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MP News: कान्हा नेशनल पार्क से 450 किमी का सफर कर सतपुड़ा टाइगर रिजर्व पहुंचे बारहसिंगा, यहां बढ़ाएंगे कुनबा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नर्मदापुरम Published by: अंकिता विश्वकर्मा Updated Mon, 23 Jan 2023 05:56 PM IST
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नर्मदापुरम में स्थित सतपुड़ा टाइगर रिजर्व के जंगल में कान्हा नेशनल पार्क मंडला के नए सदस्य आए हैं। बारहसिंगा की संख्या बढ़ाने के लिए कान्हा नेशनल पार्क के 20 बारहसिंगा का झुंड सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में छोड़ा गया है। कान्हा नेशनल पार्क से 20 बारहसिंगा लाकर छोड़े गए। यह न केवल बारहसिंगा के परिवार की संख्या बढ़ाएंगे, बल्कि बाघों के भोजन के लिए सहायक भी होंगे।
जानकारी के मुताबिक पेंच नेशनल पार्क और कान्हा पार्क से करीब तीन हज़ार चीतल और बारहसिंगा को सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में लाने का कार्य पिछले ढाई साल से जारी है। अब तक 1800 चीतल और करीब 100 बारहसिंगा को यहां लाया जा चुका है। सतपुड़ा टाइगर रिजर्व में घास बड़ी होने की वजह से चीतल, बारहसिंगा को यहां लाया जा रहा है। रहवास के लिए अनुकूल माहौल व विचरण करने के लिए बड़ा क्षेत्र होना भी महत्वपूर्ण वजह है। पर्यटकों को भी आकर्षित करने की मुहिम में भी सतपुड़ा टाइगर रिजर्व काम कर रहा है।
पर्यटकों के आकर्षण का केंद्र
सतपुड़ा टाइगर रिजर्व हमेशा से पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र रहा है। यहां बाघ, तेंदुआ, चीतल, हिरण, बारहसिंगा, हाथी समेत कई वन्य पक्षी निवास करते हैं। खूबसूरत वादियों को देखने व घूमने के लिए मध्यप्रदेश छत्तीसगढ़, गुजरात, महाराष्ट्र समेत दूर-दूर से पर्यटक आते हैं। वहीं, बाघ, बॉयसन चीतल और बारहसिंगा के झुंड पर्यटकों को आकर्षित करेंगे।
12 घंटे में 450 किलोमीटर की यात्रा
क्षेत्र संचालक एल कृष्णमूर्ति ने बताया कि कान्हा नेशलन पार्क से 20 बारहसिंगा को लाया गया है। बारहसिंगा ने 12 घंटे में 450 किमी का सफर गाड़ी से तय किया है। बारहसिंगा को विशेष रूप से डिजाइन किए गए परिवहन वाहन में पशु चिकित्सक टीम के साथ लाया गया। विस्थापित किए गए गांवों में घास के मैदान बन गए हैं। यहां वे आराम से जीवन यापन से कर सकते है । साथ ही चीतल, बारहसिंगा का कुनबा बढ़ने से बाघों को पर्याप्त भोजन मिल सकेगा।
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