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West Bengal Second Phase Voting: These seats in the second phase will determine the path to power!
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West Bengal Second Phase Voting: दूसरे चरण की ये सीटें तय करेंगी सत्ता का रास्ता!
अमर उजाला डिजिटल डॉट कॉम Published by: Adarsh Jha Updated Tue, 28 Apr 2026 09:55 PM IST
29 अप्रैल 2026 पश्चिम बंगाल की राजनीति के लिए सिर्फ एक तारीख नहीं, बल्कि एक बड़ा टर्निंग पॉइंट। 142 सीटों पर होने वाली वोटिंग जहां हर वोट तय करेगा सत्ता की दिशा। क्या ममता बनर्जी अपना किला बचा पाएंगी? क्या बीजेपी इस बार सेंध लगाने में सफल होगी? और क्या ओवैसी का ‘फैक्टर’ खेल बिगाड़ देगा? इन सभी सवालों के जवाब छुपे हैं इस दूसरे चरण की वोटिंग में।
दूसरा चरण: बंगाल की सत्ता का असली सेमीफाइनल
पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव 2026 का दूसरा चरण अब अपने चरम पर है। 29 अप्रैल को 142 विधानसभा सीटों पर मतदान होना है और यही वो चरण है, जिसे राजनीतिक जानकार ‘किंगमेकर फेज’ मान रहे हैं। कोलकाता, उत्तर 24 परगना, दक्षिण 24 परगना, नादिया और हावड़ा जैसे अहम जिलों में फैली ये सीटें तृणमूल कांग्रेस का मजबूत गढ़ मानी जाती हैं।
2021 के चुनावी आंकड़े इस बात की गवाही देते हैं। तब इन 142 सीटों में से 123 सीटों पर टीएमसी ने जीत दर्ज की थी, जबकि बीजेपी सिर्फ 18 सीटों पर सिमट गई थी। एक सीट अन्य के खाते में गई थी। साफ था दीदी का दबदबा अटूट था।
लेकिन 2026 में कहानी थोड़ी बदलती नजर आ रही है।
बदलता माहौल: सत्ता विरोधी लहर और आरोपों की आंधी
इस बार चुनाव सिर्फ विकास बनाम वादों का नहीं है बल्कि आरोप-प्रत्यारोप का भी है। राशन घोटाला, शिक्षक भर्ती घोटाला और संदेशखाली जैसे मुद्दों ने ममता सरकार को घेरा है। बीजेपी इन्हीं मुद्दों को लेकर आक्रामक है।
नरेंद्र मोदी और अमित शाह ने बंगाल में ताबड़तोड़ रैलियां कर माहौल को पूरी तरह हाई-वोल्टेज बना दिया है। बीजेपी का दावा है कि इस बार दक्षिण बंगाल के गढ़ में सेंध लगाकर सत्ता की राह आसान की जा सकती है।
वहीं ममता बनर्जी भी पूरी ताकत से मैदान में हैं। उनकी रैलियों में अब भी भारी भीड़ उमड़ रही है, लेकिन सवाल यह है—क्या यह भीड़ वोट में तब्दील होगी?
ओवैसी फैक्टर: क्या बिगड़ेगा दीदी का गणित?
इस चुनाव का सबसे बड़ा ‘एक्स फैक्टर’ बनकर उभरे हैं असदुद्दीन ओवैसी। उनकी पार्टी AIMIM ने इस बार बंगाल के उन इलाकों पर फोकस किया है, जहां मुस्लिम वोट निर्णायक भूमिका निभाते हैं।
बंगाल में करीब 27% मुस्लिम आबादी है, जो 100 से ज्यादा सीटों पर असर डालती है। ऐसे में अगर AIMIM 5–10% वोट भी काटती है, तो इसका सीधा नुकसान टीएमसी को हो सकता है।
ममता बनर्जी ने कई बार ओवैसी को “बीजेपी की बी-टीम” कहा है। यह बयान इस बात का संकेत है कि टीएमसी के भीतर कहीं न कहीं AIMIM को लेकर चिंता जरूर है।
हाई-प्रोफाइल सीटें: जहां टिकी हैं सबकी नजरें
दूसरे चरण में कई ऐसी सीटें हैं, जो पूरे चुनाव का रुख तय कर सकती हैं:
भवानीपुर: यहां ममता बनर्जी बनाम सुवेंदु अधिकारी की सीधी टक्कर।
कोलकाता पोर्ट: फिरहाद हकीम के सामने बीजेपी और वाम दलों की चुनौती।
टॉलीगंज: अरूप बिस्वास की साख दांव पर।
बालीगंज: सोवनदेब चट्टोपाध्याय का मुकाबला त्रिकोणीय।
दमदम और दमदम उत्तर: ब्रत्य बसु और चंद्रिमा भट्टाचार्य की परीक्षा।
रासबिहारी और नौपाड़ा: जहां बीजेपी बड़े चेहरे उतारकर टीएमसी को चुनौती दे रही है।
इन सीटों पर नतीजे सिर्फ जीत-हार नहीं तय करेंगे, बल्कि पूरे बंगाल का राजनीतिक भविष्य भी लिखेंगे।
क्या कहता है गणित?
अगर टीएमसी इन 142 सीटों में से बड़ी संख्या बचाने में सफल रहती है, तो ममता बनर्जी की सत्ता में वापसी लगभग तय मानी जाएगी। लेकिन अगर बीजेपी यहां 40–50 सीटों तक पहुंच जाती है, तो मुकाबला बेहद कांटे का हो सकता है।
हालांकि, दूसरे चरण के शेष मतदान के संबंध में अभिषेक ने कहा कि 29 तारीख को 200 सीटों का आंकड़ा पार हो जाएगा, और उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें नहीं पता कि यह आंकड़ा कहां जाकर खत्म होगा।
राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यह चरण ‘सेमीफाइनल’ की तरह है। यहां जो बढ़त बनाएगा, वही 4 मई को आने वाले नतीजों में बाजी मार सकता है।
पश्चिम बंगाल का यह चुनाव अब सिर्फ राजनीतिक दलों की लड़ाई नहीं रह गया है। यह जनता के मूड, बदलाव की चाह और भरोसे की परीक्षा बन चुका है।
क्या दीदी अपना किला बचा पाएंगी? क्या बीजेपी ‘मिशन बंगाल’ को अंजाम तक पहुंचाएगी? या फिर ओवैसी का फैक्टर पूरी बाजी पलट देगा?
इन सभी सवालों का जवाब 29 अप्रैल को ईवीएम में कैद होगा और 4 मई को सामने आएगा।
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