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चीन ने शेनझोउ 23 अंतरिक्ष यान किया लॉन्च: एक यात्री सालभर स्पेस स्टेशन पर रहेगा, ड्रैगन का ये मिशन क्यों खास?
Mon, 25 May 2026 12:12 AM IST
हिमांशु सिंह चंदेल
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Mon, 25 May 2026 12:12 AM IST
सार
चीन ने शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक लॉन्च कर तीन अंतरिक्ष यात्रियों को तियांगोंग स्पेस स्टेशन भेजा है। मिशन में शामिल एक यात्री एक साल तक अंतरिक्ष में रहेगा। यह प्रयोग लंबे अंतरिक्ष मिशनों में इंसानी क्षमता को समझने के लिए किया जा रहा है। चीन इसे 2030 तक इंसान को चांद पर भेजने की तैयारी का अहम कदम मान रहा है। मिशन में पहली बार हांगकांग की महिला अंतरिक्ष यात्री भी शामिल हैं।
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तियांगोंग स्टेशन क्यों बन रहा है चीन की नई ताकत?
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
चीन ने अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को नई रफ्तार देते हुए रविवार रात शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान को सफलतापूर्वक लॉन्च कर दिया। इस मिशन के जरिए तीन अंतरिक्ष यात्रियों को चीन के तियांगोंग स्पेस स्टेशन भेजा गया है। खास बात यह है कि इस मिशन में शामिल एक अंतरिक्ष यात्री पूरे एक साल तक अंतरिक्ष में रहेगा। चीन इसे इंसानी शरीर और दिमाग पर लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने के असर को समझने का बड़ा प्रयोग मान रहा है। इस मिशन को चीन के 2030 तक इंसान को चांद पर उतारने के लक्ष्य से भी जोड़कर देखा जा रहा है।
क्या है शेनझोउ-23 मिशन की सबसे बड़ी खासियत?
शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान को उत्तर-पश्चिम चीन स्थित जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया। मिशन में कमांडर झू यांगझू के साथ झांग झियुआन और लाई का-यिंग शामिल हैं। लाई का-यिंग को चीनी अधिकारियों ने ली जियायिंग नाम से भी पहचान दी है। वह हांगकांग में जन्मी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्हें किसी स्पेस मिशन में भेजा गया है। उनके पास कंप्यूटर फॉरेंसिक में डॉक्टरेट की डिग्री भी है। चीन ने इस मिशन को तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है।
ये भी पढ़ें- अमेरिकी राष्ट्रपति का नया बयान: ट्रंप बोले- मुझे भारत से प्यार, पीएम मोदी मेरे करीबी मित्र, मुझे वह बहुत पसंद
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अंतरिक्ष स्टेशन पर क्या काम करेंगे वैज्ञानिक और यात्री?
चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक यह टीम अंतरिक्ष स्टेशन पर कई वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परियोजनाओं पर काम करेगी। इसके साथ ही शेनझोउ-21 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इन-ऑर्बिट रोटेशन भी किया जाएगा। शेनझोउ-21 की टीम पिछले 200 दिनों से ज्यादा समय से तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर मौजूद है। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर पड़ने वाले असर, काम करने की क्षमता और मानसिक स्थिति का अध्ययन करना होगा। चीन का कहना है कि इससे भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों, खासकर चांद और उससे आगे की यात्राओं की तैयारी मजबूत होगी।
क्या अमेरिका-चीन की अंतरिक्ष होड़ अब और तेज होगी?
चीन लगातार अपने स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहा है। तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहले भी कई मिशन भेजे जा चुके हैं। चीन ने यह स्टेशन तब विकसित किया था, जब उसे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कार्यक्रम से लगभग बाहर कर दिया गया था। अब चीन और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष को लेकर मुकाबला और तेज होता दिख रहा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी 2028 तक फिर से इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चीन का यह मिशन सिर्फ वैज्ञानिक अभियान नहीं बल्कि ताकत और तकनीक का प्रदर्शन भी माना जा रहा है।
तियांगोंग स्टेशन क्यों बन रहा है चीन की नई ताकत?
तियांगोंग स्पेस स्टेशन का मतलब स्वर्गीय महल होता है। इस स्टेशन ने पहली बार 2021 में अंतरिक्ष यात्रियों की मेजबानी की थी। चीन का शेनझोउ कार्यक्रम लगातार विस्तार कर रहा है। पिछले साल इसी कार्यक्रम के तहत एक आपातकालीन मिशन भी चलाया गया था, जिसमें खराब अंतरिक्ष यान की वजह से स्टेशन पर फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया गया था। अब शेनझोउ-23 मिशन के जरिए चीन यह दिखाना चाहता है कि वह लंबे समय तक अंतरिक्ष में इंसानों को सुरक्षित रखने और बड़े वैज्ञानिक मिशन चलाने में सक्षम है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस मिशन पर टिकी हुई है।
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क्या है शेनझोउ-23 मिशन की सबसे बड़ी खासियत?
शेनझोउ-23 अंतरिक्ष यान को उत्तर-पश्चिम चीन स्थित जियुक्वान सैटेलाइट लॉन्च सेंटर से लॉन्च किया गया। मिशन में कमांडर झू यांगझू के साथ झांग झियुआन और लाई का-यिंग शामिल हैं। लाई का-यिंग को चीनी अधिकारियों ने ली जियायिंग नाम से भी पहचान दी है। वह हांगकांग में जन्मी पहली महिला अंतरिक्ष यात्री हैं, जिन्हें किसी स्पेस मिशन में भेजा गया है। उनके पास कंप्यूटर फॉरेंसिक में डॉक्टरेट की डिग्री भी है। चीन ने इस मिशन को तकनीक और विज्ञान के क्षेत्र में अपनी बड़ी उपलब्धि बताया है।
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अंतरिक्ष स्टेशन पर क्या काम करेंगे वैज्ञानिक और यात्री?
चीन के सरकारी मीडिया के मुताबिक यह टीम अंतरिक्ष स्टेशन पर कई वैज्ञानिक प्रयोग और तकनीकी परियोजनाओं पर काम करेगी। इसके साथ ही शेनझोउ-21 मिशन के अंतरिक्ष यात्रियों के साथ इन-ऑर्बिट रोटेशन भी किया जाएगा। शेनझोउ-21 की टीम पिछले 200 दिनों से ज्यादा समय से तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर मौजूद है। मिशन के दौरान अंतरिक्ष यात्रियों को लंबे समय तक अंतरिक्ष में रहने से शरीर पर पड़ने वाले असर, काम करने की क्षमता और मानसिक स्थिति का अध्ययन करना होगा। चीन का कहना है कि इससे भविष्य के लंबे अंतरिक्ष मिशनों, खासकर चांद और उससे आगे की यात्राओं की तैयारी मजबूत होगी।
क्या अमेरिका-चीन की अंतरिक्ष होड़ अब और तेज होगी?
चीन लगातार अपने स्पेस प्रोग्राम को आगे बढ़ा रहा है। तियांगोंग स्पेस स्टेशन पर पहले भी कई मिशन भेजे जा चुके हैं। चीन ने यह स्टेशन तब विकसित किया था, जब उसे राष्ट्रीय सुरक्षा चिंताओं के कारण इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन कार्यक्रम से लगभग बाहर कर दिया गया था। अब चीन और अमेरिका के बीच अंतरिक्ष को लेकर मुकाबला और तेज होता दिख रहा है। अमेरिका की अंतरिक्ष एजेंसी नासा भी 2028 तक फिर से इंसानों को चांद पर उतारने की तैयारी कर रही है। ऐसे में चीन का यह मिशन सिर्फ वैज्ञानिक अभियान नहीं बल्कि ताकत और तकनीक का प्रदर्शन भी माना जा रहा है।
तियांगोंग स्टेशन क्यों बन रहा है चीन की नई ताकत?
तियांगोंग स्पेस स्टेशन का मतलब स्वर्गीय महल होता है। इस स्टेशन ने पहली बार 2021 में अंतरिक्ष यात्रियों की मेजबानी की थी। चीन का शेनझोउ कार्यक्रम लगातार विस्तार कर रहा है। पिछले साल इसी कार्यक्रम के तहत एक आपातकालीन मिशन भी चलाया गया था, जिसमें खराब अंतरिक्ष यान की वजह से स्टेशन पर फंसे अंतरिक्ष यात्रियों को सुरक्षित वापस लाया गया था। अब शेनझोउ-23 मिशन के जरिए चीन यह दिखाना चाहता है कि वह लंबे समय तक अंतरिक्ष में इंसानों को सुरक्षित रखने और बड़े वैज्ञानिक मिशन चलाने में सक्षम है। यही वजह है कि दुनिया की नजर इस मिशन पर टिकी हुई है।