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Zhuque-3: समुद्र के बाद जमीन पर भी रॉकेट की सफल वापसी; क्या स्पेसएक्स को टक्कर देने की तैयारी में चीन?
Wed, 19 Aug 2026 11:33 AM IST
निर्मल कांत
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, बीजिंग।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 19 Aug 2026 11:33 AM IST
सार
Zhuque-3: चीन ने पहली बार झूछ्वे-3 रॉकेट के पहले चरण (हिस्से) को जमीन पर सफलतापूर्वक वापस उतारा है। इससे पहले जुलाई में उसने रॉकेट के पहले चरण को समुद्र में वापस हासिल किया था। क्या दोबारा इस्तेमाल होने वाली इस तकनीक से चीन स्पेसएक्स को टक्कर देने की तैयारी कर रहा है? पढ़िए रिपोर्ट
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चीन ने पहली बार जमीन पर रॉकेट का पहला हिस्सा वापस उतारा
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/माओ निंग/चीनी विदेश मंत्रालय की प्रवक्ता
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विस्तार
चीन ने पहली बार किसी रॉकेट के पहले हिस्से को जमीन पर सफलतापूर्वक वापस उतार लिया है। सरकारी मीडिया ने बुधवार को यह जानकारी दी। चीन अपने अंतरिक्ष कार्यक्रम को आगे बढ़ाने के लिए इस तकनीक को विकसित कर रहा है।
जमीन पर रॉकेट के पहले हिस्से को वापस उतारना चीन की पहली सफल कोशिश है। लेकिन रॉकेट के किसी हिस्से को वापस हासिल करने की यह चीन की दूसरी सफलता है। इससे पहले जुलाई में समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर रॉकेट के हिस्से को सफलतापूर्वक वापस उतारा गया था।
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चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट झूके-3 को बुधवार सुबह छोड़ा गया। इसके बाद रॉकेट के पहले हिस्से को सफलतापूर्वक वापस उतार लिया गया।
चीन ने यह तकनीक क्यों विकसित की?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन 2015 से रॉकेटों को वापस उतार रही हैं। इससे रॉकेट के उन हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल करके अंतरिक्ष में उपग्रह और दूसरे सामान भेजने की लागत कम करने में मदद मिली है, जिन्हें पहले इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता था।
ये भी पढ़े: तय समय से पहले खत्म होगा अमेरिका-दक्षिण कोरिया का सैन्य अभ्यास; क्या है ट्रंप के फैसले की वजह?
शिन्हुआ ने बताया कि बुधवार को रॉकेट को वापस उतारते समय चीन ने पहली बार खुलने वाले लैंडिंग पैर का इस्तेमाल किया। एजेंसी ने इसे चीन की दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट की तकनीक में एक बड़ी सफलता बताया।
समुद्र में कैसे वापस लाया गया था रॉकेट?
10 जुलाई को लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट का पहला हिस्सा उड़ान भरने के बाद दूसरे हिस्से से अलग हो गया था। इसके बाद वह समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर वापस आया था। उस समय रॉकेट को जाल से पकड़ने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल करके वापस हासिल किया गया था।
इसके अगले दिन, 11 जुलाई को जापान ने दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले एक प्रयोगात्मक रॉकेट की पहली परीक्षण उड़ान की। रॉकेट ने उड़ान भरने के बाद सुरक्षित तरीके से वापस जमीन पर उतरने में सफलता हासिल की। जापान भी रॉकेट को दोबारा इस्तेमाल करने वाली तकनीक हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की लागत कम करना और दुनिया के अंतरिक्ष बाजार में दूसरी बड़ी ताकतों से मुकाबला करना है।
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जमीन पर रॉकेट के पहले हिस्से को वापस उतारना चीन की पहली सफल कोशिश है। लेकिन रॉकेट के किसी हिस्से को वापस हासिल करने की यह चीन की दूसरी सफलता है। इससे पहले जुलाई में समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर रॉकेट के हिस्से को सफलतापूर्वक वापस उतारा गया था।
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Historic breakthrough: Zhuque-3 Y2 rocket completes China’s first land-based recovery, paving the way for reusable rockets—both on the sea and on land—and lower costs. 🚀 pic.twitter.com/ws1OLj1TpJ
— Mao Ning 毛宁 (@SpoxCHN_MaoNing) August 19, 2026
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चीन की सरकारी समाचार एजेंसी शिन्हुआ ने बताया कि दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले रॉकेट झूके-3 को बुधवार सुबह छोड़ा गया। इसके बाद रॉकेट के पहले हिस्से को सफलतापूर्वक वापस उतार लिया गया।
चीन ने यह तकनीक क्यों विकसित की?
एलन मस्क की कंपनी स्पेसएक्स और जेफ बेजोस की कंपनी ब्लू ओरिजिन 2015 से रॉकेटों को वापस उतार रही हैं। इससे रॉकेट के उन हिस्सों को दोबारा इस्तेमाल करके अंतरिक्ष में उपग्रह और दूसरे सामान भेजने की लागत कम करने में मदद मिली है, जिन्हें पहले इस्तेमाल के बाद फेंक दिया जाता था।
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शिन्हुआ ने बताया कि बुधवार को रॉकेट को वापस उतारते समय चीन ने पहली बार खुलने वाले लैंडिंग पैर का इस्तेमाल किया। एजेंसी ने इसे चीन की दोबारा इस्तेमाल होने वाले रॉकेट की तकनीक में एक बड़ी सफलता बताया।
समुद्र में कैसे वापस लाया गया था रॉकेट?
10 जुलाई को लॉन्ग मार्च-10बी रॉकेट का पहला हिस्सा उड़ान भरने के बाद दूसरे हिस्से से अलग हो गया था। इसके बाद वह समुद्र में बने एक प्लेटफॉर्म पर वापस आया था। उस समय रॉकेट को जाल से पकड़ने वाली व्यवस्था का इस्तेमाल करके वापस हासिल किया गया था।
इसके अगले दिन, 11 जुलाई को जापान ने दोबारा इस्तेमाल किए जा सकने वाले एक प्रयोगात्मक रॉकेट की पहली परीक्षण उड़ान की। रॉकेट ने उड़ान भरने के बाद सुरक्षित तरीके से वापस जमीन पर उतरने में सफलता हासिल की। जापान भी रॉकेट को दोबारा इस्तेमाल करने वाली तकनीक हासिल करने की कोशिश कर रहा है। इसका मकसद अंतरिक्ष में रॉकेट भेजने की लागत कम करना और दुनिया के अंतरिक्ष बाजार में दूसरी बड़ी ताकतों से मुकाबला करना है।