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Bhavishyamalika Predictions: Shocking claims on World War-3 and nuclear attack. Pandit Kashinath Mishra
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Bhavishyamalika Predictions: विश्व युद्ध-3 और परमाणु हमले पर चौंकाने वाले दावे। पं काशीनाथ मिश्रा
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Abhilasha Pathak Updated Sun, 19 Jul 2026 03:00 PM IST
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पंडित काशीनाथ मिश्रा, जो भविष्यमालिका (ओडिशा के पंचसखा संतों, विशेष रूप से अच्युतानंद दास से जुड़ी परंपरा) के प्रमुख व्याख्याकार हैं, अपने प्रवचनों और पुस्तकों में कई महत्वपूर्ण भविष्यवाणियों का उल्लेख करते हैं। यह ध्यान देने योग्य है कि ये भविष्यवाणियों की उनकी व्याख्याएं हैं; इन्हें ऐतिहासिक या वैज्ञानिक रूप से प्रमाणित भविष्यवाणियां नहीं माना जाता है। उनकी विवेचित व्याख्याओं के अनुसार, प्रमुख भविष्यवाणियां इस प्रकार हैं:
1. कलियुग का अंतिम चरण वर्तमान समय को कलियुग (युग-संधि) का अंतिम संक्रमण काल कहा जाता है। इस दौरान धर्म और अधर्म का भीषण संघर्ष, नैतिक पतन और व्यापक परिवर्तन होंगे।
2. 2025-2032 का उथल-पुथल काल इस समय को प्राकृतिक आपदाओं, युद्धों, आर्थिक संकट और वैश्विक अस्थिरता का काल बताया गया है। कई देशों में सामाजिक और राजनीतिक संकट बढ़ते हुए बताए जाते हैं।
3. तीसरे विश्व युद्ध का भय उनके कई प्रवचनों में इस भविष्यवाणी का उल्लेख है कि बड़े देशों के बीच एक विनाशकारी युद्ध हो सकता है। हालांकि, इसका कोई स्वतंत्र प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
4. भारत की विशेष भूमिका भारत को सनातन धर्म के पुनरुत्थान का केंद्र माना जाता है। भविष्य में, भारत आध्यात्मिक रूप से नेतृत्व करेगा और विश्व को एक नई दिशा देगा।
5. भगवान कल्कि के कार्य उनके अनुसार, कल्कि अवतार की लीलाएँ या तो शुरू हो चुकी हैं या बहुत निकट हैं। कल्कि धर्म का पुनरुद्धार करेंगे।
6. जगन्नाथ धाम का महत्व पुरी और भगवान जगन्नाथ को युग परिवर्तन के प्रमुख केंद्र माना जाता है। कई भविष्य की घटनाओं को जगन्नाथ संस्कृति से जोड़ा जाता है।
7. प्राकृतिक आपदाएँ कहा जाता है कि बड़े भूकंप, बाढ़, समुद्री तूफान, सूखा और असामान्य मौसम परिवर्तन होंगे। कई देशों के प्रभावित होने का भी उल्लेख है।
8. नए रोग भविष्य में आने वाली नई और गंभीर महामारियों या रोगों की व्याख्या करते हैं। इसे युग परिवर्तन का संकेत माना जाता है।
9. आर्थिक संकट वैश्विक मुद्रास्फीति, खाद्य संकट, ईंधन संकट और वित्तीय अस्थिरता का उल्लेख किया गया है। लोगों को संयम बरतने और संसाधनों का विवेकपूर्ण उपयोग करने की सलाह दी जाती है।
10. 2032 से सत्य युग पंडित काशीनाथ मिश्रा की सबसे लोकप्रिय व्याख्या यह है कि 2032 सत्य युग का आरंभ होगा। यह दावा उनके आधिकारिक मंचों और पुस्तकों में प्रमुखता से प्रस्तुत किया गया है।
11. धर्मनिष्ठ लोगों की सुरक्षा वे बताते हैं कि ईश्वर भक्ति, जप, सत्संग, गौ सेवा और धर्मचरण का अभ्यास करने वालों को विशेष सुरक्षा प्रदान करेंगे। इसका आध्यात्मिक संदेश यह है कि कठिन समय में आस्था और सद्गुण अधिक महत्वपूर्ण हो जाएंगे। भविष्यमाला की कई व्याख्याएँ प्रतीकात्मक हैं और विभिन्न विद्वान उन्हें अलग-अलग तरह से समझाते हैं। उनमें वर्णित तिथियाँ, युद्ध, आपदाएँ या भविष्य की घटनाएँ मुख्यधारा के इतिहास, विज्ञान या सरकारी संस्थानों द्वारा प्रमाणित तथ्य नहीं हैं, बल्कि धार्मिक-आध्यात्मिक परंपरा का हिस्सा हैं।
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