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FIR Against Shankaracharya: Swami Avimukteshwarananda gets angry at CM Yogi, says this shocking thing!
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FIR Against Shankaracharya: CM योगी पर भड़के स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद, कह दी ये चौंकाने वाली बात!
वीडियो टीम/ अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Wed, 25 Feb 2026 06:50 AM IST
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ज्योतिर्मठ के शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने हाल ही में एक धार्मिक संत पर लगे यौन शोषण के आरोपों के बाद उत्तर प्रदेश की कानून-व्यवस्था को लेकर राज्य सरकार पर तीखा हमला बोला और सीधे तौर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को निशाने पर लिया। उन्होंने कहा कि यदि किसी संत या धार्मिक पद पर आसीन व्यक्ति पर गंभीर आपराधिक आरोप लगते हैं, तो सरकार की जिम्मेदारी है कि निष्पक्ष और पारदर्शी जांच सुनिश्चित करे, ताकि पीड़ित को न्याय मिल सके और समाज में गलत संदेश न जाए। अविमुक्तेश्वरानंद ने आरोप लगाया कि उत्तर प्रदेश में कानून-व्यवस्था को लेकर सरकार बड़े-बड़े दावे करती है, लेकिन जब प्रभावशाली लोगों पर आरोप लगते हैं तो कार्रवाई में देरी या ढिलाई दिखाई देती है। उन्होंने यह भी कहा कि संत समाज की गरिमा बनाए रखने के लिए दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाना आवश्यक है, अन्यथा पूरे संत समुदाय की छवि धूमिल होती है।
शंकराचार्य ने अपने बयान में कहा कि धर्म की आड़ में किसी भी प्रकार का अपराध स्वीकार्य नहीं हो सकता और सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि कानून सभी के लिए समान है। उन्होंने मुख्यमंत्री से सवाल किया कि क्या राज्य में महिलाओं की सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए बनाई गई नीतियां ऐसे मामलों में भी समान रूप से लागू हो रही हैं। अविमुक्तेश्वरानंद ने यह भी कहा कि यदि पीड़िता ने शिकायत दर्ज कराई है तो उसकी सुरक्षा और सम्मान की रक्षा करना सरकार की प्राथमिक जिम्मेदारी है। उन्होंने मांग की कि मामले की जांच उच्च स्तर की एजेंसी से कराई जाए और जांच की प्रगति सार्वजनिक की जाए, ताकि पारदर्शिता बनी रहे।
वहीं, राज्य सरकार की ओर से कहा गया है कि किसी भी आरोप को गंभीरता से लिया जाता है और कानून के अनुसार कार्रवाई की जाएगी। सरकार के प्रवक्ताओं का कहना है कि उत्तर प्रदेश में अपराध के मामलों में त्वरित कार्रवाई की नीति अपनाई गई है और किसी को भी कानून से ऊपर नहीं माना जाता। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह बयान ऐसे समय में आया है जब राज्य में विभिन्न सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर बहस तेज है, और ऐसे में संत समाज के भीतर से उठी आवाज सरकार पर नैतिक दबाव बढ़ा सकती है। पूरे घटनाक्रम ने राजनीतिक और धार्मिक हलकों में हलचल पैदा कर दी है तथा जांच की दिशा और निष्कर्ष पर सबकी नजरें टिकी हुई हैं।
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