China: 'AI अब किसी एक देश का खेल नहीं', शी जिनपिंग को आखिर किस बात का सता रहा डर? भारत से है खास कनेक्शन
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि एआई किसी एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए। चीन अगले पांच वर्षों में विकासशील देशों के लिए 5,000 एआई अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करेगा। वहीं, 29 देशों ने WAICO संगठन की स्थापना पर हस्ताक्षर किए।
चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने कहा कि एआई किसी एक देश का नहीं, बल्कि वैश्विक सहयोग का क्षेत्र होना चाहिए। चीन अगले पांच वर्षों में विकासशील देशों के लिए 5,000 एआई अनुसंधान परियोजनाएं शुरू करेगा। वहीं, 29 देशों ने WAICO संगठन की स्थापना पर हस्ताक्षर किए।
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विस्तार
चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने शुक्रवार को कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) का विकास किसी एक देश का एकल प्रदर्शन नहीं होना चाहिए। बल्कि यह वैश्विक सहयोग का एक सामंजस्यपूर्ण संयोजन होना चाहिए। शी जिनपिंग के इस बयान को भारत के लिए डर के तौर पर देखा जा रहा है। भारत लगतार एआई को लेकर काम कर रहा है।
शी जिनपिंग ने क्या कहा?
शी जिनपिंग ने शंघाई में चीन के सबसे बड़े वार्षिक एआई उद्योग कार्यक्रम, 2026 विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सम्मेलन (डब्ल्यूएआईसी) के उद्घाटन समारोह को संबोधित करते हुए ये टिप्पणियां कीं। उन्होंने कहा, 'एआई की अभूतपूर्व गति से प्रगति को देखते हुए, हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि इसका विकास सकारात्मक हो, भलाई के लिए हो और मानवता के हित में हो।' उन्होंने कहा कि इसे मानवीय बुद्धिमत्ता और अंतरराष्ट्रीय सहमति द्वारा निर्देशित किया जाना चाहिए।
एआई में अगले पांच वर्षों को लेकर क्या कहा?
हांगकांग स्थित साउथ चाइना मॉर्निंग पोस्ट की रिपोर्ट के अनुसार, उन्होंने कहा कि अगले पांच वर्षों में एआई के विकास को और अधिक समर्थन देने के लिए चीन विकासशील देशों को एआई में 5,000 अनुसंधान परियोजनाएं देगा। साथ ही प्रशिक्षण, सेमिनार कार्यक्रम और सहयोग केंद्र प्रदान करेगा। विकासशील देशों में दक्षिण पूर्व एशियाई राष्ट्र संघ, अरब लीग, शंघाई सहयोग संगठन, अफ्रीकी संघ, लैटिन अमेरिकी और ब्रिक्स सदस्य देश शामिल हैं।
एक समझौते पर किए हस्ताक्षर
इससे पहले, 29 देशों ने शंघाई में विश्व कृत्रिम बुद्धिमत्ता सहयोग संगठन (WAICO) की स्थापना के लिए एक समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ के अनुसार, समझौते के तहत WAICO एक स्वतंत्र अंतर-सरकारी अंतरराष्ट्रीय संगठन होगा जिसका मुख्यालय शंघाई में होगा।
कितने देशों ने किए हस्ताक्षर
चीन के अलावा कजाकिस्तान, लाओस, पाकिस्तान, रूस और इंडोनेशिया सहित 29 देशों के प्रतिनिधियों ने समझौते पर हस्ताक्षर किए, जिससे उनके देश WAICO के संस्थापक सदस्य बन गए। हस्ताक्षर समारोह में उपस्थित देशों और अंतरराष्ट्रीय संगठनों के प्रतिनिधियों में संयुक्त राष्ट्र के महासचिव एंटोनियो गुटेरेस भी शामिल थे।
संगठन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्य क्या है?
शिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, समझौते के तहत संगठन संयुक्त राष्ट्र चार्टर के उद्देश्यों को बरकरार रखेगा। व्यापक परामर्श और साझा लाभ के लिए संयुक्त योगदान के लिए प्रतिबद्ध रहेगा। जन-केंद्रित दृष्टिकोण का पालन करेगा। हाल के वर्षों में, चीन ने बड़े पैमाने पर सरकारी समर्थन, विशाल घरेलू बाजार, मजबूत विनिर्माण क्षमताओं और इंजीनियरों के एक बड़े समूह की मदद से कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई), इलेक्ट्रिक वाहनों (ईवी) और बैटरी प्रौद्योगिकी सहित कई अग्रणी प्रौद्योगिकियों में बड़ी प्रगति की है।
एआई को लेकर भारत का क्या रुख?
भारत एआई को समावेशी विकास और जनकल्याण का माध्यम मानता है। सरकार का लक्ष्य "AI for All" के सिद्धांत पर स्वास्थ्य, शिक्षा, कृषि, शासन और उद्योग जैसे क्षेत्रों में एआई का उपयोग बढ़ाना है। भारत नवाचार को बढ़ावा देने के साथ-साथ जिम्मेदार, सुरक्षित और भरोसेमंद एआई के विकास पर जोर देता है।
भारत ने IndiaAI Mission शुरू की गई है, जिसके तहत कंप्यूटिंग क्षमता, स्टार्टअप, अनुसंधान, कौशल विकास और भारतीय भाषाओं के लिए एआई मॉडल विकसित किए जा रहे हैं। भारत का मानना है कि एआई मानव-केंद्रित, पारदर्शी, नैतिक और सभी देशों के लिए लाभकारी होना चाहिए।
एआई को लेकर चीन का क्या रुख?
एआई के क्षेत्र में, चीन ने इसे एक राष्ट्रीय रणनीतिक प्राथमिकता बना लिया है, जिसका लक्ष्य अनुसंधान, कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे, सेमीकंडक्टर विकास और प्रतिभा संवर्धन में सरकार के भारी निवेश के साथ दुनिया का अग्रणी एआई नवाचार केंद्र बनना है।
इसके अलावा, पिछले एक दशक में इलेक्ट्रिक वाहनों के उद्योग में नाटकीय रूप से विस्तार होने के कारण चीन दुनिया का सबसे बड़ा इलेक्ट्रिक वाहन उत्पादक और निर्यातक बनकर उभरा है। विश्लेषकों का कहना है कि एआई, इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी प्रौद्योगिकी में चीन की प्रगति का उद्देश्य विनिर्माण केंद्र से हटकर एक प्रमुख तकनीकी नवप्रवर्तक बनना है। भले ही उसे अमेरिका, यूरोपीय संघ, दक्षिण कोरिया और जापान से कड़ी प्रतिस्पर्धा का सामना करना पड़ रहा हो, साथ ही उन्नत एआई चिप्स पर अमेरिकी निर्यात नियंत्रण भी लागू हो।