भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इजरायल की संसद नेसेट
को संबोधित करते हुए आतंकवाद, लोकतंत्र और रणनीतिक साझेदारी पर स्पष्ट संदेश दिया। अपने भाषण में उन्होंने 7 अक्टूबर के हमलों का जिक्र करते हुए कहा कि भारत हर प्रकार के आतंकवाद की कड़ी निंदा करता है और इस कठिन समय में इजरायल के साथ खड़ा है। उन्होंने यह भावनात्मक तथ्य भी साझा किया कि उनका जन्म 17 सितंबर 1950 को हुआ, उसी दिन भारत ने औपचारिक रूप से इजरायल को मान्यता दी थी, जिससे दोनों देशों के रिश्तों की ऐतिहासिक गहराई झलकती है।
पीएम मोदी ने कहा कि भारत और इजरायल साझा लोकतांत्रिक मूल्यों से जुड़े मजबूत साझेदार हैं और रक्षा, साइबर सुरक्षा, खुफिया सहयोग, कृषि, जल प्रबंधन तथा स्टार्टअप व इनोवेशन के क्षेत्रों में मिलकर काम कर रहे हैं। उन्होंने भारत-इजरायल इनोवेशन ब्रिज और युवा उद्यमियों के सहयोग को भविष्य की दिशा बताया। मध्य पूर्व में शांति के सवाल पर उन्होंने संवाद और दो-राष्ट्र समाधान का समर्थन किया, साथ ही संघर्ष में मारे गए निर्दोष नागरिकों के प्रति संवेदना जताई और मानवीय सहायता पर जोर दिया। अपने संबोधन में उन्होंने सदियों पुराने भारत-यहूदी संबंधों और भारत में यहूदी समुदाय के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का भी उल्लेख किया। अंत में उन्होंने कहा कि 21वीं सदी भारत और इजरायल की साझेदारी की सदी बन सकती है, जहां सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और विकास के माध्यम से दोनों देश वैश्विक स्थिरता में अहम भूमिका निभाएंगे।
मध्य पूर्व में शांति की आवश्यकता पर जोर देते हुए उन्होंने संवाद और कूटनीति के रास्ते को सबसे प्रभावी समाधान बताया तथा दो-राष्ट्र समाधान के समर्थन की बात दोहराई। साथ ही, संघर्ष में जान गंवाने वाले नागरिकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए मानवीय सहायता और स्थिरता की जरूरत पर बल दिया।अपने संबोधन के अंत में उन्होंने सदियों पुराने भारत-यहूदी संबंधों और भारत में यहूदी समुदाय के शांतिपूर्ण सहअस्तित्व का उल्लेख करते हुए कहा कि 21वीं सदी भारत और इजरायल की साझेदारी की सदी बन सकती है जहां सुरक्षा, तकनीक, नवाचार और विकास के माध्यम से दोनों देश वैश्विक शांति और स्थिरता में अहम भूमिका निभाएंगे।