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Exclusive: बलूच क्रांति के चेहरे ने बताया पाकिस्तानी अत्याचार का सच, बोले- विकास नहीं लूट का रास्ता है CPEC
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सार
अमर उजाला ने अब बलूच क्रांति के अहम चेहरे के तौर पर उभरे मीर यार बलूच से बात की है। इस साक्षात्कार में मीर यार ने न सिर्फ पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की मांग और इससे जुड़े कदमों का जिक्र किया, साथ ही इसमें वैश्विक भूमिका की भी बात कही। पढ़ें मीर यार बलूच से साक्षात्कार के प्रमुख अंश...
मीर यार बलूच से एक्सक्लूसिव बातचीत।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
पाकिस्तान में इस वक्त उथल-पुथल मची हुई है। वजह है उसके एक प्रांत में उठे बगावत के सुर, जिसे दबाने की साजिश अब रावलपिंडी स्थित सैन्य मुख्यालय में जारी है। जिस प्रांत में यह बगावत के सुर उठे हैं, उस प्रांत का नाम है बलूचिस्तान। यहां पाकिस्तानी सेना और उसकी खुफिया एजेंसी आईएसआई के मानवाधिकार उल्लंघनों के खिलाफ बलूच विद्रोही लगातार जवाब दे रहे हैं। हाल ही में बलूचों की आवाज बनकर उभरे कार्यकर्ता और लेखक मीर यार बलूच ने एलान किया था कि बलूचिस्तान अब पाकिस्तान का हिस्सा नहीं है। उन्होंने बलूचिस्तान को अलग गणराज्य बनाने का भी एलान किया था। इस बीच बलूच लिबरेशन आर्मी ने पाकिस्तानी सेना पर हमले जारी रखे हैं और अब महिला फिदाइनों को भी अपने संघर्ष में उतार दिया है।
अमर उजाला ने अब बलूच क्रांति के अहम चेहरे के तौर पर उभरे मीर यार बलूच से बात की है। इस साक्षात्कार में मीर यार ने न सिर्फ पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की मांग और इससे जुड़े कदमों का जिक्र किया, साथ ही इसमें वैश्विक भूमिका की भी बात कही। इसके साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए भारत की भूमिका पर जोर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खास संदेश जारी किया। पढ़ें मीर यार बलूच से साक्षात्कार के प्रमुख अंश...
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अमर उजाला ने अब बलूच क्रांति के अहम चेहरे के तौर पर उभरे मीर यार बलूच से बात की है। इस साक्षात्कार में मीर यार ने न सिर्फ पाकिस्तान से बलूचिस्तान की आजादी की मांग और इससे जुड़े कदमों का जिक्र किया, साथ ही इसमें वैश्विक भूमिका की भी बात कही। इसके साथ ही उन्होंने बलूचिस्तान की स्वतंत्रता के लिए भारत की भूमिका पर जोर दिया और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम एक खास संदेश जारी किया। पढ़ें मीर यार बलूच से साक्षात्कार के प्रमुख अंश...
सवाल: आप लंबे समय से बलूचिस्तान की स्थिति के बारे में आवाज उठा रहे हैं। आज वहां की जमीनी हकीकत का आप कैसे वर्णन करेंगे?
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान गणराज्य में, पाकिस्तानी सेना निश्चित रूप से जमीन पर मौजूद है, जो अपने रक्षा और सैन्य बजट को उत्पन्न करने के लिए शोषणकारी परियोजनाओं की रक्षा कर रही है। लेकिन लोगों के दिलों और दिमागों में बलूच सुरक्षाबलों और रक्षाबलों का दबदबा है जो बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले अठहत्तर वर्षों से, पाकिस्तान अपने खरीदे हुए मीडिया, धार्मिक चरमपंथी दलों और सैन्य मीडिया आउटलेट्स की मदद से झूठ और मनगढ़ंत बातों से दुनिया को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह 1970 के दशक में जनरल अयूब खान और जुल्फिकार अली भुट्टो ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने की कोशिश की थी, उसका परिणाम बांग्लादेश की आजादी के रूप में निकला। बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश है; 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। बलूच लोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों, युद्ध की नैतिकता और कूटनीतिक प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए अपनी मातृभूमि का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि पाकिस्तान के एकतरफा झूठे विमर्श को खारिज कर दिया जाए और वास्तविक बलूच प्रतिनिधियों की बात स्वीकार की जाए, तो बलूचिस्तान पहले ही पाकिस्तान के कब्जे से निकल चुका है।
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान गणराज्य में, पाकिस्तानी सेना निश्चित रूप से जमीन पर मौजूद है, जो अपने रक्षा और सैन्य बजट को उत्पन्न करने के लिए शोषणकारी परियोजनाओं की रक्षा कर रही है। लेकिन लोगों के दिलों और दिमागों में बलूच सुरक्षाबलों और रक्षाबलों का दबदबा है जो बलूचिस्तान की आजादी के लिए संघर्ष कर रहे हैं। पिछले अठहत्तर वर्षों से, पाकिस्तान अपने खरीदे हुए मीडिया, धार्मिक चरमपंथी दलों और सैन्य मीडिया आउटलेट्स की मदद से झूठ और मनगढ़ंत बातों से दुनिया को मूर्ख बनाने की कोशिश कर रहा है। जिस तरह 1970 के दशक में जनरल अयूब खान और जुल्फिकार अली भुट्टो ने बांग्लादेश के स्वतंत्रता आंदोलन को दबाने की कोशिश की थी, उसका परिणाम बांग्लादेश की आजादी के रूप में निकला। बलूचिस्तान एक स्वतंत्र देश है; 11 अगस्त 1947 को बलूचिस्तान ने अपनी स्वतंत्रता की घोषणा की थी। बलूच लोग अंतरराष्ट्रीय कानूनों, युद्ध की नैतिकता और कूटनीतिक प्रोटोकॉल को ध्यान में रखते हुए अपनी मातृभूमि का नियंत्रण अपने हाथों में लेने के लिए संघर्ष कर रहे हैं। यदि पाकिस्तान के एकतरफा झूठे विमर्श को खारिज कर दिया जाए और वास्तविक बलूच प्रतिनिधियों की बात स्वीकार की जाए, तो बलूचिस्तान पहले ही पाकिस्तान के कब्जे से निकल चुका है।
सवाल: आपके विचार में बलूच लोगों के अधिकार क्यों और कैसे छीन लिए गए हैं?
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। यह साहस हमें बलूच माताओं और बहनों के सर्वोच्च बलिदानों से मिलता है, जो दिन-रात पाकिस्तान की हमलावर बाहरी ताकतों के टैंकों, जेट विमानों और बमबारी का बहादुरी से सामना कर रही हैं और बलूच मातृभूमि की मुक्ति की अपनी मांग से एक इंच भी पीछे नहीं हट रही हैं। हम अपनी क्षमता के अनुसार दुनिया को बलूचिस्तान की जमीनी स्थिति के बारे में सूचित कर रहे हैं। हमारी 6 करोड़ की आबादी के पास बलूची भाषा में एक भी टीवी चैनल, रेडियो स्टेशन या राष्ट्रीय समाचार पत्र नहीं है। हमारे पास मंत्रालय और प्रसारण सेवाएं चलाने के लिए सक्षम जनशक्ति है, लेकिन पाकिस्तान नहीं चाहता कि बलूच आवाज दुनिया तक पहुंचे। पाकिस्तान के दमन और मीडिया ब्लैकआउट के बावजूद, बलूचिस्तान के लिए टीवी चैनल, रेडियो और समाचार पत्र शुरू करने के हमारे प्रयास जारी हैं।
ये भी पढ़ें: Mir Yar Baloch Exclusive: बलूच नेता बोले-अपनी हकीकत पर हम खुद बनाएंगे फिल्म, धुरंधर में नहीं दिखी हमारी सच्चाई
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान के लिए कानूनी लड़ाई लड़ना हमारा राष्ट्रीय कर्तव्य है। यह साहस हमें बलूच माताओं और बहनों के सर्वोच्च बलिदानों से मिलता है, जो दिन-रात पाकिस्तान की हमलावर बाहरी ताकतों के टैंकों, जेट विमानों और बमबारी का बहादुरी से सामना कर रही हैं और बलूच मातृभूमि की मुक्ति की अपनी मांग से एक इंच भी पीछे नहीं हट रही हैं। हम अपनी क्षमता के अनुसार दुनिया को बलूचिस्तान की जमीनी स्थिति के बारे में सूचित कर रहे हैं। हमारी 6 करोड़ की आबादी के पास बलूची भाषा में एक भी टीवी चैनल, रेडियो स्टेशन या राष्ट्रीय समाचार पत्र नहीं है। हमारे पास मंत्रालय और प्रसारण सेवाएं चलाने के लिए सक्षम जनशक्ति है, लेकिन पाकिस्तान नहीं चाहता कि बलूच आवाज दुनिया तक पहुंचे। पाकिस्तान के दमन और मीडिया ब्लैकआउट के बावजूद, बलूचिस्तान के लिए टीवी चैनल, रेडियो और समाचार पत्र शुरू करने के हमारे प्रयास जारी हैं।
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सवाल: पाकिस्तान CPEC को एक प्रमुख विकास पहल के रूप में पेश करता है। आपके अनुसार, इससे बलूच नागरिकों और बलूचिस्तान को क्या नुकसान हुआ है?
मीर यार बलूच: पहला सवाल तो यह है कि बलूच लोगों को विकास देने वाला पाकिस्तान कौन होता है? क्या मानव इतिहास में कभी किसी कब्जा करने वाली ताकत ने कब्जे वाले राष्ट्र को विकास दिया है? जब ब्रिटेन भारत और बलूचिस्तान आया था, तो उन्होंने भी रेलवे, बुनियादी ढांचा और छावनियां बनाई थीं; इसका मतलब यह नहीं था कि वे विकास चाहते थे, वे संसाधनों को लूटना चाहते थे। इसी तरह, यदि पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर बलूचिस्तान में सड़कें और रेलवे बना रहा है, तो इसका मतलब विकास नहीं है। वे बलूचिस्तान को लूटना चाहते हैं और जनसांख्यिकी (demographics) बदलकर हमें अपने ही घर में अल्पसंख्यक बनाना चाहते हैं। पाकिस्तान ने 1952 में बलूचिस्तान में प्राकृतिक गैस की खोज की थी। उनके अपने अर्थशास्त्री श्री कैसर बंगाली ने बताया था कि 70 और 80 के दशक में पंजाब (पाकिस्तान) में लोग गैस के चूल्हे 24 घंटे जलते छोड़ देते थे ताकि माचिस की तीली बर्बाद न हो। यानी उनके लिए एक तीली कीमती थी, लेकिन बलूचिस्तान की गैस की कोई कीमत नहीं थी। दुख की बात है कि डेरा बुगती और सुई जैसे इलाकों में बलूच आबादी आज भी खाना पकाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करती है। हमारी महिलाएं 40 साल की उम्र तक अंधी हो रही हैं क्योंकि उन्हें जहरीला प्लास्टिक जलाना पड़ता है, जबकि यही गैस 800 किलोमीटर दूर पंजाब और कराची के उद्योगों को चलाती है।
मीर यार बलूच: पहला सवाल तो यह है कि बलूच लोगों को विकास देने वाला पाकिस्तान कौन होता है? क्या मानव इतिहास में कभी किसी कब्जा करने वाली ताकत ने कब्जे वाले राष्ट्र को विकास दिया है? जब ब्रिटेन भारत और बलूचिस्तान आया था, तो उन्होंने भी रेलवे, बुनियादी ढांचा और छावनियां बनाई थीं; इसका मतलब यह नहीं था कि वे विकास चाहते थे, वे संसाधनों को लूटना चाहते थे। इसी तरह, यदि पाकिस्तान चीन के साथ मिलकर बलूचिस्तान में सड़कें और रेलवे बना रहा है, तो इसका मतलब विकास नहीं है। वे बलूचिस्तान को लूटना चाहते हैं और जनसांख्यिकी (demographics) बदलकर हमें अपने ही घर में अल्पसंख्यक बनाना चाहते हैं। पाकिस्तान ने 1952 में बलूचिस्तान में प्राकृतिक गैस की खोज की थी। उनके अपने अर्थशास्त्री श्री कैसर बंगाली ने बताया था कि 70 और 80 के दशक में पंजाब (पाकिस्तान) में लोग गैस के चूल्हे 24 घंटे जलते छोड़ देते थे ताकि माचिस की तीली बर्बाद न हो। यानी उनके लिए एक तीली कीमती थी, लेकिन बलूचिस्तान की गैस की कोई कीमत नहीं थी। दुख की बात है कि डेरा बुगती और सुई जैसे इलाकों में बलूच आबादी आज भी खाना पकाने के लिए लकड़ी इकट्ठा करती है। हमारी महिलाएं 40 साल की उम्र तक अंधी हो रही हैं क्योंकि उन्हें जहरीला प्लास्टिक जलाना पड़ता है, जबकि यही गैस 800 किलोमीटर दूर पंजाब और कराची के उद्योगों को चलाती है।
सवाल: बलूचिस्तान दुर्लभ खनिज संसाधनों से समृद्ध है। वर्तमान में इन संसाधनों पर किसका नियंत्रण है?
मीर यार बलूच: हमारे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि पाकिस्तान पहले ही बलूचिस्तान के संसाधनों को लूट चुका है, जिससे हमारे लोग गरीबी रेखा से नीचे रहने को मजबूर हैं। हमारे बच्चे आज भी नंगे पैर हैं, उनके पास न छत है और न शिक्षा के लिए स्कूल। इसलिए, CPEC जैसी शोषणकारी परियोजना हमारे पुराने जख्मों को और गहरा करेगी, जिसकी हम अनुमति नहीं दे सकते।
मीर यार बलूच: हमारे लोग अच्छी तरह जानते हैं कि पाकिस्तान पहले ही बलूचिस्तान के संसाधनों को लूट चुका है, जिससे हमारे लोग गरीबी रेखा से नीचे रहने को मजबूर हैं। हमारे बच्चे आज भी नंगे पैर हैं, उनके पास न छत है और न शिक्षा के लिए स्कूल। इसलिए, CPEC जैसी शोषणकारी परियोजना हमारे पुराने जख्मों को और गहरा करेगी, जिसकी हम अनुमति नहीं दे सकते।
सवाल: ऐसी खबरें हैं कि पाकिस्तान रणनीतिक खनिजों के संबंध में अमेरिका के साथ बातचीत कर रहा है। क्या इन चर्चाओं में बलूच लोगों को शामिल किया गया है?
मीर यार बलूच: पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर अपने अत्याचारी और आतंकवादी मंसूबों को पूरा करने के लिए चीन के साथ मिलकर बलूच नरसंहार जारी रखा है। बलूच राष्ट्र पाकिस्तान को अपना प्रतिनिधि नहीं बल्कि युद्ध अपराधों में शामिल एक अपराधी मानता है। इसलिए, चाहे अमेरिका हो, यूरोप, कनाडा या खाड़ी देश, उन सभी को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए कि उनका एक-एक डॉलर पाकिस्तानी सेना की बंदूकों में उन गोलियों के लिए इस्तेमाल हो रहा है जो बलूच नरसंहार करती हैं। जो लोग पाकिस्तान के साथ व्यापार कर रहे हैं, वे इस नरसंहार में उसके मूक सहयोगी हैं। यदि कनाडा, चीन और अन्य कंपनियां बलूच राष्ट्र की सहमति के बिना रेको डिक (Reko Diq) और सैंदक (Saindak) में निवेश कर रही हैं, वे पाकिस्तान को मजबूत कर रही हैं। हम भले ही उन देशों पर टैरिफ न लगा सकें, लेकिन हम अपने बचाव के अधिकार का उपयोग करके अपने संसाधनों की लूट को रोकने की क्षमता रखते हैं।
मीर यार बलूच: पाकिस्तान ने बलूचिस्तान पर अपने अत्याचारी और आतंकवादी मंसूबों को पूरा करने के लिए चीन के साथ मिलकर बलूच नरसंहार जारी रखा है। बलूच राष्ट्र पाकिस्तान को अपना प्रतिनिधि नहीं बल्कि युद्ध अपराधों में शामिल एक अपराधी मानता है। इसलिए, चाहे अमेरिका हो, यूरोप, कनाडा या खाड़ी देश, उन सभी को अत्यधिक सावधानी बरतनी चाहिए कि उनका एक-एक डॉलर पाकिस्तानी सेना की बंदूकों में उन गोलियों के लिए इस्तेमाल हो रहा है जो बलूच नरसंहार करती हैं। जो लोग पाकिस्तान के साथ व्यापार कर रहे हैं, वे इस नरसंहार में उसके मूक सहयोगी हैं। यदि कनाडा, चीन और अन्य कंपनियां बलूच राष्ट्र की सहमति के बिना रेको डिक (Reko Diq) और सैंदक (Saindak) में निवेश कर रही हैं, वे पाकिस्तान को मजबूत कर रही हैं। हम भले ही उन देशों पर टैरिफ न लगा सकें, लेकिन हम अपने बचाव के अधिकार का उपयोग करके अपने संसाधनों की लूट को रोकने की क्षमता रखते हैं।
सवाल: आप भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को क्या संदेश देना चाहेंगे? आप भारत की नीतियों को कैसे देखते हैं?
मीर यार बलूच: भारत एक जिम्मेदार देश है और हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है। लेकिन उदाहरण के लिए, यदि चोर आपके घर में घुसकर आपके परिवार को नुकसान पहुंचाते हैं, तो आप पड़ोसियों से सलाह नहीं लेते कि उनसे लड़ना सही है या गलत। आप आत्मरक्षा में निर्णय लेते हैं। इसी तरह, यदि भारत बलूचिस्तान के मामले में हस्तक्षेप करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, क्योंकि बलूचिस्तान कानूनी रूप से पाकिस्तान का हिस्सा है ही नहीं। पाकिस्तान के पास एक भी ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है जो साबित करे कि बलूचिस्तान उसका कानूनी हिस्सा है।
मीर यार बलूच: भारत एक जिम्मेदार देश है और हस्तक्षेप न करने की नीति का पालन करता है। लेकिन उदाहरण के लिए, यदि चोर आपके घर में घुसकर आपके परिवार को नुकसान पहुंचाते हैं, तो आप पड़ोसियों से सलाह नहीं लेते कि उनसे लड़ना सही है या गलत। आप आत्मरक्षा में निर्णय लेते हैं। इसी तरह, यदि भारत बलूचिस्तान के मामले में हस्तक्षेप करता है, तो इसका मतलब यह नहीं है कि वह पाकिस्तान के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप कर रहा है, क्योंकि बलूचिस्तान कानूनी रूप से पाकिस्तान का हिस्सा है ही नहीं। पाकिस्तान के पास एक भी ऐतिहासिक दस्तावेज नहीं है जो साबित करे कि बलूचिस्तान उसका कानूनी हिस्सा है।
सवाल: बलूचिस्तान में पाकिस्तान की खुफिया एजेंसियों, विशेष रूप से ISI की भूमिका कितनी गहरी है?
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान में कोई राजनीतिक सरकार या व्यवस्था नहीं चल रही है; पहले दिन से ही पाकिस्तान की सेना और ISI बंदूक की नोक पर शासन कर रही है। वहां विधानसभा और लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। बलूचिस्तान में सेना और ISI चुनाव के दौरान सदस्यों का चयन करती हैं; वोटों की कोई भूमिका नहीं है। यही कारण है कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान की व्यवस्था, विधानसभा और संविधान को स्वीकार नहीं करते।
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान में कोई राजनीतिक सरकार या व्यवस्था नहीं चल रही है; पहले दिन से ही पाकिस्तान की सेना और ISI बंदूक की नोक पर शासन कर रही है। वहां विधानसभा और लोकतांत्रिक व्यवस्था केवल दुनिया की आंखों में धूल झोंकने के लिए है। बलूचिस्तान में सेना और ISI चुनाव के दौरान सदस्यों का चयन करती हैं; वोटों की कोई भूमिका नहीं है। यही कारण है कि बलूचिस्तान के लोग पाकिस्तान की व्यवस्था, विधानसभा और संविधान को स्वीकार नहीं करते।
सवाल: ISI द्वारा जल आपूर्ति में जहर मिलाने, न्यायेतर हत्याओं और हिंसा की खबरें आती रहती हैं। आपको क्या लगता है कि ऐसा क्यों हो रहा है?
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान में पाकिस्तान के युद्ध अपराध दैनिक दिनचर्या बन गए हैं। 1970 के दशक में भी हजारों बलूच मारे गए थे। बलूच महिलाओं को पाकिस्तानी सेना द्वारा बंदी बनाया गया और उन्हें पंजाब के बाजारों में नीलाम किया गया। ये घटनाएं मीडिया में रिपोर्ट नहीं होतीं क्योंकि 6 करोड़ की आबादी के पास अपना कोई टीवी चैनल या रेडियो नहीं है। बलूचिस्तान को एक 'ब्लैक होल' बना दिया गया है जहां से खबरें बाहर नहीं निकल पातीं।
सवाल: क्या पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय निगरानी और स्वतंत्र जांच को रोकने की कोशिश कर रहा है?
मीर यार बलूच: पाकिस्तान नहीं चाहता कि दुनिया को पता चले कि पिछले आठ दशकों में उसके द्वारा 2 लाख बलूच मारे जा चुके हैं और 50,000 बलूच सेना के टॉर्चर सेंटरों में कैद हैं। हम मांग करते हैं कि दुनिया अपने प्रतिनिधि बलूचिस्तान भेजे ताकि वे अपनी आंखों से स्थिति देख सके।
मीर यार बलूच: बलूचिस्तान में पाकिस्तान के युद्ध अपराध दैनिक दिनचर्या बन गए हैं। 1970 के दशक में भी हजारों बलूच मारे गए थे। बलूच महिलाओं को पाकिस्तानी सेना द्वारा बंदी बनाया गया और उन्हें पंजाब के बाजारों में नीलाम किया गया। ये घटनाएं मीडिया में रिपोर्ट नहीं होतीं क्योंकि 6 करोड़ की आबादी के पास अपना कोई टीवी चैनल या रेडियो नहीं है। बलूचिस्तान को एक 'ब्लैक होल' बना दिया गया है जहां से खबरें बाहर नहीं निकल पातीं।
सवाल: क्या पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय निगरानी और स्वतंत्र जांच को रोकने की कोशिश कर रहा है?
मीर यार बलूच: पाकिस्तान नहीं चाहता कि दुनिया को पता चले कि पिछले आठ दशकों में उसके द्वारा 2 लाख बलूच मारे जा चुके हैं और 50,000 बलूच सेना के टॉर्चर सेंटरों में कैद हैं। हम मांग करते हैं कि दुनिया अपने प्रतिनिधि बलूचिस्तान भेजे ताकि वे अपनी आंखों से स्थिति देख सके।
सवाल: हाल के वर्षों में बलूच महिलाओं को फिदायीन बनते देखा गया है। यह क्या दर्शाता है?
मीर यार बलूच: बलूच महिलाओं की भूमिका बहुत पुरानी है। गुल बीबी बलूच ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हथियार उठाए थे। करीमा बलूच, डॉ. मेहरंग बलूच और हजारों अन्य महिलाओं ने इस आंदोलन को अनुशासन और मजबूती दी है। महिलाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह पूरे राष्ट्र का कर्तव्य है और वे अपनी मातृभूमि को पाकिस्तान के चंगुल से मुक्त कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। जिन महिलाओं ने स्वतंत्रता के मार्ग पर अपने जीवन का बलिदान दिया है, वे राष्ट्र की नायक हैं और जब तक दुनिया कायम है, उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
मीर यार बलूच: बलूच महिलाओं की भूमिका बहुत पुरानी है। गुल बीबी बलूच ने ब्रिटिश साम्राज्यवाद के खिलाफ हथियार उठाए थे। करीमा बलूच, डॉ. मेहरंग बलूच और हजारों अन्य महिलाओं ने इस आंदोलन को अनुशासन और मजबूती दी है। महिलाओं की भागीदारी यह दर्शाती है कि यह पूरे राष्ट्र का कर्तव्य है और वे अपनी मातृभूमि को पाकिस्तान के चंगुल से मुक्त कराने के लिए किसी भी हद तक जा सकती हैं। जिन महिलाओं ने स्वतंत्रता के मार्ग पर अपने जीवन का बलिदान दिया है, वे राष्ट्र की नायक हैं और जब तक दुनिया कायम है, उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा।
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