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फजीहत के बाद बदले पाकिस्तान के सुर: US-ईरान समझौते पर अब किया टिप्पणी से इनकार, तेहरान दिखा चुका है आईना
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, इस्लामाबाद
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 07 Apr 2026 09:57 AM IST
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सार
पाकिस्तान वैश्विक मुस्लिम उम्माह का नेता बनने का कोई मौका नहीं छोड़ता है। अमेरिका-इस्राइल और ईरान के बीच छिड़ी जंग में भी पाकिस्तान ने इसे अपने लिए बड़ा मौका देखकर युद्धविराम कराने के लिए मध्यस्थ बनने का रास्ता चुना। हालांकि, ईरान ने पाकिस्तान की तमाम कोशिशों से किनारा करते हुए उसे आईना दिखा दिया है।
पाकिस्तानी पीएम शहबाज शरीफ
- फोटो : ANI
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विस्तार
पाकिस्तान ने सोमवार को ईरान और अमेरिका के बीच चल रहे युद्ध को खत्म करने के लिए शांति प्रस्ताव की खबरों पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया। हालांकि, विदेश कार्यालय ने कहा कि शांति प्रक्रिया जारी है। विदेश कार्यालय के प्रवक्ता ताहिर अंद्राबी ने कहा, "45 दिवसीय युद्धविराम की पेशकश या 15-सूत्रीय समझौते की कई खबरें आई हैं। हम इन पर टिप्पणी नहीं करते हैं।"
पाकिस्तान का यह बयान रॉयटर्स की एक रिपोर्ट के बाद आया है, जिसमें दावा किया गया था कि ईरान और अमेरिका को पाकिस्तान द्वारा तैयार की गई एक योजना मिली है, जो युद्धविराम करा सकती है। रिपोर्ट में एक सूत्र का हवाला देते हुए कहा गया है कि युद्धविराम की यह रूपरेखा रातोंरात दोनों पक्षों के साथ साझा की गई थी।
ये भी पढ़ें: क्या ईरान से जंग के बीच बौखलाए ट्रंप?: भारत-PAK के बीच सुलह का फिर लिया श्रेय, नई टिप्पणी से बटोरीं सुर्खियां
अमेरिकी रिपोर्ट में मध्यस्थता का दावा
अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने अपनी एक रिपोर्ट में स्रोतों का हवाला देते हुए बताया था कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ एक संभावित 45-दिवसीय युद्धविराम पर चर्चा कर रहे थे। जो युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में दो-चरणीय समझौते का हिस्सा हो सकता है। इसमें पहले युद्धविराम और फिर व्यापक समझौता किए जाने का दावा किया गया था।
ईरान ने खारिज किया प्रस्ताव
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर जवाब देते हुए तेहरान ने युद्धविराम को खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि युद्ध का स्थायी अंत जरूरी है। ईरान के जवाब में 10 सूत्र शामिल थे, जिनमें क्षेत्र में संघर्षों की समाप्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के लिए एक प्रोटोकॉल, प्रतिबंधों को हटाना और पुनर्निर्माण शामिल थे।
पाकिस्तानी प्रस्ताव खारिज होने की क्या थी वजह?
मध्यस्थ बन रहे पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव के जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों के अंजाम देने की धमकी के साथ असंगत है। प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि 15-सूत्रीय योजना जैसी पिछली अमेरिकी मांगों को बहुत ज्यादा होने की वजह से अस्वीकार कर दिया गया था।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान खुद को शांति प्रक्रिया में एक सूत्रधार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अमेरिका के साथ अपने संबंधों और ईरान के साथ अपने कामकाजी संबंधों का लाभ उठा रहा है।
ये भी पढ़ें: US-Iran Tension: क्या ईरान पर ट्रंप की धमकियां बेअसर? IRGC बोली- सेना ने अमेरिकी-इस्राइली ठिकानों पर हमले किए
ट्रंप की ईरान को चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर एक निश्चित समयसीमा के भीतर युद्धविराम नहीं हुआ तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा।
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अमेरिकी रिपोर्ट में मध्यस्थता का दावा
अमेरिकी मीडिया एक्सियोस ने अपनी एक रिपोर्ट में स्रोतों का हवाला देते हुए बताया था कि अमेरिका, ईरान और क्षेत्रीय मध्यस्थ एक संभावित 45-दिवसीय युद्धविराम पर चर्चा कर रहे थे। जो युद्ध को स्थायी रूप से समाप्त करने की दिशा में दो-चरणीय समझौते का हिस्सा हो सकता है। इसमें पहले युद्धविराम और फिर व्यापक समझौता किए जाने का दावा किया गया था।
ईरान ने खारिज किया प्रस्ताव
ईरानी समाचार एजेंसी आईआरएनए के अनुसार मध्यस्थ पाकिस्तान के जरिए अमेरिका द्वारा दिए गए प्रस्ताव पर जवाब देते हुए तेहरान ने युद्धविराम को खारिज कर दिया। ईरान ने कहा कि युद्ध का स्थायी अंत जरूरी है। ईरान के जवाब में 10 सूत्र शामिल थे, जिनमें क्षेत्र में संघर्षों की समाप्ति, होर्मुज जलडमरूमध्य से सुरक्षित आवागमन के लिए एक प्रोटोकॉल, प्रतिबंधों को हटाना और पुनर्निर्माण शामिल थे।
पाकिस्तानी प्रस्ताव खारिज होने की क्या थी वजह?
मध्यस्थ बन रहे पाकिस्तान के युद्धविराम प्रस्ताव के जवाब में ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता ने कहा कि बातचीत अल्टीमेटम और युद्ध अपराधों के अंजाम देने की धमकी के साथ असंगत है। प्रवक्ता इस्माइल बघेई ने कहा कि 15-सूत्रीय योजना जैसी पिछली अमेरिकी मांगों को बहुत ज्यादा होने की वजह से अस्वीकार कर दिया गया था।
पाकिस्तान की भूमिका
पाकिस्तान खुद को शांति प्रक्रिया में एक सूत्रधार के रूप में स्थापित करने की कोशिश कर रहा है। पाकिस्तान इस युद्ध में मध्यस्थ की भूमिका निभाकर अमेरिका के साथ अपने संबंधों और ईरान के साथ अपने कामकाजी संबंधों का लाभ उठा रहा है।
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ट्रंप की ईरान को चेतावनी
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर एक निश्चित समयसीमा के भीतर युद्धविराम नहीं हुआ तो इसके गंभीर नतीजे होंगे। एक सोशल मीडिया पोस्ट में ट्रंप ने ईरान को चेतावनी दी कि अगर तेहरान ने होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से नहीं खोला तो अमेरिका उसके बिजली संयंत्रों और पुलों को निशाना बनाएगा।
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