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West Bengal Election 2026: BJP has made a strong plan against Mamata Banerjee, played this big bet!
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West Bengal Election 2026: ममता बनर्जी के खिलाफ भाजपा ने बनाया तगड़ा प्लान, खेल दिया ये बड़ा दांव!
वीडियो डेस्क, अमर उजाला डॉट कॉम Published by: भास्कर तिवारी Updated Sun, 08 Feb 2026 04:30 AM IST
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पश्चिम बंगाल की राजनीति आगामी 2026 विधानसभा चुनाव की दिशा में तेज़ी से गड़बड़ाती जा रही है और **विपक्ष के नेता व भाजपा वरिष्ठ नेता सुवेंदु अधिकारी ने राज्य के चुनावी माहौल को और गरमाते हुए एक बड़ा बयान दिया है। अधिकारी ने आरोप लगाया है कि वर्तमान ममता बनर्जी सरकार बांग्लादेशी घुसपैठियों को संरक्षण देती है और इसी वजह से राज्य में सत्तारूढ़ तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) की छवि कमजोर हुई है। उन्होंने कहा है कि जनता अब इस “कट्टरपंथी सरकार” को सत्ता से हटाने का मन बना चुकी है और अगले चुनाव के बाद पश्चिम बंगाल में ‘सनातनी सरकार’ बनेगी, जिसका अर्थ वे हिंदू-मुखी और राष्ट्रवादी नीतियों पर आधारित सरकार के रूप में समझाते हैं। अधिकारी का यह बयान सिर्फ एक राजनीतिक दावे से आगे बढ़कर यह संकेत देता है कि भाजपा धर्म और सांस्कृतिक पहचान की राजनीति को चुनावी एजेंडे का अहम हिस्सा बनाए हुए है और वे इसे राजनीतिक समर्थन जुटाने की रणनीति के रूप में पेश कर रहे हैं।
सुवेंदु अधिकारी की यह सोच इस बात पर आधारित है कि बीजेपी पिछली कुछ चुनावों में हिंदू वोटों को एकत्रित करने में सक्षम रही है और इसी आधार पर वे मानते हैं कि पश्चिम बंगाल में भी धार्मिक-सांस्कृतिक पहचान को लेकर वोटर रुख में बदलाव आ सकता है। अधिकारी का दावा है कि राज्य में “सनातनी सरकार” बनने का मतलब यह है कि अगली सरकार हिंदू सांस्कृतिक मूल्यों, परंपराओं और राष्ट्रीयता के मुद्दों पर केंद्रित होगी, और यह तेज़ी से बदलते मतदाताओं के रुझानों को दर्शाता है। हालांकि, तृणमूल कांग्रेस और उसके समर्थक इस तरह के बयान को धर्म के नाम पर राजनीति और विभाजनकारी बताया करते हैं, जबकि अधिकारी इसे “राजनीतिक परिवर्तन की मांग” के रूप में देखते हैं।
राज्य में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) जैसे मुद्दों पर बहस और आरोप-प्रत्यारोप ने भी राजनीतिक तापमान बढ़ाया है, जहाँ अधिकारी ने मुख्यमंत्री पर यह आरोप लगाया कि वह अवैध प्रवासियों को संरक्षण दे रही हैं, जबकि टीएमसी इसे राजनीतिक तबका एवम् सांख्यिकीय प्रक्रिया का विरोध बताते हुए अपना पक्ष रखती है। इस पूरे राजनीतिक परिदृश्य में ‘सनातनी सरकार’ का विषय भाजपा-सहमत वोटरों के बीच एक केंद्रीय चुनावी नारों में बदल जाता दिख रहा है, जिससे चुनावी समीकरण और सत्ताधारी तथा विपक्षी दलों के बीच की टक्कर और तेज़ हो गई है। इस बयान ने पश्चिम बंगाल में धर्म-आधारित राजनीति की गरमाहट को और बढ़ा दिया है, जिससे आगामी चुनाव का माहौल पहले से भी अधिक कट्टर और प्रतिस्पर्धात्मक नजर आता है।
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