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बौद्ध धर्म पर ड्रैगन का डंक: बुद्ध की प्रतिमाओं को तोड़ रहा चीन, जानिए पूरा मामला

Thu, 17 Mar 2022 10:15 PM IST
शिव शरण शुक्ला वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्हासा
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, ल्हासा Published by: शिव शरण शुक्ला Updated Thu, 17 Mar 2022 10:15 PM IST
सार

बौद्ध प्रतिमाओं को नष्ट करने और मठों को ध्वस्त करके चीन तिब्बतियों के विश्वास और तिब्बती परंपराओं को संरक्षित करने के उनके अधिकार को नष्ट करना चाहता है। 

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china targets buddhism to wipe out religion in tibet
चीनी के राष्ट्रपति शी जिनपिंग (फाइल फोटो) - फोटो : Facebook

विस्तार

चीन के पहले राष्ट्रपति माओत्से तुंग की 16 मई 1966 को शुरू की गई सांस्कृतिक क्रांति  के बाद से बौद्ध धर्म चीन के निशाने पर है। वर्तमान में भी चीन में बौद्ध लोगों का उत्पीड़न लगातार किया जा रही है। चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में भी चीन तिब्बती लोंगो की आस्था और उनकी परंपराओं पर कुठाराघात कर रहा है। इसी क्रम में चीन बौद्ध प्रतिमाओं को नष्ट कर रहा है।

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मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग के कार्यकाल में दिसंबर 2021 से अब तक तिब्बत में तीन बौद्ध मूर्तियों को नष्ट किय़ा जा चुका है। इसके अलावा बीते कुछ दिनों  में जहां कई तिब्बती मठों को हानि पहुंचाई गई है वहीं बौद्ध भिक्षुओं पर भी कई तरह के प्रतिबंध लगाए गए हैं।  मीडिया रिपोर्ट्स में कहा गया है कि बौद्ध प्रतिमाओं को नष्ट करने और मठों को ध्वस्त करके चीन तिब्बतियों के विश्वास और तिब्बती परंपराओं को संरक्षित करने के उनके अधिकार को नष्ट करना चाहता है। 
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अपने इस उद्देश्य की पूर्ति के लिए चीन ने पिछले कुछ समय से अपना रुख आक्रामक कर लिया है। दरअसल, तिब्बती बौद्ध धर्मगुरू दलाई लामा साफ कर चुके हैं कि उनके निधन के बाद उनका अवतार भारत में मिलेगा। उन्होंने यह भी साफ किया था कि उनके बाद चीन द्वारा नामित किसी अन्य उत्तराधिकारी को स्वीकार नहीं किया जाएगा। गौरतलब है कि दलाई लामा को बौद्ध धर्मगुरुओं का अवतार माना जाता है। वे दुनिया भर के सभी बौद्धों का मार्गदर्शन करते हैं। वे 1959 से भारत में निर्वासितों का जीवन जी रहे हैं। 
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तिब्बती बौद्ध धर्म को चीनी सरकार के अनुकूल बनाने की कोशिश में चीनी कम्युनिस्ट पार्टी भारतीय तिब्बती बौद्ध धर्म गुरू के बदले चीनी गुरू को आगे बढ़ाने की कोशिश में लगी है। 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, नेपाल में स्थित गौतम बुद्ध की जन्मस्थली लुंबिनी को विकसित करने में चीन सक्रिय भूमिका निभाने की कोशिश में लगा है। इसको लेकर चीन नेपाल सरकार को तीन मिलियन अमेरिकी डॉलर की मदद भी दे रहा है। इस रकम से लुंबिनी में हवाई अड्डा, हाईवे, कंवेशन सेंटर और बौद्ध विश्वविद्यालय बनाने की योजना है। दरअसल, चीन भारत में बोधगया की तर्ज पर लुंबिनी को विकसित करने में लगा हुआ है।   

तिब्बत के क्षेत्रीय परिवहन विभाग ने बृहस्पतिवार को यह जानकारी दी कि तिब्बत में सड़कों की कुल लंबाई पिछले साल की तुलना में 1,20,000 किलोमीटर अधिक हो गई हैं क्योंकि चीन ने सुदूर हिमालयी क्षेत्र में अपनी बुनियादी ढांचा परियोजनाओं को तेज कर दिया है।तिब्बत में पांच शहरों और 67 प्रशासनिक गांवों को 2021 में पक्की सड़कों से जोड़ा गया है।

विभाग ने कहा कि साल के अंत तक तिब्बत के कुल शहरी क्षेत्र के 94.55 प्रतिशत और कुल प्रशासनिक गांवों के 77.94 प्रतिशत इलाकों तक पक्की सड़कें पहुंच गईं हैं। चीन तिब्बत में बुनियादी ढांचा सुविधाओं में सुधार कर बड़े पैमाने पर निर्माण कार्य कर रहा है।


गौरतलब है कि चीन ने पिछले साल प्रांतीय राजधानी ल्हासा को अरुणाचल प्रदेश के करीब तिब्बती सीमावर्ती शहर निंगची से जोड़ने वाली एक उच्च गति वाली बुलेट ट्रेन सेवा शुरू की थी। रेल, सड़क और हवाई अड्डे के बड़े पैमाने पर निर्माण से चीनी सेना की सीमावर्ती क्षेत्रों में पहुंच मजबूत होगी और वे इसकी मदद से तेजी से सैनिकों, रसद सामग्रियों और हथियारों को सीमावर्ती इलाकों में पहुंचा सकेंगे।
 

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