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केमिकल टैंक में ब्लास्ट का खतरा: 50 हजार से ज्यादा लोगों का विस्थापन, जहरीली गैस के खौफ से सहमा कैलिफोर्निया
पीटीआई, वाशिंगटन।
Published by: राकेश कुमार
Updated Mon, 25 May 2026 08:06 AM IST
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सार
एक खराब वाल्व की वजह से कैलिफोर्निया के 50,000 लोगों पर बड़ा खतरा मंडरा रहा है। हालांकि, प्रशासन पानी की बौछारों और टैंक की दरार की मदद से दबाव कम करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन जब तक पूरा केमिकल सुरक्षित बाहर नहीं आता, तब तक खतरा टला नहीं है।
कैलिफोर्निया में केमिकल लीक
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
अमेरिका के दक्षिणी कैलिफोर्निया में एक बड़ा हादसा रोकने के लिए अधिकारी दिन-रात एक कर रहे हैं। यहां एक फैक्ट्री में केमिकल का टैंक खराब हो गया है। इस टैंक से खतरनाक गैस निकल रही है, जिसके डर से हजारों लोगों को अपने घर छोड़कर जाना पड़ा है।
गार्डन ग्रोव शहर की जीकेएन एयरोस्पेस फैक्ट्री के एक टैंक में करीब 22,713 से 26,498 लीटर 'मिथाइल मेथाक्राइलेट' नाम का केमिकल भरा है। पिछले हफ्ते यह टैंक अचानक बहुत ज्यादा गर्म हो गया और इससे जहरीली गैस हवा में फैलने लगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर टैंक का तापमान कम नहीं हुआ, तो या तो सारा केमिकल बाहर बह जाएगा या फिर टैंक बम की तरह फट जाएगा। इस वीकेंड पर सुरक्षा के लिए 50,000 से ज्यादा लोगों को इलाका खाली करने को कहा गया है। अच्छी बात यह है कि अभी तक कोई घायल नहीं हुआ है। दमकलकर्मी टैंक पर लगातार पानी डालकर उसे ठंडा कर रहे हैं।
क्यों खतरनाक है यह केमिकल?
यह केमिकल एक ऐसा लिक्विड है जिसमें आसानी से आग लग जाती है और इसका कोई रंग नहीं होता। इसका इस्तेमाल प्लास्टिक और नकली दांत बनाने में होता है। सरकार ने इसे बेहद खतरनाक माना है। पर्यावरण एजेंसी ईपीए के मुताबिक, इसकी गैस से आंख, नाक और फेफड़ों में तेज जलन होती है। ज्यादा मात्रा में यह गैस शरीर में जाए तो चक्कर आने लगते हैं, याददाश्त पर असर पड़ता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। हालांकि, राहत की बात है कि अभी हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य है।
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टैंक में क्या खराबी आई है?
इस मुसीबत की वजह यह है कि टैंक का ड्रेनेज वाल्व यानी केमिकल निकालने वाला रास्ता खराब हो गया है। अगर इसे ठीक नहीं किया गया, तो बड़ा केमिकल स्पिल होगा या फिर धमाका हो जाएगा। दमकल विभाग टैंक के तापमान को 29.4 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने में जुटा है ताकि अंदर दबाव न बने। ईपीए चीफ ली जेल्डिन ने कहा कि सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि केमिकल को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खुद ही बाहर निकलने दिया जाए, ताकि अधिकारी उसे काबू में कर सकें।
यह भी पढ़ें: कैलिफोर्निया की फैक्ट्री में केमिकल लीक: सुरक्षित स्थानों पर भेजे गए 40,000 लोग, अब भी बड़े विस्फोट का खतरा
अगर धमाका हुआ तो क्या होगा?
अगर टैंक का तापमान बढ़ा, तो अंदर का लिक्विड केमिकल गैस बन जाएगा। गैस बनने से दबाव बढ़ेगा और टैंक फट सकता है। इससे आसपास के दूसरे टैंकों में भी आग लग सकती है। स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर रेजिना ने बताया कि धमाका होने पर यह जहरीली गैस दूर-दूर तक फैल जाएगी। इससे लोगों के गले में खराश, आंखों में जलन और चक्कर आने जैसी समस्याएं होंगी। डिजनीलैंड के दो पार्क इस खतरे के दायरे से बाहर हैं, इसलिए वहां के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।
रविवार को अधिकारियों ने बताया कि टैंक में एक हल्की दरार दिख रही है। केमिस्ट्री के प्रोफेसर एलियास पिकाजो ने बताया कि यह दरार एक तरह से अच्छी है, क्योंकि इससे थोड़ी-थोड़ी गैस बाहर निकल जाएगी और अंदर का दबाव कम होगा। इससे अधिकारियों को अंदर के केमिकल को ठंडा करके जमाने का समय मिल जाएगा। कंपनी और प्रशासन मिलकर इस खतरे को टालने में जुटे हैं।
गार्डन ग्रोव शहर की जीकेएन एयरोस्पेस फैक्ट्री के एक टैंक में करीब 22,713 से 26,498 लीटर 'मिथाइल मेथाक्राइलेट' नाम का केमिकल भरा है। पिछले हफ्ते यह टैंक अचानक बहुत ज्यादा गर्म हो गया और इससे जहरीली गैस हवा में फैलने लगी। अधिकारियों का कहना है कि अगर टैंक का तापमान कम नहीं हुआ, तो या तो सारा केमिकल बाहर बह जाएगा या फिर टैंक बम की तरह फट जाएगा। इस वीकेंड पर सुरक्षा के लिए 50,000 से ज्यादा लोगों को इलाका खाली करने को कहा गया है। अच्छी बात यह है कि अभी तक कोई घायल नहीं हुआ है। दमकलकर्मी टैंक पर लगातार पानी डालकर उसे ठंडा कर रहे हैं।
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क्यों खतरनाक है यह केमिकल?
यह केमिकल एक ऐसा लिक्विड है जिसमें आसानी से आग लग जाती है और इसका कोई रंग नहीं होता। इसका इस्तेमाल प्लास्टिक और नकली दांत बनाने में होता है। सरकार ने इसे बेहद खतरनाक माना है। पर्यावरण एजेंसी ईपीए के मुताबिक, इसकी गैस से आंख, नाक और फेफड़ों में तेज जलन होती है। ज्यादा मात्रा में यह गैस शरीर में जाए तो चक्कर आने लगते हैं, याददाश्त पर असर पड़ता है और सांस लेने में दिक्कत होती है। हालांकि, राहत की बात है कि अभी हवा में प्रदूषण का स्तर सामान्य है।
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इस मुसीबत की वजह यह है कि टैंक का ड्रेनेज वाल्व यानी केमिकल निकालने वाला रास्ता खराब हो गया है। अगर इसे ठीक नहीं किया गया, तो बड़ा केमिकल स्पिल होगा या फिर धमाका हो जाएगा। दमकल विभाग टैंक के तापमान को 29.4 डिग्री सेल्सियस से नीचे रखने में जुटा है ताकि अंदर दबाव न बने। ईपीए चीफ ली जेल्डिन ने कहा कि सबसे सुरक्षित तरीका यह है कि केमिकल को थोड़ी-थोड़ी मात्रा में खुद ही बाहर निकलने दिया जाए, ताकि अधिकारी उसे काबू में कर सकें।
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अगर धमाका हुआ तो क्या होगा?
अगर टैंक का तापमान बढ़ा, तो अंदर का लिक्विड केमिकल गैस बन जाएगा। गैस बनने से दबाव बढ़ेगा और टैंक फट सकता है। इससे आसपास के दूसरे टैंकों में भी आग लग सकती है। स्वास्थ्य अधिकारी डॉक्टर रेजिना ने बताया कि धमाका होने पर यह जहरीली गैस दूर-दूर तक फैल जाएगी। इससे लोगों के गले में खराश, आंखों में जलन और चक्कर आने जैसी समस्याएं होंगी। डिजनीलैंड के दो पार्क इस खतरे के दायरे से बाहर हैं, इसलिए वहां के लोगों को डरने की जरूरत नहीं है।
रविवार को अधिकारियों ने बताया कि टैंक में एक हल्की दरार दिख रही है। केमिस्ट्री के प्रोफेसर एलियास पिकाजो ने बताया कि यह दरार एक तरह से अच्छी है, क्योंकि इससे थोड़ी-थोड़ी गैस बाहर निकल जाएगी और अंदर का दबाव कम होगा। इससे अधिकारियों को अंदर के केमिकल को ठंडा करके जमाने का समय मिल जाएगा। कंपनी और प्रशासन मिलकर इस खतरे को टालने में जुटे हैं।