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Explainer: क्या एआई पर होगा संयुक्त राष्ट्र का नियंत्रण, UN ने क्यों बनाया 'AI फॉर गुड' आयोग, कैसे करेगा काम?
Thu, 02 Jul 2026 05:34 AM IST
कीर्तिवर्धन मिश्र
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
स्पेशल डेस्क, अमर उजाला
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Thu, 02 Jul 2026 05:34 AM IST
सार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब एक ढांचे में लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की तरफ से पहल की गई है। इसके लिए एक आयोग के गठन की भी तैयारी है, जिसमें दुनियाभर के शीर्ष टेक-दिग्गज और नेतृत्वकर्ताओं को शामिल किए जाने की योजना है।
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एआई फॉर ग्लोबल गुड।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) का दुनिया में प्रसार तेजी से बढ़ रहा है। खासकर 2020 के बाद से एक के बाद एक देशों ने एआई को तेजी से अपनाना जारी रखा है। हालांकि, इस पूरे दौर में अब तक एआई के इस्तेमाल को लेकर कोई केंद्रीकृत ढांचा नहीं बन पाया है। मौजूदा समय में अलग-अलग देश इस व्यवस्था को अपने हिसाब से इस्तेमाल कर रहे हैं। इसका नतीजा यह हुआ है कि जहां अमेरिका और चीन जैसे देश इस वक्त एआई के क्षेत्र में काफी आगे निकल चुके हैं। वहीं, मध्य आय और निचली आय वाले देशों में एआई की पहुंच या तो सीमित है या बहुत धीमी है। साथ ही इसके इस्तेमाल का तरीका कुछ देशों में बेरोकटोक और अत्याधुनिक स्तर पर पहुंच चुका है, जबकि कुछ देशों में अभी आधारभूत स्तर पर भी नहीं पहुंचा है।
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इस बीच आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस को अब एक ढांचे में लाने के लिए संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की तरफ से पहल की गई है। अमेरिकी मीडिया ग्रुप- एक्सिओस की एक रिपोर्ट के मुताबिक, यूएन की तरफ से अब एआई के लिए वैश्विक स्तर पर नियम बनाने की पैरवी की गई है। इसके लिए एक आयोग के गठन की भी तैयारी है, जिसमें दुनियाभर के शीर्ष टेक-दिग्गज और नेतृत्वकर्ताओं को शामिल किए जाने की योजना है। मजेदार बात यह है कि यूएन की ओर से इस आयोग के गठन की बात ऐसे समय में सामने आई है, जब इसकी एक हालिया रिपोर्ट में एआई के वैश्विक खतरों को लेकर चेतावनी जारी की गई कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस दुनिया में गैरबराबरी को और बढ़ावा दे रहा है।
ऐसे में यह जानना अहम है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक प्रभाव को लेकर क्या रिपोर्ट जारी की है? एआई के प्रभावों और नियमों को केंद्रित करने के लिए अब क्या कदम उठाया गया है और यह कितना अहम है? जिस आयोग को बनाए जाने की चर्चा है, उसके सदस्य के लिए कौन-कौन प्रस्तावित है? इसका मकसद क्या होगा? आइये जानते हैं...
ऐसे में यह जानना अहम है कि हाल ही में संयुक्त राष्ट्र ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के वैश्विक प्रभाव को लेकर क्या रिपोर्ट जारी की है? एआई के प्रभावों और नियमों को केंद्रित करने के लिए अब क्या कदम उठाया गया है और यह कितना अहम है? जिस आयोग को बनाए जाने की चर्चा है, उसके सदस्य के लिए कौन-कौन प्रस्तावित है? इसका मकसद क्या होगा? आइये जानते हैं...
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दुनिया पर एआई के प्रभाव पर यूएन की हालिया रिपोर्ट क्या?
एआई पर संयुक्त राष्ट्र (यूएन) की हालिया रिपोर्ट एक स्वतंत्र अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक पैनल द्वारा तैयार की गई है, जो एआई के जोखिमों और मौतों का विश्लेषण किया गया है।1. वैश्विक असमानता में हो सकती है बढ़ोतरी
रिपोर्ट स्पष्ट चेतावनी देती है कि एआई का तेजी से प्रसार वैश्विक असमानता को और खराब कर सकता है। यूं तो एक अरब से ज्यादा लोग हर हफ्ते एआई का उपयोग कर रहे हैं, लेकिन 'ग्लोबल साउथ' (विकासशील देश) एआई अपनाने में 'ग्लोबल नॉर्थ' (विकसित देशों) की तुलना में बहुत पीछे हैं। केवल विदेशी मॉडलों, क्लाउड इंफ्रास्ट्रक्चर और डेटा पाइपलाइन पर निर्भर रहने वाले देश इसके मानकों और सुरक्षा उपायों पर अपना नियंत्रण खो सकते हैं।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस।
- फोटो : अमर उजाला
2. कुछ देशों और कंपनियों का दबदबा
अमेरिका और चीन अग्रणी एआई मॉडल और कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के विकास में हावी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि एआई क्षमताएं कुछ ही कंपनियों और देशों तक सीमित रहती हैं, तो यह सत्तावादी नियंत्रण को बढ़ावा दे सकता है और लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर कर सकता है।
3. भाषाई और डिजिटल स्तर पर बंटवारा
जेनरेटिव एआई टूल अंग्रेजी जैसी भाषाओं में अच्छा काम करते हैं, लेकिन ज्यादातर अन्य भाषाओं में इनका प्रदर्शन काफी खराब है या वे इसमें शामिल ही नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवा में इसके जीवन-घातक परिणाम हो सकते हैं; उदाहरण के लिए, एक मशीन ट्रांसलेशन द्वारा 'चेचक' को 'सिफलिस' और 'नसों में दिए जाने वाले एंटीबायोटिक्स' को 'नसों में दिए जाने वाले कीटनाशक' के रूप में अनुवाद कर दिया गया था। इसके अलावा, दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी (दो अरब से अधिक लोग) आज भी इंटरनेट से पूरी तरह से वंचित है।
अमेरिका और चीन अग्रणी एआई मॉडल और कंप्यूटिंग बुनियादी ढांचे के विकास में हावी हैं। रिपोर्ट के अनुसार, यदि एआई क्षमताएं कुछ ही कंपनियों और देशों तक सीमित रहती हैं, तो यह सत्तावादी नियंत्रण को बढ़ावा दे सकता है और लोकतांत्रिक जवाबदेही को कमजोर कर सकता है।
3. भाषाई और डिजिटल स्तर पर बंटवारा
जेनरेटिव एआई टूल अंग्रेजी जैसी भाषाओं में अच्छा काम करते हैं, लेकिन ज्यादातर अन्य भाषाओं में इनका प्रदर्शन काफी खराब है या वे इसमें शामिल ही नहीं हैं। स्वास्थ्य सेवा में इसके जीवन-घातक परिणाम हो सकते हैं; उदाहरण के लिए, एक मशीन ट्रांसलेशन द्वारा 'चेचक' को 'सिफलिस' और 'नसों में दिए जाने वाले एंटीबायोटिक्स' को 'नसों में दिए जाने वाले कीटनाशक' के रूप में अनुवाद कर दिया गया था। इसके अलावा, दुनिया की लगभग एक तिहाई आबादी (दो अरब से अधिक लोग) आज भी इंटरनेट से पूरी तरह से वंचित है।
तकनीकी विशेषज्ञता की कमी
दुनिया के अधिकतर देशों, जिनमें कई उन्नत अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, के पास सबसे शक्तिशाली फ्रंटियर एआई मॉडलों का आकलन करने और उनकी गवर्नेंस में सार्थक रूप से भाग लेने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की भारी कमी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन, अमेरिका और कुछ चुनिंदा उच्च आय वाले देशों को छोड़ दिया जाए तो यह समस्या लगभग हर देश में बराबर बनी हुई है।
दुनिया के अधिकतर देशों, जिनमें कई उन्नत अर्थव्यवस्थाएं भी शामिल हैं, के पास सबसे शक्तिशाली फ्रंटियर एआई मॉडलों का आकलन करने और उनकी गवर्नेंस में सार्थक रूप से भाग लेने के लिए तकनीकी विशेषज्ञता की भारी कमी है। रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर चीन, अमेरिका और कुछ चुनिंदा उच्च आय वाले देशों को छोड़ दिया जाए तो यह समस्या लगभग हर देश में बराबर बनी हुई है।
एआई के प्रभावों और नियमों को केंद्रित करने के लिए अब किस कदम की चर्चा?
एआई के प्रभावों को नियंत्रित करने और इसके लिए वैश्विक नियम बनाने के लिए हाल ही में संयुक्त राष्ट्र और अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (आईटीयू) की एआई फॉर गुड ग्लोबल कमीशन शुरू करने की चर्चा की गई है। यह आयोग न सिर्फ एआई के इस्तेमाल के लिए साझा वैश्विक नियम तय करेगा, बल्कि एआई के विकास कार्यक्रमों और इसकी पहुंच को भी सुनिश्चित कराने का काम करेगा।कैसे काम करेगा एआई के लिए बनाया यूएन का आयोग?
1. टेक दिग्गज और वैश्विक नेतृत्व को साथ लाएगा आयोग
यह आयोग उन सभी प्रमुख लोगों को एक साथ लाएगा जो एआई का निर्माण करते हैं, उसे लागू करते हैं, नीतियां बनाते हैं और समुदायों का प्रतिनिधित्व करते हैं।
नेतृत्व: इसकी सह-अध्यक्षता सेल्सफोर्स के सीईओ मार्क बेनिओफ और रवांडा के राष्ट्रपति पॉल कागामे कर रहे हैं।
सदस्य: इसमें अमेजन, एंथ्रोपिक, कोहेयर, माइक्रोसॉफ्ट और एनवीडिया जैसी दिग्गज टेक कंपनियों के शीर्ष अधिकारी, जैसे- एंडी जेसी, ब्रैड स्मिथ, जेन्सेन हुआंग, आदि) शामिल होंगे। इनके साथ एस्टोनिया के राष्ट्रपति और कजाखस्तान, नामीबिया, सऊदी अरब, सिंगापुर और नाइजीरिया जैसे देशों के एआई और तकनीकी नीति-निर्माता भी मिलकर काम करेंगे।
2. एआई के प्रसार और सुरक्षित इस्तेमाल पर जोर
एआई फॉर ग्लोबल गुड।
- फोटो : अमर उजाला
3. एआई विनियमन के नियमों पर नजर रखना
आयोग के काम करने के तरीके में कई बड़ी बाधाएं भी होंगी। दुनिया भर की सरकारें एआई को विनियमित करने के तरीके पर काफी अलग-अलग विचार रखती हैं। इस समूह के लिए सबसे बड़ी चुनौती अलग-अलग देशों की राजनीति और उनकी डिजिटल संप्रभुता की मांगों से ऊपर उठकर एकजुट और ठोस लक्ष्य निर्धारित करना होगा। जिम्मेदार एआई के जिन समाधानों पर जिनेवा (यूएन) में सहमति बन सकती है, उन्हें अलग-अलग नियमों वाले देशों और व्यक्तिगत टेक कंपनियों में व्यावहारिक रूप से लागू करना काफी कठिन हो सकता है।
क्या होगी इस आयोग की आगे की राह?
1. पहली अहम बैठक और शुरुआत: आयोग का पहला प्रमुख कदम 8 जुलाई को जिनेवा (स्विट्जरलैंड) में होने वाली इसकी पहली बैठक है। यह बैठक आईटीयू के एआई फॉर गुड ग्लोबल समिट के दौरान आयोजित की जाएगी, जो यूएन के ग्लोबल डायलॉग ऑन एआई गवर्नेंस (6 और 7 जुलाई) के ठीक बाद होगी।
2. मुख्य फोकस क्षेत्र: सेल्सफोर्स के सीईओ और आयोग के सह-अध्यक्ष मार्क बेनिओफ के अनुसार, इस उद्घाटन बैठक में समूह मुख्य रूप से एआई के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने पर बात करेगा। इसके अलावा स्वास्थ्य, शिक्षा, खाद्य सुरक्षा और आपदा प्रतिक्रिया में एआई के सकारात्मक प्रभावों को गति देने पर जोर दिया जाएगा। इसके अलावा तकनीक में विश्वास और सुरक्षा सुनिश्चित करने पर भी चर्चा होगी। बेनिओफ ने इस बात पर जोर दिया है कि एआई के विकास के हर कदम पर जिम्मेदारी और नैतिकता केंद्र में होनी चाहिए।
3. सफलता की सबसे बड़ी उम्मीद: रिपोर्ट के अनुसार, इस आयोग को सबसे अधिक सफलता अपने उस व्यावहारिक लक्ष्य में मिल सकती है जिसके तहत वह दुनिया भर के उन 2.2 अरब लोगों तक एआई को पहुंचाना चाहता है जो अभी इंटरनेट की पहुंच से पूरी तरह वंचित हैं।
4. आगे की राह में क्या हैं चुनौतियां: आयोग के लिए नियम बनाना और उन्हें लागू करवाना आसान नहीं होगा। दुनिया भर की सरकारें एआई को विनियमित करने के तरीकों पर एक-दूसरे से काफी अलग विचार रखती हैं। विभिन्न देशों की राजनीति और उनकी डिजिटल संप्रभुता की मांगों से ऊपर उठकर एकजुट और ठोस लक्ष्य निर्धारित करना इस समूह के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
जिनेवा में जिम्मेदार एआई समाधानों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बनाना तो आसान हो सकता है, लेकिन अलग-अलग एआई नियमों वाले देशों और व्यक्तिगत टेक कंपनियों के कामकाज में उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करना बहुत मुश्किल हो सकता है।
4. आगे की राह में क्या हैं चुनौतियां: आयोग के लिए नियम बनाना और उन्हें लागू करवाना आसान नहीं होगा। दुनिया भर की सरकारें एआई को विनियमित करने के तरीकों पर एक-दूसरे से काफी अलग विचार रखती हैं। विभिन्न देशों की राजनीति और उनकी डिजिटल संप्रभुता की मांगों से ऊपर उठकर एकजुट और ठोस लक्ष्य निर्धारित करना इस समूह के लिए एक बड़ी चुनौती होगी।
जिनेवा में जिम्मेदार एआई समाधानों पर सैद्धांतिक रूप से सहमति बनाना तो आसान हो सकता है, लेकिन अलग-अलग एआई नियमों वाले देशों और व्यक्तिगत टेक कंपनियों के कामकाज में उन्हें व्यावहारिक रूप से लागू करना बहुत मुश्किल हो सकता है।