर्ग को ध्यान में रखते हुए उनकी रणनीति तैयार की जा रही है।
अन्नामलाई के भाजपा से दूरी बढ़ने के पीछे एक प्रमुख कारण केंद्र सरकार की तीन भाषा नीति को लेकर उनका रुख भी माना जा रहा है। उन्होंने सार्वजनिक रूप से इस नीति पर अपनी असहमति जताई थी।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि तमिलनाडु में भाषा का मुद्दा बेहद संवेदनशील रहा है और अन्नामलाई ने क्षेत्रीय भावनाओं को ध्यान में रखते हुए अपना अलग रुख अपनाया। उनके इस कदम को भाजपा नेतृत्व की आधिकारिक लाइन से अलग माना गया था।
यही कारण है कि पिछले कुछ महीनों से उनके और पार्टी के बीच मतभेदों की चर्चाएं लगातार होती रही हैं।
सूत्रों के अनुसार अन्नामलाई की नाराजगी की एक बड़ी वजह राजनीतिक अनदेखी भी रही। अन्नाद्रमुक महासचिव ई.के. पलानीस्वामी और अन्नामलाई दोनों कोंगुनाडु क्षेत्र तथा गाउंडर समुदाय से आते हैं। यह समुदाय लंबे समय तक अन्नाद्रमुक का पारंपरिक समर्थन आधार रहा है।
हालांकि लोकसभा चुनाव के दौरान इस क्षेत्र में भाजपा की पकड़ मजबूत होती दिखाई दी और अन्नामलाई ने कोयंबटूर सीट पर प्रभावशाली प्रदर्शन किया। भले ही वे चुनाव नहीं जीत सके, लेकिन उन्होंने अन्नाद्रमुक को पीछे छोड़ दिया था।
इसके बावजूद आगामी विधानसभा चुनाव के लिए सीट बंटवारे में भाजपा को अपेक्षित महत्व नहीं मिला। बताया जा रहा है कि अन्नामलाई की सिंगानल्लूर सीट समेत कई महत्वपूर्ण सीटें भाजपा को नहीं दी गईं। इससे वे नाराज बताए जा रहे थे।
राजनीतिक सूत्रों का कहना है कि अन्नामलाई अपनी नई राजनीतिक यात्रा में युवाओं को केंद्र में रखकर आगे बढ़ना चाहते हैं। अभिनेता विजय की पार्टी टीवीके की तरह वे भी युवा मतदाताओं और नए सामाजिक समूहों को जोड़ने की रणनीति पर काम कर रहे हैं।
फिलहाल अन्नामलाई ने अपने अगले कदम को लेकर सार्वजनिक रूप से कोई घोषणा नहीं की है, लेकिन उनके इस्तीफे ने तमिलनाडु की राजनीति में नई बहस छेड़ दी है। अब सभी की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या वे वास्तव में नई पार्टी बनाएंगे या फिर किसी नए राजनीतिक समीकरण का हिस्सा बनेंगे। आने वाले दिनों में उनका फैसला दक्षिण भारतीय राजनीति की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।
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