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Brain: जन्म से 100 साल तक बदलता रहता है दिमाग, वैज्ञानिकों ने पहली बार समझी ब्रेन कनेक्टिविटी की पूरी यात्रा

अमर उजाला नेटवर्क, नई दिल्ली Published by: Devesh Tripathi Updated Wed, 01 Apr 2026 05:57 AM IST
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सार

शोधकर्ताओं ने 16 दिन के शिशुओं से लेकर 100 वर्ष तक के लोगों के फंक्शनल एमआरआई स्कैन का विश्लेषण किया। इससे यह सामने आया कि मस्तिष्क के ये तीनों अक्ष जीवन के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग तरीके से विकसित होते हैं। उदाहरण के तौर पर सेंसरी-टू-एसोसिएशन अक्ष में बचपन और किशोरावस्था के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है।

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ब्रेन मैपिंग - फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार

मानव मस्तिष्क के काम करने के तरीके को समझने की दिशा में वैज्ञानिकों ने पहली बार एक बड़ी सफलता हासिल की है। करीब 3,556 लोगों के ब्रेन स्कैन का विश्लेषण कर वैज्ञानिकों ने पहली बार ऐसा व्यापक एटलस तैयार किया है, जो जन्म से 100 वर्ष की उम्र तक मस्तिष्क के अलग-अलग हिस्सों के बीच होने वाले तालमेल यानी फंक्शनल कनेक्टिविटी में होने वाले बदलावों को दर्शाता है। नेचर जर्नल में प्रकाशित अध्ययन से यह भी पता चला है कि युवावस्था में मस्तिष्क के कुछ विशेष कनेक्टिविटी पैटर्न सीधे तौर पर स्मृति, प्रोसेसिंग स्पीड और समग्र संज्ञानात्मक क्षमता से जुड़े होते हैं।
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नॉर्थ कैरोलाइना यूनिवर्सिटी के कंप्यूटर वैज्ञानिक पैट्रिक टेलर के अनुसार मस्तिष्क के विभिन्न हिस्सों को उनके कनेक्टिविटी पैटर्न के आधार पर अलग-अलग अक्षों (एक्सेस) पर व्यवस्थित किया जा सकता है। अध्ययन में मस्तिष्क के इन तीन प्रमुख फंक्शनल अक्षों की पहचान की गई है। पहला ‘सेंसरी-टू-एसोसिएशन’ अक्ष जो साधारण संवेदनात्मक जानकारी से जटिल सोच तक के क्षेत्रों को दर्शाता है। दूसरा अक्ष उन हिस्सों से जुड़ा है जो ध्यान, निर्णय और ‘कॉग्निटिव कंट्रोल’ यानी सोच को नियंत्रित करने का काम करते हैं और तीसरा अक्ष मस्तिष्क के उन नेटवर्क से संबंधित है जो भावनात्मक, आंतरिक सोच और ‘मानसिक प्रतिनिधित्व’ (मेंटल रिप्रेजेंटेशन) बनाने में भूमिका निभाते हैं। यानी ये तीनों अक्ष मस्तिष्क के काम को तीन स्तरों में बांटते हैं महसूस करना, सोचना-समझना और उसे नियंत्रित-व्यवस्थित करना।
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19 वर्ष की उम्र में चरम पर पहुंचती है प्रक्रिया
शोधकर्ताओं ने 16 दिन के शिशुओं से लेकर 100 वर्ष तक के लोगों के फंक्शनल एमआरआई स्कैन का विश्लेषण किया। इससे यह सामने आया कि मस्तिष्क के ये तीनों अक्ष जीवन के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग तरीके से विकसित होते हैं। उदाहरण के तौर पर सेंसरी-टू-एसोसिएशन अक्ष में बचपन और किशोरावस्था के बीच के अंतर को स्पष्ट करता है। यह प्रक्रिया लगभग 19 वर्ष की उम्र में अपने चरम पर पहुंचती है। यह बदलाव मस्तिष्क को एक परिपक्व, वयस्क-जैसी संरचना की ओर ले जाता है। वहीं एक अन्य अक्ष, जो संज्ञानात्मक नियंत्रण और मानसिक प्रतिनिधित्व से जुड़ा है, का संबंध शुरुआती मोटर स्किल्स के विकास से पाया गया। इससे संकेत मिलता है कि जीवन के अलग-अलग चरणों में अलग-अलग कनेक्टिविटी पैटर्न अधिक महत्वपूर्ण हो जाते हैं।

न्यूरोलॉजिकल बीमारियां समझने में मिलेगी मदद
शोध से जुड़े यूनिवर्सिटी ऑफ पेंसिल्वेनिया के न्यूरोसाइंटिस्ट जैकब साइडलिट्ज का कहना है कि यह एटलस विकास संबंधी समस्याओं और न्यूरोडीजेनेरेटिव बीमारियों के उभरने के समय को समझने में बेहद उपयोगी साबित हो सकता है। हालांकि, यूनिवर्सिटी ऑफ मिनेसोटा के क्लिनिकल साइकोलॉजिस्ट मैक्सवेल इलियट के अनुसार यह एटलस अभी व्यक्तिगत स्तर पर मस्तिष्क की कनेक्टिविटी को पूरी तरह नहीं समझा जा सकता। उनका मानना है कि भविष्य में किसी व्यक्ति के मस्तिष्क नेटवर्क में समय के साथ होने वाले सटीक बदलावों को ट्रैक करना इस क्षेत्र की बड़ी चुनौती होगी।

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