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Opposition Boycotts All-Party Meeting: Why did the opposition walk out of the all-party meeting? Monsoon Sessi
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Opposition Boycott All Party Meeting: सर्वदलीय बैठक से विपक्ष ने क्यों किया वॉकआउट? Monsoon Session
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Sun, 19 Jul 2026 02:43 PM IST
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मानसून सत्र शुरू होने से पहले ही संसद में सियासी तूफान आ गया है। सर्वदलीय बैठक के बीच पूरा विपक्ष अचानक बाहर निकल आया। आखिर ऐसा क्या हुआ कि बैठक शुरू होते ही कांग्रेस, टीएमसी, समाजवादी पार्टी, डीएमके, आम आदमी पार्टी और कई विपक्षी दलों ने एकजुट होकर वॉकआउट कर दिया?
संसद के मानसून सत्र की शुरुआत से ठीक पहले बुलाई गई सर्वदलीय बैठक सियासी विवाद की भेंट चढ़ गई। संसद भवन एनेक्सी में आयोजित इस बैठक से कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, समाजवादी पार्टी, डीएमके, झारखंड मुक्ति मोर्चा, आम आदमी पार्टी, नेशनल कॉन्फ्रेंस, वाम दलों और शिवसेना (यूबीटी) समेत कई विपक्षी दलों ने वॉकआउट कर दिया।
विपक्ष का आरोप है कि बैठक में एक ऐसे दल को शामिल किया गया, जिसे लेकर संसदीय और कानूनी स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है। तृणमूल कांग्रेस सांसद महुआ मोइत्रा ने कहा कि लोकसभा अध्यक्ष ने कथित 20 बागी सांसदों के विलय को अभी तक मंजूरी नहीं दी है और उनकी सदस्यता से जुड़ी याचिकाएं भी लंबित हैं। इसके बावजूद उन्हें सर्वदलीय बैठक में आमंत्रित करना संसदीय परंपराओं और संविधान की भावना के खिलाफ है।
महुआ मोइत्रा ने कहा कि 91वें संविधान संशोधन के बाद किसी अलग संसदीय गुट के गठन की व्यवस्था नहीं है। ऐसे में इन सांसदों को अलग पहचान देकर बैठक में शामिल करना गंभीर सवाल खड़े करता है। उन्होंने कहा कि इसी विरोध के चलते पूरे विपक्ष ने बैठक से बाहर निकलने का फैसला किया।
कांग्रेस सांसद प्रमोद तिवारी ने भी विपक्ष के रुख का समर्थन करते हुए कहा कि अंतिम संवैधानिक फैसला आने से पहले किसी समूह को मान्यता देना पूरी तरह असंवैधानिक है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने संविधान की रक्षा और संसदीय मर्यादा बनाए रखने के लिए वॉकआउट किया है।
शिवसेना (यूबीटी) सांसद अरविंद सावंत ने भी सवाल उठाते हुए कहा कि कानून की किताबों में ऐसी मान्यता का कोई प्रावधान नहीं है। उन्होंने कहा कि यदि किसी मामले पर फैसला लंबित है तो उससे पहले किसी समूह को अलग पहचान देना उचित नहीं कहा जा सकता।
आम आदमी पार्टी के सांसद एन.डी. गुप्ता ने भी अपने दल का उदाहरण देते हुए कहा कि उनके मामले में भी राज्यसभा के सात सांसदों को अलग बैठने की व्यवस्था दी गई, जबकि उससे जुड़ी याचिका अभी विचाराधीन है। उन्होंने आरोप लगाया कि इस तरह की कार्रवाई लोकतांत्रिक संस्थाओं की निष्पक्षता पर सवाल खड़े करती है।
उधर, संसद का मानसून सत्र 20 जुलाई से 13 अगस्त तक चलेगा। केंद्रीय संसदीय कार्य मंत्री किरेन रिजिजू के अनुसार, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू की मंजूरी के बाद बुलाए गए इस चार सप्ताह लंबे सत्र में कुल 19 बैठकें होंगी। सरकार का कहना है कि इस दौरान राष्ट्रीय महत्व के कई मुद्दों पर चर्चा होगी और आवश्यक विधायी कार्य पूरे किए जाएंगे।
हालांकि, सर्वदलीय बैठक में हुए इस विवाद ने साफ संकेत दे दिए हैं कि मानसून सत्र की शुरुआत से पहले ही सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच टकराव तेज हो चुका है। ऐसे में अब सबकी नजर इस बात पर है कि सदन के भीतर यह राजनीतिक संघर्ष किस रूप में सामने आता है।
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