चीन के नए परमाणु केंद्र में बनीं इमारतें: गुप्त योजनाओं की आशंका, तस्वीरों में दिखी यूरेनियम संवर्धन की मशीनें
क्या चीन चुपचाप अपनी परमाणु ताकत बढ़ा रहा है? भारत से करीब 1400 किमी दूर सिचुआन में ‘साइट-906’ पर तेजी से निर्माण ने चिंता बढ़ा दी है। ताजा सैटेलाइट तस्वीरों में नई इमारतें, रेडिएशन सुरक्षा और भारी मशीनरी नजर आई है। विशेषज्ञों का मानना है कि यहां यूरेनियम और प्लूटोनियम से जुड़ा काम हो सकता है।
विस्तार
एक तरफ दुनिया में कई विकसित देश अपना रक्षा बजट बढ़ाकर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर दबाव बना रहे हैं वहीं चीन लगातार अपने परमाणु हथियार सुविधाएं तेज करने में जुटा है। उसने भारत से करीब 1,400 किमी दूर सिचुआन प्रांत में कुछ गावों को खाली करवाकर एक बड़ी परमाणु सुविधा बनाई है। फरवरी के अंत में उपग्रह चित्रों से इसका खुलासा होने के बाद अब जानकारी मिली है कि यहां पर चीन ने कुछ नई इमारतों का निर्माण भी पूरा कर लिया है।
ताजा उपग्रह चित्रों से पता चला है कि चीन ने अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं का बड़े पैमाने पर विस्तार करने की गुप्त योजनाओं को अमल में लाना शुरू कर दिया है। यहां जिन इमारतों का निर्माण हो चुका है उनमें रेडिएशन मॉनिटर व धमाका रोधी दरवाजे लगे होने तथा यूरेनियम और प्लूटोनियम के लिए मशीनें लगने की आशंकाएं भी जताई जा रही हैं।
उपग्रह तस्वीरों में साइट पर दिख रहे बड़े बड़े ट्रालों में रखीं मशीनों की मौजूदगी से इनके यूरेनियम या प्लूटोनियम होने की आशंका जताई जा रही है। चीन ने इस जगह को साइट-906 नाम दिया है। फरवरी मध्य और मार्च अंत में दिखे उपग्रह चित्र बताते हैं कि इस साइट पर काम उम्मीद से अधिक तेजी से हो रहा है। इसे 3 अन्य एटमी ठिकानों से जोड़ा गया है।
2022 में गांव की जमीनें जब्त कीं
सीएनएन की रिपोर्ट के मुताबिक 2022 में जब इस परमाणु सुविधा के लिए जमीन खाली कराई गई तो कुछ ग्रामीणों ने प्रशासनिक अधिकारियों को पत्र लिखकर पूछा था कि सरकार उनकी जमीन क्यों जब्त कर रही है? इस पर अधिकारियों ने इसे सरकार की गुप्त योजना बताया था। लेकिन चार साल बाद जो उपग्रह चित्र मिले हैं वह बताते हैं कि चीन ने यहां गांव खाली करवाकर बड़ी ही तेजी से परमाणु सुविधाओं के विकास का निर्माण ढांचा तैयार किया है।
सिचुआन प्रांत का दुर्गम-कठिन पहुंच वाला स्थान चुना
चीन का सिचुआन प्रांत अपनी भौगोलिक विविधता के लिए जाना जाता है। पूर्व में उपजाऊ, घनी आबादी वाला सिचुआन बेसिन और पश्चिम में ऊबड़-खाबड़ तिब्बती पठार तथा हेंगडुआन पर्वत मौजूद है। यहां यांग्जी नदी और उसकी सहायक मिन, तुओ और जियालिंग व टोंगजियांग नदियों के किनारे पर यह सुविधा विकसित की गई है। यहां किसी की भी पहुंच आसान नहीं है।
जल्द पूरी तरह काम शुरू होने की स्थिति के संकेत
गांव खाली कराने के 3 वर्ष बाद उपग्रह चित्रों से पता चला कि गांव की जमीन का क्षेत्र समतल किया जा चुका है और करीब 600 इमारतें जमींदोज हो चुकी हैं। इनकी जगह चीन ने एटमी केंद्र के लिए नई इमारतें बनाईं, जिनका 70% काम हो भी चुका है। पिछले एक माह में कई उपकरण लगाए जा रहे हैं। इससे यहां जल्द काम शुरू होने के संकेत मिलते हैं।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.