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India-US Trade Deal: After EU, has a deal been reached on a trade deal with America?
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India-US Trade Deal: EU के बाद अमेरिका के साथ ट्रेड डील पर बन गई बात?
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Fri, 30 Jan 2026 02:55 PM IST
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भारत और अमेरिका के बीच लंबे समय से अटकी व्यापार वार्ताओं में अब बड़ी हलचल दिखाई दे रही है। आधिकारिक सूत्रों के मुताबिक, दोनों देशों के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर “बहुत महत्वपूर्ण” प्रगति हुई है और बातचीत अब अंतिम दौर में पहुंचती दिख रही है। ऐसे समय में, जब भारत ने यूरोपीय संघ के साथ मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिया है, अमेरिका के साथ भी रिश्तों को नई गति देने की कोशिशें तेज हो गई हैं।
सूत्रों के अनुसार, भारत और अमेरिका के बीच व्यापार समझौते पर बातचीत लगातार आगे बढ़ रही है और दोनों पक्ष सकारात्मक नतीजे की उम्मीद कर रहे हैं। एक वरिष्ठ अधिकारी के मुताबिक, “इस दिशा में प्रयास जारी हैं और हमें भरोसा है कि बातचीत का सकारात्मक परिणाम सामने आएगा।”
पिछले साल दोनों देशों के बीच कई दौर की बातचीत हुई थी, लेकिन अगस्त में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा भारतीय उत्पादों पर भारी शुल्क लगाए जाने के बाद इस प्रक्रिया को झटका लगा। उस समय भारत से आने वाले कुछ उत्पादों पर 50 प्रतिशत तक टैरिफ लगाया गया था। इसके अलावा, रूस से तेल खरीद को लेकर भारत पर 25 प्रतिशत का दंडात्मक शुल्क भी लगाया गया, जिससे द्विपक्षीय व्यापार संबंधों में तनाव बढ़ गया।
इन कदमों के बाद व्यापार वार्ता की रफ्तार धीमी पड़ गई थी। साथ ही, आव्रजन नीति और कुछ अन्य रणनीतिक मुद्दों पर भी दोनों देशों के बीच मतभेद सामने आए थे। हालांकि, अब एक बार फिर दोनों पक्ष वार्ता को पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं।
सूत्रों का कहना है कि हाल ही में भारत और यूरोपीय संघ के बीच मुक्त व्यापार समझौते को अंतिम रूप दिए जाने के बावजूद, अमेरिका के साथ बातचीत की गति बनाए रखी गई है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि भारत-ईयू एफटीए को अमेरिका के साथ व्यापार संबंधों के विकल्प के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए।
एक अधिकारी ने कहा कि अमेरिकी बाजार भारतीय निर्यातकों के लिए उतना ही अहम है जितना यूरोप। भारत की रणनीति दोनों बड़े बाजारों अमेरिका और यूरोपीय संघ में अपनी मौजूदगी को मजबूत करने की है, ताकि निर्यात बढ़े, विनिर्माण को प्रोत्साहन मिले और देश में रोजगार के नए अवसर पैदा हों।
इस बीच, भारत और ईयू के बीच एफटीए के बाद कुछ हलकों में यह धारणा बनी कि यह समझौता अमेरिका की शुल्क नीति के जवाब में किया गया है। लेकिन सरकारी सूत्रों ने इस दावे को खारिज किया है। उनका कहना है कि भारत-ईयू समझौता दोनों पक्षों के आपसी हितों और दीर्घकालिक आर्थिक लाभ को ध्यान में रखकर किया गया है, न कि किसी तीसरे देश की नीतियों की प्रतिक्रिया के तौर पर।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौता अंतिम रूप ले लेता है, तो इसका असर कई क्षेत्रों पर पड़ सकता है। टेक्सटाइल, फार्मास्यूटिकल्स, आईटी सेवाएं, ऑटो कंपोनेंट्स और कृषि उत्पाद जैसे सेक्टरों को इससे नई पहुंच मिल सकती है। वहीं, अमेरिका के लिए भी भारत एक बड़ा और तेजी से बढ़ता हुआ उपभोक्ता बाजार है।
हालांकि, बातचीत के दौरान कुछ संवेदनशील मुद्दे अब भी मेज पर हैं। इनमें टैरिफ संरचना, बाजार तक पहुंच, डेटा और डिजिटल व्यापार, कृषि से जुड़े प्रावधान और बौद्धिक संपदा अधिकार जैसे विषय शामिल बताए जा रहे हैं। दोनों पक्ष इन पर संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं, ताकि समझौता राजनीतिक और आर्थिक दोनों स्तरों पर स्वीकार्य हो सके।
अधिकारियों के मुताबिक, भारत का फोकस यह सुनिश्चित करने पर है कि किसी भी समझौते से घरेलू उद्योगों को नुकसान न पहुंचे, जबकि साथ ही निर्यातकों को वैश्विक बाजार में बेहतर अवसर मिलें। अमेरिका के साथ समझौता इस लिहाज से रणनीतिक माना जा रहा है, क्योंकि इससे भारत की सप्लाई चेन, निवेश आकर्षण और वैश्विक व्यापार में भूमिका और मजबूत हो सकती है।
कुल मिलाकर, भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित व्यापार समझौते को लेकर माहौल अब पहले से ज्यादा सकारात्मक दिख रहा है। हालांकि अंतिम नतीजा क्या होगा, यह आने वाले दिनों की बातचीत पर निर्भर करेगा। लेकिन संकेत यही हैं कि दोनों देश आर्थिक साझेदारी को नई दिशा देने की कोशिश में हैं।
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