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Nari Shakti Vandan Adhiniyam: Opposition will oppose the Women's Reservation Bill, Kharge explained the reason
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Nari Shakti Vandan Adhiniyam:विपक्ष करेगा महिला आरक्षण बिल का विरोध, खरगे ने बैठक के बाद बताई वजह!
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: Bhaskar Tiwari Updated Thu, 16 Apr 2026 03:45 AM IST
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मल्लिकार्जुन खरगे ने विपक्षी दलों की एक महत्वपूर्ण बैठक के बाद महिला आरक्षण बिल को लेकर अपनी स्थिति स्पष्ट करते हुए कहा कि वर्तमान स्वरूप में इस बिल का विरोध किया जाएगा। उन्होंने बताया कि विपक्ष महिलाओं को आरक्षण देने के सिद्धांत के खिलाफ नहीं है, बल्कि जिस तरीके से सरकार इस बिल को लागू करना चाहती है, उस पर गंभीर आपत्तियां हैं। खरगे के अनुसार, प्रस्तावित विधेयक में अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) और अल्पसंख्यक महिलाओं के लिए अलग से उप-कोटा (सब-कोटा) का प्रावधान नहीं किया गया है, जिससे सामाजिक न्याय की अवधारणा प्रभावित होती है। उनका कहना है कि यदि आरक्षण का लाभ केवल सामान्य श्रेणी की महिलाओं तक सीमित रह जाता है, तो यह समाज के कमजोर और वंचित वर्गों के साथ अन्याय होगा।
विपक्ष का यह भी आरोप है कि सरकार इस मुद्दे का राजनीतिक लाभ उठाने के उद्देश्य से इसे जल्दबाजी में पेश कर रही है, जबकि इतने महत्वपूर्ण सामाजिक सुधार पर व्यापक चर्चा और सहमति बनाना आवश्यक है। खरगे ने कहा कि महिला आरक्षण बिल को जनगणना और परिसीमन (डिलिमिटेशन) की प्रक्रिया से जोड़ना भी एक बड़ी समस्या है, क्योंकि इससे इसके लागू होने में अनिश्चितकालीन देरी हो सकती है। उनका तर्क है कि जब तक जनगणना और नई सीटों का निर्धारण पूरा नहीं होता, तब तक महिलाओं को आरक्षण का वास्तविक लाभ नहीं मिल पाएगा।
बैठक में शामिल अन्य विपक्षी नेताओं ने भी इस बात पर जोर दिया कि महिलाओं के सशक्तिकरण के लिए ठोस और समावेशी नीति बननी चाहिए, न कि केवल प्रतीकात्मक कदम उठाए जाएं। उन्होंने मांग की कि सरकार बिल में संशोधन कर OBC महिलाओं के लिए स्पष्ट आरक्षण सुनिश्चित करे और इसे तुरंत लागू करने की दिशा में कदम उठाए।
खरगे ने यह भी कहा कि विपक्ष संसद में इस मुद्दे को जोरदार तरीके से उठाएगा और जरूरत पड़ने पर संशोधन प्रस्ताव भी लाएगा। उन्होंने स्पष्ट किया कि यदि सरकार विपक्ष की मांगों पर विचार करती है और बिल को अधिक समावेशी बनाती है, तो विपक्ष सहयोग करने के लिए तैयार रहेगा। फिलहाल, विपक्ष का रुख यही है कि मौजूदा स्वरूप में यह बिल अधूरा है और इसे बिना जरूरी सुधारों के स्वीकार नहीं किया जा सकता।
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