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नीतीश कुमार ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में की बढ़ोतरी
वीडियो डेस्क अमर उजाला डॉट कॉम Published by: आदर्श Updated Wed, 30 Jul 2025 12:23 PM IST
बिहार में विधानसभा चुनाव की तैयारियों के बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने एक बार फिर बड़ा एलान कर महिला स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को साधने की कोशिश की है। मंगलवार को सीएम ने आशा और ममता कार्यकर्ताओं के मानदेय में उल्लेखनीय वृद्धि की घोषणा की। अब आशा कार्यकर्ताओं को ₹3000 प्रतिमाह जबकि ममता कार्यकर्ताओं को ₹600 प्रति प्रसव प्रोत्साहन राशि दी जाएगी।
यह एलान ऐसे समय में आया है जब नीतीश कुमार की पार्टी जेडीयू चुनावी मैदान में अपनी पकड़ बनाए रखने की कोशिश कर रही है और सामाजिक आधार को मज़बूत करने के लिए एक के बाद एक घोषणाएं कर रही है।
सीएम नीतीश कुमार ने अपने आधिकारिक सोशल मीडिया पोस्ट में लिखा,
“नवम्बर 2005 में सरकार बनने के बाद से हमलोगों ने स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने के लिए बड़े पैमाने पर काम किया है। ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में आशा तथा ममता कार्यकर्ताओं ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनके योगदान के सम्मानस्वरूप मानदेय में वृद्धि की गई है।”
सीएम ने यह भी स्पष्ट किया कि यह निर्णय केवल प्रोत्साहन के लिए नहीं, बल्कि स्वास्थ्य सेवाओं को और सुदृढ़ करने की दिशा में एक सार्थक पहल है।
क्या हैं नई दरें?
• आशा कार्यकर्ताओं को: अब पहले की ₹1000 प्रोत्साहन राशि के स्थान पर ₹3000 प्रतिमाह मिलेंगे।
• ममता कार्यकर्ताओं को: प्रति प्रसव ₹300 की जगह ₹600 प्रति प्रसव की राशि मिलेगी।
इस निर्णय से न सिर्फ हजारों महिलाओं को आर्थिक मजबूती मिलेगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य सेवाएं और मजबूत होंगी।
ममता कार्यकर्ताओं की बहाली पहली बार 21 अगस्त 2008 को हुई थी। उस समय प्रति प्रसव ₹100 दिया जाता था। वर्षों के संघर्ष के बाद इसे बढ़ाकर ₹300 किया गया, लेकिन बढ़ती महंगाई और काम की जिम्मेदारियों को देखते हुए यह राशि अपर्याप्त मानी जाती थी।
बीते कुछ वर्षों से बिहार राज्य ममता कार्यकर्ता संघ लगातार धरना-प्रदर्शन कर मानदेय बढ़ाने की मांग कर रहा था। अब सीएम के इस एलान के बाद हजारों ममता कार्यकर्ताओं में खुशी की लहर है।
कौन हैं आशा और ममता कार्यकर्ता?
आशा कार्यकर्ता:
• इन्हें ‘स्वास्थ्य की सिपाही’ कहा जाता है।
• ये गर्भवती महिलाओं की देखभाल, बच्चों का टीकाकरण, परिवार नियोजन, बीमारियों की रोकथाम, और सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता जैसे कार्यों में लगी रहती हैं।
• गांवों में सरकारी स्वास्थ्य योजनाओं को धरातल पर लागू करने में इनकी भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
ममता कार्यकर्ता:
• ये मुख्य रूप से प्रसव के बाद की देखभाल में सक्रिय रहती हैं।
• अस्पतालों में माताओं और नवजात बच्चों की देखभाल, ध्यान, और पोषण से संबंधित सेवाएं देती हैं।
• वर्तमान में ये सदर अस्पताल, अनुमंडलीय अस्पताल, सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, व प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों में तैनात हैं।
बिहार की करीब 80 हजार आशा कार्यकर्ता और 20 हजार से ज्यादा ममता कार्यकर्ता इस फैसले से सीधे लाभान्वित होंगी। लंबे समय से ये महिलाएं अपने मानदेय में वृद्धि की मांग कर रही थीं। नीतीश कुमार का यह कदम उनके लिए न सिर्फ राहतभरा है, बल्कि आने वाले चुनाव में यह एक राजनीतिक संकेत भी माना जा रहा है।
विशेषज्ञ मानते हैं कि यह निर्णय महिला वोट बैंक को मजबूत करने का भी एक रणनीतिक प्रयास है। बिहार में महिला मतदाताओं की संख्या लगातार बढ़ रही है और नीतीश सरकार कई बार इन्हें लेकर विशेष योजनाएं लाती रही है।
चुनाव से पहले बेरोजगारी, महंगाई और स्वास्थ्य सेवाओं की स्थिति जैसे मुद्दे जनता के बीच चर्चा में हैं। ऐसे में आशा और ममता कार्यकर्ताओं के लिए मानदेय बढ़ाना एक ऐसा कदम है जो सरकार के पक्ष में जनसंपर्क का अवसर बन सकता है।
जेडीयू के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि यह फैसला “नीतीश जी के जमीनी नेतृत्व को दर्शाता है जो लोगों के बीच से समस्याएं सुनकर समाधान निकालते हैं।”
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