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Hindi News ›   World ›   Trump's major decision Those aiding terrorists will be denied entry to the US; visa rules further tightened.

ट्रंप का बड़ा फैसला: आतंकियों की मदद करने वालों को अमेरिका में नहीं मिलेगी एंट्री, वीजा नियम किए और सख्त

Fri, 17 Jul 2026 09:18 AM IST
अस्मिता त्रिपाठी आईएएनएस, नई दिल्ली
आईएएनएस, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Fri, 17 Jul 2026 09:18 AM IST
सार

ट्रंप प्रशासन ने आतंकवादी गतिविधियों, हिंसक अपराधों या प्रशासन की ओर से आतंकवादी घोषित वामपंथी संगठनों को समर्थन, फंडिंग, भर्ती या लॉजिस्टिक सहायता देने वाले विदेशी नागरिकों पर नए वीजा प्रतिबंध लागू किए हैं। विदेश सचिव मार्को रुबियो ने कहा कि इसका उद्देश्य अमेरिकी सुरक्षा मजबूत करना और आतंकवादी नेटवर्कों की फंडिंग, गतिविधियों  रोक लगाना है।

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Trump's major decision Those aiding terrorists will be denied entry to the US; visa rules further tightened.
डोनाल्ड ट्रंप, अमेरिकी राष्ट्रपति - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

ट्रंप प्रशासन ने अपनी आव्रजन नीति को और सख्त करने का फैसला लिया है। इसके साथ ही  विदेशी नागरिकों के खिलाफ नई वीजा प्रतिबंध नीति की घोषणा की है, जिन पर प्रशासन की ओर से वामपंथी आतंकवादी संगठनों या उनसे जुड़े समूहों का समर्थन करने का आरोप है। 

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क्या है ट्रंंप प्रशासन की नई नीति? 
अमेरिकी विदेश विभाग के एक बयान के अनुसार, नई नीति के तहत उन विदेशी नागरिकों के अमेरिका में प्रवेश पर रोक लगाई जाएगी, जिन्होंने आतंकवादी गतिविधियों का समर्थन या उन्हें उकसाया हो, हिंसक आपराधिक गतिविधियों का समर्थन किया हो। इसके साथ ही प्रशासन की ओर से वामपंथी आतंकवादी करार दिए गए समूहों और उनसे जुड़े संगठनों के लिए वित्तपोषण, भर्ती या लॉजिस्टिक सहायता उपलब्ध कराई हो। इसके अलावा हिंसक गतिविधियों के उद्देश्य से ऐसे नेटवर्कों के समन्वय में सहायता करने वालों को भी इस दायरे में रखा जाएगा।
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इस कदम का उद्देश्य क्या है? 
रुबियो ने कहा कि इस कदम का उद्देश्य अमेरिका की सुरक्षा सुनिश्चित करना है। उन्होंने कहा कि आतंकवादी, हिंसक और आपराधिक वामपंथी नेटवर्कों को वित्तपोषण, भर्ती, उकसाने या अन्य प्रकार की सहायता देने वाले विदेशी नागरिकों को अमेरिका में प्रवेश की अनुमति नहीं दी जाएगी।
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कार्रवाई किस धारा के तहत की जाएगी?
उन्होंने कहा कि इस नीति से उन वीजा मार्गों को बंद किया जा सकेगा, जिनका इस्तेमाल ऐसे संगठन अमेरिकी नागरिकों की सुरक्षा को खतरे में डालने, आर्थिक स्थिरता को कमजोर करने और अमेरिकी भूमि पर हिंसक गतिविधियों के समन्वय के लिए कर सकते हैं। यह कार्रवाई इमिग्रेशन एंड नेशनलिटी एक्ट की धारा 212(ए)(3)(सी) के तहत की जा रही है।

किस मुद्दे पर मंत्रीस्तरीय बैठक हो रही है?
वीजा प्रतिबंधों की घोषणा ऐसे समय हुई, जब अमेरिकी विदेश विभाग ने राजनीतिक आतंकवाद के दोबारा उभरने के मुद्दे पर मंत्रीस्तरीय बैठक आयोजित की। इसमें पश्चिम गोलार्ध, यूरोप और एशिया की सरकारें एक साथ आईं ताकि कोऑर्डिनेशन बढ़ाया जा सके, जानकारी साझा करने के तरीकों को मजबूत किया जा सके और सरकार के मुताबिक बढ़ते हुए सीमा-पार के खतरे के खिलाफ अंतरराष्ट्रीय कानून प्रवर्तन सहयोग को बढ़ाया जा सके।

मार्को रुबियो ने क्या कहा? 
सम्मेलन का उद्घाटन करते हुए मार्को रुबियो ने कहा कि अपने नागरिकों की सुरक्षा सुनिश्चित करना हर सरकार की सर्वोच्च जिम्मेदारी है। उन्होंने जोर देकर कहा कि आतंकवाद-रोधी रणनीति को अब उस खतरे पर भी केंद्रित होना चाहिए, जिसे उन्होंने चरमपंथी वामपंथ से प्रेरित राजनीतिक हिंसा के दोबारा उभरने के रूप में वर्णित किया।

रुबियो ने किस कमी की जिक्र किया? 
रुबियो ने कहा, 'लंबे समय तक हमारी आतंकवाद-रोधी रणनीति में एक बड़ी कमी रही है, क्योंकि राजनीतिक वामपंथ से प्रेरित कट्टर हिंसा पर पर्याप्त ध्यान नहीं दिया गया। हमें इस खतरे को पहचानना होगा और इससे निपटने के लिए अपने आतंकवाद-रोधी ढांचे को मजबूत करना होगा।'

उन्होंने आगे कहा कि अमेरिका ने पहले ही चार हिंसक कट्टर वामपंथी समूहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित कर दिया है। उनकी फंडिंग में रुकावट डालने वाली जानकारी के लिए 10 मिलियन डॉलर तक के रिवॉर्ड्स फॉर जस्टिस ऑफर की घोषणा की है। जल्द ही और भी नाम घोषित किए जाएंगे। वाशिंगटन साझेदार सरकारों के साथ इंटेलिजेंस शेयरिंग, कानून प्रवर्तन सहयोग और सीमा-पार चरमपंथी नेटवर्क में फंडिंग की रुकावट को मजबूत करने के लिए काम कर रहा है।'


प्रेस सचिव ने क्या कहा? 
वहीं, गुरुवार को व्हाइट हाउस की दौनिक ब्रीफिंग के दौरान प्रेस सचिव कैरोलिन लीविट ने कहा कि ईरान ने वाणिज्यिक जहाजों पर गोलीबारी करके समझौता के एक प्रमुख प्रवाधान का उल्लंघन किया है।जिसके कारण प्रशासन को सैन्य कार्रवाई करनी पड़ी।  लीविट ने आगे कहा 'मैंने अभी एक घंटे पहले ही इस बारे में राष्ट्रपति से बात की है। ईरान लगातार संयुक्त राज्य अमेरिका से बातचीत कर रहा है। यह व्यक्त कर रहा है कि वे हमारे साथ समझौता करना चाहते हैं, क्योंकि उन्हें अमेरिकी सेना की ओर से भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है।'

 

 

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