नर्मदापुरम की लाइफलाइन कहे जाने वाला तवा पुल एक बार फिर खतरे के निशान पर पहुंच गया है। स्टेट हाईवे-67 पर तवा नदी के ऊपर बना प्रदेश के सबसे लंबे पुलों में शामिल यह ब्रिज अब गंभीर दरारों की वजह से सुर्खियों में है।
पुल के पियर नंबर 52, 53 और 55 को सपोर्ट देने वाले स्लैब में क्रेक मिलने के बाद प्रशासन ने तत्काल प्रभाव से भारी वाहनों की आवाजाही पर रोक लगा दी है। अगले सात दिनों तक पुल पर मरम्मत कार्य चलेगा और उसके बाद विशेषज्ञों की टीम इसकी तकनीकी जांच करेगी। रिपोर्ट आने के बाद ही ट्रकों और डंपरों को दोबारा अनुमति दी जाएगी।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर बार-बार मरम्मत के बावजूद तवा पुल में दरारें क्यों आ रही हैं? स्थानीय स्तर पर उंगलियां रेत परिवहन में हो रही कथित ओवरलोडिंग पर उठ रही हैं। तवा नदी क्षेत्र में रेत की कई वैध खदानें संचालित हैं, लेकिन आरोप है कि क्षमता से कई गुना ज्यादा भार लेकर दौड़ रहे डंपर पुल की सेहत बिगाड़ रहे हैं। यही वजह है कि पुल की मजबूती पर लगातार खतरा मंडरा रहा है।
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हैरानी की बात यह है कि महज तीन साल पहले तवा पुल की विशेष मरम्मत की गई थी। उस दौरान पुल करीब छह महीने तक बंद रहा था। करोड़ों रुपये खर्च होने के बाद भी अब फिर से दरारें सामने आने लगी हैं, जिससे निर्माण गुणवत्ता और रखरखाव दोनों पर सवाल खड़े हो गए हैं।
फिलहाल भारी वाहनों को माखननगर के आरी, सांगाखेड़ा, बांद्राभान और मालाखेड़ी मार्ग से डायवर्ट किया गया है। इससे ट्रांसपोर्टरों और वाहन चालकों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। उन्हें लंबा चक्कर लगाकर गंतव्य तक पहुंचना पड़ रहा है, जिससे समय और ईंधन दोनों की अतिरिक्त खपत हो रही है।
अब निगाहें विशेषज्ञों की जांच रिपोर्ट पर टिकी हैं। बड़ा सवाल यह है कि क्या तवा पुल सिर्फ मरम्मत के सहारे चलेगा या फिर ओवरलोडिंग पर सख्त कार्रवाई कर इसकी उम्र बचाई जाएगी? अगर समय रहते ठोस कदम नहीं उठाए गए तो नर्मदापुरम की इस अहम लाइफलाइन पर बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।