उस्ताद शुजात हुसैन खान भारतीय संगीतकार और विख्यात सितार वादक हैं। शुजात खान इमदादखानी घराने से आते हैं, जिसे संगीत के इटावा घराने के स्कूल के रूप में भी जाना जाता है । उन्होंने 100 से अधिक एल्बम रिकॉर्ड किए हैं और ईरानी संगीतकार कायहान कलहोर के साथ बैंड ग़ज़ल में अपने काम के लिए सर्वश्रेष्ठ विश्व संगीत एल्बम के लिए ग्रैमी पुरस्कार के लिए नामांकित हुए थे । वे अक्सर गाते भी हैं। उनकी सितार वादन शैली, जिसे 'गयाकी अंग' के नाम से जाना जाता है, मानव आवाज की सूक्ष्मताओं की नकल करती है। अमर उजाला के खास आयोजन शब्द सम्मान 2025 के मुख्य अतिथि के रूप में विजेताओं को सम्मान उनके ही कर कमलों से दिए गए। और इस कार्यक्रम में उनके सितार वादन और गायन चार चांद लगा दिए। ठीक कार्यक्रम से पहले हमारी संवाददता अभिलाषा ने उनसे खास बातचीत की। देखिए ये Exclusive Interview.
तीन साल की उम्र में शुजात ने एक विशेष रूप से निर्मित छोटे सितार पर अभ्यास करना शुरू किया और छह साल की उम्र तक आते-आते इस विलक्षण प्रतिभा ने सार्वजनिक प्रदर्शन देना शुरू कर दिया। तब से उन्होंने भारत के सभी प्रतिष्ठित संगीत समारोहों में प्रस्तुति दी है और एशिया, अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और यूरोप सहित दुनिया भर में यात्रा की है। शुजात हुसैन खान ने भारतीय शास्त्रीय संगीत बजाने की अपनी अनूठी शैली विकसित की है। ताल के प्रति उनका दृष्टिकोण काफी हद तक सहज, ताजगी भरा और स्वाभाविक है, जो हमेशा उनके श्रोताओं को आश्चर्यचकित करता है। वे अपनी असाधारण आवाज के लिए भी जाने जाते हैं, जिसका उपयोग वे लोकगीतों और कविताओं को गाने के लिए करते हैं।
अमर उजाला का यह शब्द सम्मान अलंकरण समारोह दिल्ली में हुआ। हिंदी की प्रख्यात कथाकार ममता कालिया और मणिपुरी की विख्यात रचनाकार अरमबम ओंगबी मेमचौबी को सर्वोच्च अलंकरण 'आकाशदीप' से सम्मानित किया गया। सविता सिंह, नाइश हसन, शहादत, मनीष यादव को श्रेष्ठ कृति सम्मान और सुजाता शिवेन को भाषाबंधु अलंकरण से सम्मानित किया गया।