राजस्थान हाईकोर्ट की ओर से टारगेटेड मामलों के जल्द निस्तारण के लिए बनाई गई कार्ययोजना के विरोध में बुधवार को उदयपुर में अधिवक्ताओं ने प्रदर्शन किया और न्यायिक कार्य का बहिष्कार किया। बड़ी संख्या में वकील कोर्ट परिसर स्थित नीम चौक में एकत्र हुए और धरना-प्रदर्शन कर योजना पर आपत्ति जताई। इस दौरान अधिवक्ताओं में खासा आक्रोश देखने को मिला।
उदयपुर बार एसोसिएशन के अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने कहा कि लंबित मामलों का जल्द निस्तारण जरूरी है, लेकिन इसके लिए तय किए गए टारगेट के दबाव में सुनवाई की गुणवत्ता प्रभावित नहीं होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि हर मामले की परिस्थितियां अलग होती हैं और वकीलों के साथ-साथ पक्षकारों को भी अपनी बात रखने के लिए पर्याप्त समय मिलना चाहिए।
अधिवक्ताओं का कहना है कि न्यायिक प्रक्रिया को केवल मामलों की संख्या के आधार पर तय किए गए लक्ष्यों से नहीं जोड़ा जाना चाहिए। उनका आरोप है कि टारगेट पूरा करने के दबाव में न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो सकती है, जिसका सीधा असर आमजन के न्याय पाने के अधिकार पर पड़ेगा।
वकीलों ने कहा कि न्यायपालिका आमजन के लिए आखिरी उम्मीद होती है। ऐसे में यदि मामलों की सुनवाई में जल्दबाजी या अनावश्यक दबाव बढ़ता है तो इससे लोगों का न्याय व्यवस्था पर भरोसा प्रभावित हो सकता है।
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प्रदर्शन के दौरान अधिवक्ताओं ने कोर्ट परिसरों में मूलभूत सुविधाओं का मुद्दा भी उठाया। वकीलों का कहना है कि कई न्यायालय परिसरों में पर्याप्त बैठने की व्यवस्था, पेयजल, शौचालय, पार्किंग, कैंटीन और प्रतीक्षालय जैसी सुविधाओं का अभाव है।
अधिवक्ताओं ने यह भी कहा कि कोर्ट भवन बदलने या न्यायालय को दूसरी जगह स्थानांतरित करने का फैसला केवल प्रशासनिक जरूरतों के आधार पर नहीं होना चाहिए। इसमें वकीलों और पक्षकारों की सुविधाओं को भी ध्यान में रखा जाना चाहिए।
बार अध्यक्ष जितेंद्र जैन ने कहा कि बुधवार से इस विरोध को पूरे उदयपुर संभाग में आगे बढ़ाया जाएगा। बार एसोसिएशन ने भी आंदोलन को समर्थन दिया है। अधिवक्ताओं ने स्पष्ट किया कि मांगों पर सकारात्मक विचार नहीं होने तक आंदोलन जारी रहेगा।
प्रदर्शन में बार उपाध्यक्ष महेंद्र मेनारिया, महासचिव लोकेश गुर्जर, सचिव आशीष कुमार कोठारी, वित्त सचिव धर्मेंद्र सोनी, पूर्व अध्यक्ष मनीष शर्मा समेत बड़ी संख्या में अधिवक्ता मौजूद रहे।