होर्मुज पर ट्रंप के बदलते बयान: वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल, अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में भी तेजी
होर्मुज जलडमरूमध्य पर राष्ट्रपति ट्रंप के विरोधाभासी बयानों से वैश्विक तेल बाजार में उथल-पुथल मच गई है। एक ओर उन्होंने कहा कि अमेरिका को इस मार्ग की जरूरत नहीं, वहीं चेतावनियों के बीच तेल कीमतें 11% उछलकर 111 डॉलर प्रति बैरल पहुंच गईं। विश्लेषकों के अनुसार, वैश्विक दामों के जरिए इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर भी पड़ रहा है।
विस्तार
होर्मुज जलडमरूमध्य को लेकर अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के विरोधाभासी बयानों ने वैश्विक ऊर्जा बाजार में अस्थिरता बढ़ा दी है। एक ओर ट्रंप ने कहा कि अमेरिका को इस अहम समुद्री मार्ग से तेल की जरूरत नहीं है, वहीं दूसरी ओर इसी मुद्दे पर उनकी कड़ी चेतावनियों के बीच तेल कीमतों में तेज उछाल दर्ज किया गया है। सीएनएन के विश्लेषण के अनुसार भले ही अमेरिका सीधे तौर पर इस जलडमरूमध्य पर कम निर्भर हो, लेकिन वैश्विक कीमतों के जरिए इसका असर अमेरिकी अर्थव्यवस्था पर गहराई से पड़ रहा है।
होर्मुज पर ट्रंप के बयानों के बीच तेल बाजार में भारी उतार-चढ़ाव देखा गया। ट्रंप ने जब कहा कि होर्मुज का अमेरिका के लिए कोई खास महत्व नहीं है उसके तत्काल बाद अमेरिकी कच्चे तेल की कीमतों में 11% से अधिक की तेजी आई और यह 111 डॉलर प्रति बैरल के पार पहुंच गया, जो चार वर्षों का उच्चतम स्तर है। युद्ध शुरू होने से पहले यह कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल से भी कम थी।
अमेरिका करता है 5 लाख बैरल तेल आयात
सीएनएन के विश्लेषक डेविड गोल्डमैन के अनुसार होर्मुज जलडमरूमध्य दुनिया के सबसे महत्वपूर्ण ऊर्जा मार्गों में से एक है, जहां से सामान्यतः वैश्विक तेल आपूर्ति का लगभग 20% गुजरता है। अमेरिका इस मार्ग से प्रतिदिन करीब 5 लाख बैरल तेल आयात करता है, जबकि उसकी कुल खपत लगभग 2 करोड़ बैरल प्रतिदिन है। यानी अमेरिका की प्रत्यक्ष निर्भरता सीमित है और वह वैकल्पिक स्रोतों से इसकी भरपाई कर सकता है लेकिन वैश्विक तेल बाजार से उसका जुड़ाव इसे इस संकट से अलग नहीं रखता।
भारी उत्पादन के बावजूद तेल आयात अमेरिका की मजबूरी
पिछले डेढ़ दशक में हाइड्रोलिक फ्रैकिंग और हॉरिजॉन्टल ड्रिलिंग तकनीकों, खासकर टेक्सास के पर्मियन बेसिन में उत्पादन बढ़ने से अमेरिका ने ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि हासिल की है। आज अमेरिका लगभग 2.2 करोड़ बैरल प्रतिदिन तेल उत्पादन करता है, जो सऊदी अरब से भी अधिक है। इसके बावजूद अमेरिका पूरी तरह आत्मनिर्भर नहीं है। वह अब भी प्रतिदिन 60 लाख बैरल से अधिक कच्चा तेल आयात करता है, जो वेनेजुएला और मध्य पूर्व से आता है यही वजह है कि अमेरिका निर्णायक हमला करने की स्थिति में नहीं आ पा रहा है।
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get latest World News headlines in Hindi related political news, sports news, Business news all breaking news and live updates. Stay updated with us for all latest Hindi news.