बांग्लादेश की पहली महिला स्पीकर गिरफ्तार: कौन हैं शिरीन शर्मिन चौधरी, कैसे जुड़ा 2024 की हिंसा से नाम?
बांग्लादेश की पहली महिला स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी को पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। आइए जानतें हैं कौन है शिरीन शर्मिन चौधरी? किन मामलें में हुई हैं गिरफ्तार
विस्तार
बांग्लादेश की पूर्व स्पीकर शिरीन शर्मिन चौधरी को मंगलवार को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस ने गिरफ्तार कर लिया। यह जानकारी मीडिया रिपोर्टों के अनुसार है। प्रोथोम आलो की रिपोर्ट के अनुसार, चौधरी को ढाका मेट्रोपॉलिटन पुलिस की डिटेक्टिव ब्रांच (डीबी) ने लालबाग पुलिस स्टेशन में जन आंदोलन के दौरान हुई हिंसा और तोड़फोड़ की घटनाओं के संबंध में दर्ज एक मामले में गिरफ्तार किया था।
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आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर मामला दर्ज
एक डीबी सूत्र ने बताया कि वह कई स्थानों पर छिपी हुई थी। रिपोर्ट में आगे कहा गया है कि हाल ही में वह धानमंडी में एक रिश्तेदार के घर पर रह रही थी, जहां से उसे मंगलवार सुबह हिरासत में लिया गया।ढाका ट्रिब्यून की रिपोर्ट के अनुसार, डीएमपी के मीडिया विभाग के उपायुक्त (डीसी) एमएन नासिर उद्दीन ने कहा कि चौधरी से फिलहाल पूछताछ की जा रही है। उन्होंने कहा, “जहां तक हमें पता है, जुलाई आंदोलन के दौरान हुई घटनाओं को लेकर राजधानी के बनानी और उत्तरा पुलिस स्टेशनों में उनके खिलाफ मामले दर्ज किए गए हैं। रंगपुर में भी उनके खिलाफ एक मामला दर्ज है।”डीसी ने आगे कहा कि उनसे पूछताछ की जा रही है और आगे की कार्रवाई की घोषणा बाद में की जाएगी।
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कौन हैं शिरीन शर्मिन चौधरी?
चौधरी ने अप्रैल 2013 से सितंबर 2024 तक बांग्लादेश जातीय संसद की पहली महिला अध्यक्ष के रूप में कार्य किया। वह रंगपुर-6 निर्वाचन क्षेत्र से संसद सदस्य के रूप में चुनी गईं। वह मूल रूप से 2009 में महिलाओं के लिए आरक्षित सीट के माध्यम से संसद में प्रवेश कर चुकी थीं और अध्यक्ष पद पर आसीन होने से पहले महिला एवं बाल मामलों की राज्य मंत्री के रूप में कार्य कर चुकी थीं। जुलाई में हुए उस विद्रोह के बाद जिसने अवामी लीग प्रशासन को गिरा दिया। इसमें पार्टी के अधिकांश शीर्ष नेता छिप गए। वहीं, कई पूर्व मंत्रियों और सांसदों को गिरफ्तारी का सामना करना पड़ा। इस दौरान चौधरी सार्वजनिक रूप से नजर नहीं आए और 8 अगस्त, 2024 को अंतरिम सरकार के शपथ ग्रहण समारोह में भी अनुपस्थित रहे।
राष्ट्रपति मोहम्मद शहाबुद्दीन ने हसीना के देश छोड़कर भागने के एक दिन बाद संसद भंग कर दी। हालांकि संवैधानिक नियमों के अनुसार अध्यक्ष तब तक पद पर बने रहते हैं जब तक कि उनका उत्तराधिकारी शपथ नहीं ले लेता, लेकिन शिरिन ने उस संक्रमण काल से पहले ही पद छोड़ने का विकल्प चुना, जैसा कि बीडीन्यूज 24 ने रिपोर्ट किया है।